बुंदेलखंड में सरकारी जमीनों पर कब्जे का नया चलन, निर्वाचित पदाधिकारी और राजस्व विभाग की मिलीभगत

इस मामले पर लेखपालों और राजस्व के अधिकारियों का ग्रामीण स्तर के सो काल्ड नेताओं के साथ गठजोड़ सामने आ रहा है।
बुंदेलखंड में सरकारी जमीनों पर कब्जे का नया चलन, निर्वाचित पदाधिकारी और राजस्व विभाग की मिलीभगत
Land Scam in BundelkhandUday Bulletin

बुंदेलखंड में सरकारी जमीनों को कब्जे में लेने का नया चलन से चल गया है यहाँ पर बिना किसी अधिकार के जमीन पर हक जताकर कब्जा किया जा रहा है। इस मामले में भी सरकारी राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आ रही है जिसकी वजह से सरकारी जमीनों पर कब्जा करके उनको निजी उपयोग में लाया जा रहा है।

गायब हो रही जमीनें:

सबसे खतरनाक स्थिति बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाके में है जहाँ पर सबसे पहले जमीन के लोभियों ने तालाब और पोखर गायब कर दिए, वो जल स्रोत जो सिंचाई और जानवरों के लिए पेयजल का मुख्य साधन थे अब वह केवल सरकारी नक्शों पर ही उपलब्ध हैं। हालांकि इस मामले पर लीपापोती की वजह से न तो तालाबों का उद्धार हो पा रहा है और न ही प्रशासन इस पर कोई कड़ी कार्यवाही कर पा रहा है।

जिम्मेदारों ने जमीन बिल्कुल समाप्त ही कर दी है:

अगर जानकारों की माने तो बुंदेलखंड में अवैध रेत खनन के बाद जमीन का सबसे बड़ा मुद्दा है जिसमें पहले से रची हुई साजिश के तहत सरकारी जमीन को वजूद से खत्म किया जा रहा है। एक समय वह बुंदेलखंड जो तालाबों इत्यादि के लिए भारत भर में जाना जाता था लेकिन अब इस साइलेंट किलर की वजह से इन्हीं तालाबों, कुँओ को समाप्त किया जा रहा है। वहीँ जानवरों के उपयोग के लिए परती पड़ी हुई जमीनों को चुन-चुन कर समाप्त किया जा रहा है। देखना यह है कि सरकारी तंत्र इस रहस्य को जानकर भी कैसे नकार सकता है और अगर सरकार और प्रशासन इस पर नजर करता है तो कब तक करता है ?

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उदय बुलेटिन
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