बाँदा में नहीं रुक रहा अवैध खनन, माफियाओं पर जिलाधिकारी की नजर हुई टेढ़ी

जिले में खनन माफियाओं पर कार्रवाई से मची अफरातफरी, डीएम ने खनन से जुड़े कई वाहन सीज किये
बाँदा में नहीं रुक रहा अवैध खनन, माफियाओं पर जिलाधिकारी की नजर हुई टेढ़ी
banda dm action on illegal miningGoogle Image

बीते दिनों जिला मुख्यालय (बाँदा) के चंद कदम दूर खनन माफियों के हमले की भनक उत्तर प्रदेश सरकार तक पहुंच चुकी है और जिले में आये नए जिलाधिकारी ने प्रदेश सरकार के निर्देशन पर माफियाओं को छकाना शुरू कर दिया है। बीते दिनों रेत निकासी के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्थान मटौन्ध, गिरवा, नरैनी और मुख्यालय के कालू कुवां में कई भारी वाहन बिना वैध रेत के सीज किये गए है।

डीएम ने चलाया चाबुक माफियाओं के होश फाख्ता :

जिस जिले में लंबे वक्त से अवैध रेत खनन को लेकर करोड़ों के वारे-न्यारे किये जा रहे हो उसपर अचानक से रोक लग जाना माफियाओं को रास नहीं आ रहा है। बीते दिनों जिला प्रशासन, खनिज और पुलिस की संयुक्त छापेमारी में तहसील नरैनी के अंतर्गत आने वाले थाना गिरवा के पास करीब 31 ट्रकों को अवैध तरीके से रेत ले जाते हुए पकड़ा गया है। मौके पर ही वाहनों की जब्ती करके सीज कर दिया गया है। वहीं जिला मुख्यालय में कालू कुँवा के पास 5 ट्रकों को सीज करके कालू कुँवा चौकी के सुपर्द किया गया है। साथ ही जिला अधिकारी ने इस मामले पर अधिकारियों को बिना कोई कोताही बरतते हुए कार्यवाही करने के निर्देश दिए है।

माफिया को रोकने के लिए लगेंगे कैमरे:

जिला अधिकारी ने खनन माफिया की सबसे बड़ी ताकत लोकेशन को तोड़ने के लिए शहर और हर उस रास्ते पर बुलेट कैमरा, आईपी कैमरा, इंफ्रारेड सर्विलांस कैमरा इत्यादि को इंस्टाल करने के लिए योजना बनाई है। जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि यह सभी सिस्टम तकनीकि रूप से जिला मुख्यालय से जुड़े रहेंगे और इन संवेदनशील जगहों को 24 घंटे जिला मुख्यालय से मॉनिटर किया जा सकेगा।

बेहद पावरफुल है खनन माफिया:

ये तो हुई जिलाधिकारी जी के प्रयासों की बात, लेकिन अगर सही तरीके से खनन माफिया के फुटप्रिंट तलाशे जाए तो ये सभी जानकारी धरी की धरी रह जायेगी दरअसल बुंदेलखंड के खनन माफिया जिलाधिकारी महोदय की सोच भी कही ज्यादा बड़ा नजर आता है, जानकार बताते है की अगर जिलाधिकारी महोदय का शिकंजा ज्यादा कसा तो महोदय का ट्रांसफर होना तय है देखना यह है कि खनन माफिया और जिला प्रशासन की इस लड़ाई में कौन बाज़ी मरता है। हालांकि यहां एक बात गौर करने योग्य है कि खनन को रोकने के लिए वही पुलिस आगे खड़ी नजर आती है जो खुद इंट्री फीस लेकर वाहनों को निकालने का जिम्मा लेती है।

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उदय बुलेटिन
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