उदय बुलेटिन
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Sharjeel Imam
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देश

आखिर मतांध भीड़ ने शरजील इमाम को नायक बना कर पेश ही कर दिया। 

आपको अपने नायक चुनने की आजादी है, लेकिन ध्यान रहे कि नायक अगर पथभ्रष्ट है तो आप कभी लक्ष्य तक नहीं पहुँच सकते। 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

दिल्ली का शाहीन बाग हो या फिर बिहार का मजमा, या फिर अलीगढ़ की जमात, सब जगह जाकर शरजील ने देश के प्रति जहर उगला, नतीजा आपके सामने है आप देश मे चल रही नीतियों का संवैधानिक तरीके से विरोध कर सकते है लेकिन आपको यह आजादी नही है कि आप देश को तोड़ने की बात करे, लेकिन अब इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेदों में छिद्रों की नकारात्मक भूमिका कहे, या लिबरल होने का नाजायज फायदा, आप देश को तोड़ने की बात कह सकते है समस्या तो तब खड़ी होती है जब आप ऐसे लोगो को अपना नायक बना कर पेश कर देते है।

पुलिस ने धर लिया :

शरजील इमाम भले ही लोगों को बरगलाने में एक हद तक कामयाम हुआ हो, लेकिन जैसे ही शरजील पर एफआईआर कायम हुई, पुलिस सतर्क हो गयी और शरजील किसी तरह कानून से शिकंजे से निकलने की कोशिश करने लगा। लेकिन अब इसे पुलिस का भाग्य कहें या फिर प्रेमिका की बेवफाई आखिरकार पुलिस ने प्रेमिका के इशारे पर शरजील धर लिए गए और देश की अखंडता को चुनौती देने, देश को टुकड़ो-टुकड़ो में विभक्त करने के आरोप में कानूनी धाराएं लगाई गई।

फिर हुआ असल बवाल :

शरजील का पुलिस के शिकंजे में जाना कुछ लोगों को हजम नही हुआ, दरअसल शरजील और उसके जैसे कुछ लोगों ने जो जहर के बीज बोए थे उनमें अंकुर आना शुरू हो गया ,जय भीम के झंडे के तले "शरजील तेरे सपनो को हम मंजिल तक पहुचायेंगे " के नारों की दुहाई दी जाने लगी, दरअसल इस तरह की घटनाएं परमाणु बमो से भी ज्यादा खतरनाक होती है, ये ठीक वैसे ही है जैसे कुछ लोगो द्वारा नाथूराम गोडसे को अपना आइडल मान लिया जाता है, ये दोनों ही करेक्टर उस विषाक्त तीर की तरह है जो आगे आने वाली नस्लों को सदियों के लिए अपाहिज बना कर छोड़ेंगे।

क्या हो सकता है संकट ?

दरअसल गलती उन व्यक्तियों की नहीं है जो इस तरह की विचारधारा को जन्मते है बल्कि असल दोष हम सब मे है जो इस तरह के व्यक्तियों को सिर पर चढ़ा कर उनका महिमा मंडन किया जाता है। ये लोग समाज मे वो फसल पैदा करने में सफल हो जाते है जिसका न तो कोई आधार है न ही ऊँचाई, बस केवल समाज मे पानी की काई की तरह तैरते रहते है, जिनका काम सिर्फ साफ पानी को लोगों की पहुँच से दूर रखना होता है।

मेरे निजी विचार से शाहीन बाग के आसपास हुई कुछ गोलीबारी की घटनाएं इसी कुंठा का परिणाम हो सकती है, हालकि ये घटनाएं किसी तरह से जस्टिफाई करने योग्य नहीं है। जो भी आरोपी है उन्हें कानून की धाराओं के तहत यथोचित दंड दिया जाना चाहिए, लेकिन सवाल अब भी यही है, कि आखिर शरजील जैसे लोगों का इलाज क्या है?

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