दोना-पत्तल
दोना-पत्तल|उदय बुलेटिन
देश

सेना पूर्व विद्रोहियों को बना रही आत्मनिर्भर, बना रही कुशल कारीगर

बने हुए उत्पादों को देश विदेश में पसंद किया जा रहा है, उत्पादों को इस कदर पर्यावरण हितैषी बनाया गया है कि ये प्रकृति को खुद सहेजने का काम करते है।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

बना रहे तामूल पत्तल और दोने:

भारतीय सेना के द्वारा पूर्व में देश के सशत्र विद्रोह करने वाले युवाओं को मुख्य धारा में लाने के लिए हर वह हर संभव कार्य किया जा रहा है जिससे पूर्व में विद्रोही लोग समाज के साथ रच बस सके और एक इज्जत की जिंदगी जी सकें। इसी क्रम में सेना ने युवाओं को लेकर उन्हें तमाम प्रकार के कौशल में पारंगत करना शुरू कर दिया है जिसमे तामूल के तने से बनी हुई पत्तल और दोने आजकल दुनिया मे नाम कमा रहे है।

दोना-पत्तल
दोना-पत्तलउदय बुलेटिन

भारतीय सेना ने केरल के तमूलपुर जिले के अंतर्गत आने वाले गांव बोरांगजुली गांव में इस तरह के प्रशिक्षणों को करना शुरू किया है जिसके तहत पूर्व विद्रोही युवकों को इन्ही तनों के द्वारा पत्तलों और दोनो का निर्माण स्थानीय एनजीओ ऐसेम फाउंडेशन के साथ मिलकर किया जा रहा है। बता दे कि यह प्रोजेक्ट सेना ने एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस्तेमाल किया गया है ताकि इससे बने उत्पादों को सरकारी और गैरसरकारी संस्थानों में ऊपयोग कराके इसकी खपत बढ़ाई जाए।

गुणों से भरपूर है उत्पाद:

इस उत्पाद के बारे में सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उत्पाद बायो डिग्रेबल है जिससे एक वक्त के बाद यह खुद अपघटित होकर खाद का कार्य करने लगता है। पूरी तरह से प्राकृतिक होने की वजह से न तो यह प्रकृति को नुकसान पहुँचता है और न ही इसमे भोजन करने वाले किसी व्यक्ति को कोई हानि पहुचती है।

दोना-पत्तल
दोना-पत्तलउदय बुलेटिन

बड़े पैमाने पर उत्पादन करने का है प्लान:

दोना-पत्तल
दोना-पत्तलउदय बुलेटिन

सेना गैर सरकारी संगठन के साथ मिलकर इन उत्पादों को बड़े स्तर पर उत्पादन करने प्लान बना रही है इसके लिए ज्यादा संख्या में मशीनें खरीदी जा रही है, ताकि लोग इस तरह के प्राकृतिक उत्पादों के लिए सहज बन सकें।

उदय बुलेटिन के साथ फेसबुक और ट्विटर जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com