यूपी में कोहरे का स्तर तो कम हुआ लेकिन बारिश के आसार गहराये

फरबरी महीने में पहले सप्ताह से दूसरे सप्ताह के भीतर भारी बारिश के आसार
यूपी में कोहरे का स्तर तो कम हुआ लेकिन बारिश के आसार गहराये
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बीते दिनों से उत्तर प्रदेश सर्दी के भीषण कहर से जूझ रहा है लेकिन मौसम विभाग ने इस सर्दी के मौसम में एक और चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार 5 फरवरी तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश होने की पूर्ण संभावना पाई जा रही है

कोहरे का स्तर हुआ समाप्त:

उत्तर प्रदेश में बसंत का पूर्ववर्ती माह फरवरी शुरू हो चुका है इस दौरान लोगों को कोहरे से निजात मिलने की शुरुआत हो चुकी है। बीता हफ्ता उत्तर प्रदेश के लिए कोहरे और गलन से भरा हुआ रहा लेकिन मौसम में हुए परिवर्तन से अब यूपी वासियों को कोहरे से निजात मिलने के आसार नजर आ रहे है। उत्तर प्रदेश के लगभग सभी इलाकों में कोहरे का असर अब सूरज के निकलते ही नजर आ रहा है लेकिन कोहरे के गायब होने के बावजूद में गलन और सर्दी में कोई राहत मिलती हुई नही आ रही है।

बन रहे है बारिश के योग:

लखनऊ स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के डायरेक्टर जेपी गुप्ता ने चेतावनी जारी करते हुए बताया कि उत्तराखंड समेत अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े मौसम बदलाव के प्रबल संकेत मिल रहे है। 2 फरवरी से ही पहाड़ों पर पश्चमी विक्षोभ की उपस्थिति नजर आ रही है। जिससे उत्तर प्रदेश के पूर्वी इलाके में 4 फरवरी से 6 फरवरी के बीच बारिश होने की प्रबल संभावना पाई जा रही है।

लखनऊ रहेगा बादलों के साये में:

मौसम विज्ञान केंद्र के द्वारा जारी की गई चेतावनी में यह विशेषकर दर्शाया गया है कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ 5 फरवरी पूरे दिन बादलों से ढकी रहेगी इस दौरान मौसम में बिजली की गरज और बारिश के संकेत भी मिल रहे है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में कोहरे की अनुपस्थिति के बावजूद आगे आने वाले दो दिनों तक सर्दी का कहर जारी रह सकता है, बांकी 6 फरवरी के बाद मौसम में सुधार की आशंका पाई जा रही है उत्तर प्रदेश के बाँदा, महोबा और हमीरपुर इत्यादि इलाके के नदियों के किनारे वाले क्षेत्रों में सर्दी का ज्यादा असर देखने को मिला यहां न्यूनतम तापमान 9 डिग्री तक गिरा वही 29 डिग्री तक के उच्च तापमान के पहुंचने की आशंका जताई गई है।

फसलों पर पड़ेगा मिश्रित असर:

अगर किसानों की दृष्टि से देखे तो मौसम के इस परिवर्तन का असर मिश्र रूप से देखने को मिल सकता है, जो फसल फ़ूलने की स्थिति में होगी उसको बारिश में नुकसान हुआ तय है जबकि जो फसल अपनी शुरुआती और फलने की अवस्था मे होगी वह इस बरसात के जरिये अपनी पानी की कमी को पूरा कर सकती है।जानकारों का यह भी मानना है कि क्षेत्र विशेष के अनुसार इस बारिश का असर भिन्न भिन्न हो सकता है।

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उदय बुलेटिन
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