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डीएम कार्यालय में कार्यरत पिता पर लगा बेटी के साथ दरिंदगी करने का आरोप

जिसको पैदा किया उसी के साथ दुराचार करने लगा, आबरू बचाने वाले ने ही आबरू लूट ली।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

माँ बेटी ने पिता पर आरोप लगाए की पिता ने सुना मौका पाकर बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश की और उच्च विभाग में पदस्थ होने के कारण हमारी आवाज को सरकारी तंत्र की मदद से दबाने का प्रयास किया जा रहा है, मामला उत्तर प्रदेश के बांदा से जुड़ा हुआ है

लगाए संगीन आरोप:

बांदा नगर कोतवाली अंतर्गत पीड़िता की माँ ने अपने पति संतोष कुमार गिरी (जैसा कि आरोपिता ने मीडिया को बताया) बांदा जिलाधिकारी ऑफिस में कार्यरत है पिछले दिनों जब मैं घर से बाहर गयी हुई थी जिसपर मेरे पति ने घर में सूना मौका देखकर बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश की, जब मैं घर आई तो बेटी ने इस बाबत सारी जानकारी मुझे दी और पुलिस में शिकायत करने के बाद मेडिकल कालेज में मेडिकल चेकअप के लिए भेजा गया।

सब मिले हुए हैं:

पीड़िता की माँ ने जिला प्रशासन और पुलिसकर्मियों को अपने पति से मिले होने के आरोप लगाए, पीड़िता ने बताया कि मेरे पति जिलाधिकारी ऑफिस में कार्यरत है इसलिए कोई विभाग उनसे दुश्मनी मोल नहीं लेना चाहता इसीलिए जब मेरी बेटी को मेडिकल चेकअप के लिए मेडिकल कालेज भेजा गया तो वहां जानबूझकर मेडिकल चेकअप में ढिलाई बरती गई और शासन द्वारा निर्धारित मानकों को ताक पर रखा गया। पीड़िता की माँ ने बताया कि जानबूझकर मेरी बेटी का मेडिकल चेकअप पुरुष डाक्टर द्वारा कराया गया जिससे मेरी बेटी को तकलीफ में होने के बाद शर्मिंदगी झेलनी पड़ी।

पुलिस कर रही है उल्टा परेशान:

पीड़िता की माँ ने जिला पुलिस प्रशासन पर संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस मेरे पति को बचाने का भरसक प्रयास कर रही है। पीड़िता की माँ के अनुसार हमे कोतवाली में भी लगातार बेइज्जत किया जा रहा है और जब हमने गलत तरीके से हुए मेडिकल चेकअप की बात कही तो हमे कोतवाली से वापस भेजा जा रहा है, इस मामले को लेकर पीड़िता जब बांदा पुलिस अधीक्षक के पास पहुंची तो उन्हें दोबारा मेडिकल कराने की बात कहकर वापस कर दिया गया और एसपी महोदय से मिलने का अवसर नहीं दिया गया।

अंजाम हो सकते है बुरे:

पीड़िता और पीड़िता की माँ ने अपने पिता और पति पर प्रशासनिक दबाव बनाने और उनकी सुनवाई न कराने के आरोप लगाये, पीड़िता की माँ ने कहा कि सबसे पहले मेरे पति को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया जाना चाहिए और बेटी के साथ हुए दुर्व्यवहार के एवज में न्याय मिलना चाहिए। चूंकि पीड़िता के आरोपी पिता जिलाधिकारी कार्यालय में ही कार्यरत है इस प्रकार से उन्हें सुनवाई की आशा कम है लेकिन पीड़िता ने कहा कि अगर उनकी सुनवाई नहीं होती है तो वो कड़े कदम उठा सकती है।

उदय बुलेटिन
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