High Voltage Electricity Burnt appliances
High Voltage Electricity Burnt appliances |Uday Bulletin
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बाँदा के लोहरा में हाई वोल्टेज बिजली सप्लाई की बजह से सैकड़ो एप्लायंस फुंके, बिजली विभाग की लापरवाही का खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे।

ग्रामीण इलाकों में इस तरह की घटनाएं बेहद आम है जहाँ नियमों की जानकारी के बिना बिजली विभाग अपनी लापरवाही के कारण उपभोक्ताओं को चपत लगाता रहता है।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

बांदा जिले के मटौन्ध ग्रामीण इलाके में आने वाले गांव के ट्रांसफार्मर में तकनीकी खराबी होने की वजह से लोकल लाइन पर ज्यादा वोल्टेज दौड़ गया जिसकी वजह से गांव में ज्यादातर लोगों के घर मे चल रहे टीवी, फ्रिज, कूलर, एलईडी बल्ब, मोबाइल चार्जर इत्यादि फुंक गए। तेज बिजली का आलम इस कदर था कि घरों की वायरिंग में लगे हुए तार धू-धू करके जलने लगे। बिजली से चलने वाले लगभग सभी उपकरणों में भयानक चिंगारियां उठने लगी और कुछ उपकरणों में आग तक भी लगने से बची।

जेई साहब का रुतबा ही अलग है:

इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने आनन-फानन में पॉवर हाउस भूरागढ़ को फोन करके सप्लाई बंद कराई गई और इसके साथ ही तकनीकी वजह से लोगों के नुकसान की बात जब जूनियर इंजीनियर से की गई और जब उदय बुलेटिन के द्वारा यह पूंछा गया कि लोगों के नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है तो जेई साहब का टका सा जवाब था "आज तक तो किसी को नहीं दिया गया" हालांकि जब हमारे द्वारा उपभोक्ता अधिकारों की बात कही गयी तो जेई महोदय ने फोन को यह कहकर काट दिया कि सुबह बात करिये।

अगर जेई महोदय की बात करने की शैली को देखा जाए तो यह नजर आता है कि उपभोक्ता अधिकार जेई साहब के लिए मायने नहीं रखते। जेई साहब के बयान को अगर आधार बनाया जाए तो नतीजा यह निकल कर आता है कि जेई साहब वक्त बेवक्त उपभोक्ताओं की बिजली काट सकते हैं और मौका पड़ने पर तकनीकी समस्या के नाम पर लोगों के घर मे रखे कीमती उपकरण जला सकते हैं। लेकिन अगर उपभोक्ताओं की बात की जाये तो वो केवल बिल चुकाने और नुकसान कराने के लिए बैठे है।

ग्रामीणों ने जेई महोदय और पावर हाउस को चेतावनी दी है कि यह पहला मामला नहीं है इससे पहले भी तीन बार लोगों को नुकसान सहना पड़ा है लेकिन अब नहीं। ग्रामीण इस बार अपने हितों की रक्षा के लिए कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाएंगे और जरूरत पड़ने पर जिम्मेदार लोगों पर एफआईआर भी कराएंगे। क्योंकि बिजली विभाग के लापरवाही की बजह से उपभोक्ता नुकसान सहने भर के लिए नहीं है।

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उदय बुलेटिन
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