Wine and Beer Sale in Holi Festival
Wine and Beer Sale in Holi Festival|Google
देश

असली मजे तो ठेकेवालों ने लूट लिए, स्थानीय पुलिस की शह पर शराब नाच दिखा रही है।

त्यौहार पर शराब के कारोबार की कालाबाजारी, मनाही के बाबजूद बिक रही शराब।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

अर्थशास्त्र का एक सिद्धांत सदियों से चलता आ रहा है “कि जिस वस्तु की उपलब्धता कम होती है, मांग के चक्कर मे उसमें भयानक मूल्य व्रद्धि पायी जाती है। कई बार यह कालाबाजारी तक पहुँच जाती है। बाँदा और आस-पास के जिलों में देशी अंग्रेजी शराब के हाल कुछ इसी प्रकार है।

सरकार का आदेश, होली पर नहीं बिकेगी शराब :

राज्य सरकार ने पहले की भांति होली के अवसर पर असामाजिक तत्वों की पकड़ कमजोर करने के लिए शराब की बिक्री पर त्योहार में रोक लगा दी, ताकि रंगों के त्योहार पर किसी तरह का भंग न पड़े। और सभी जिलों की पुलिस इस काम पर लग चुकी है ताकि कोई भी उत्पाती व्यक्ति नशे में माहौल को न बिगाड़ सके।लेकिन असल हालात इससे कहीं अलग है, दरअसल यहाँ की कहानी कुछ और ही है।

कालाबाजारी चरम पर :

चाहे राष्ट्रीय पर्व हो या कोई और सरकारी शराब बंदी, लेकिन मजाल क्या जो पियक्कड़ों की खुराक में कमी आये, बस केवल एक फर्क है कि इस पीने के चक्कर मे लोगों की जेब हल्की हो जाती है। अंग्रेजी शराब अपने निर्धारित मूल्य से करीब पचास से सौ रुपये तक महंगी बिक रही है। वहीँ देशी मदिरा का एक क्वाटर जो करीब 75-80 रुपये का मिलता था अब वह 120-150 तक चोरी छिपे बेचा जा रहा है।

बियर तो मानो गंगाजल हो चुकी है:

जिले में युवा वर्ग की नशे में पहली पसंद बियर बनी हुई है इसी चक्कर मे शराब माफिया इस वर्ग को टारगेट करके होली में 150 रुपये में मिलने वाली बियर को 200 से लेकर 250 तक मे बेंच रहे हैं। चूंकि बियर को संरक्षित करने के लिए फ्रिज की आवश्यकता होती है तो इसे बहुत अधिक चोरी छिपे नहीं बेचा जा सकता इसीलिए लोगों के अनुसार इस चोरी और कालाबाजारी में स्थानीय पुलिस की मिलीभगत सामने आ रही है।

उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com