बाँदा मेडिकल कालेज में सबकुछ सामान्य नही, सूत्रों ने प्रबंधन पर लगाये गंभीर आरोप

ये समय ऐसा है जब लोग अस्पताल और डाक्टरों के भरोसे है लेकिन बाँदा का मेडिकल कॉलेज इन दिनों बड़ी लापरवाही कर रहा है
बाँदा मेडिकल कालेज में सबकुछ सामान्य नही, सूत्रों ने प्रबंधन पर लगाये गंभीर आरोप
बाँदा मेडिकल कालेज में सबकुछ सामान्य नही, सूत्रों ने प्रबंधन पर लगाये गंभीर आरोपUday Bulletin

इन दिनों कोविड से पूरा देश त्रस्त है इस दौरान केवल एक ही उम्मीद नजर आती है वह है अस्पताल और मेडिकल कालेज, लेकिन बाँदा का मेडिकल कालेज इन दिनों अव्यवस्था का केंद्र बनता नजर आ रहा है। सूत्रों ने इस मामले में बड़े ही गंभीर खुलासे किये है जिससे मेडिकल कालेज की साख पर बट्टा लगता नजर आ रहा है।

आक्सीजन की सप्लाई केवल आईसीयू तक सीमित:

दरअसल बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया में बाँदा मेडिकल कालेज में भर्ती मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग जोर पकड़ रही है। लोग सोशल मीडिया में कानपुर तक से सिलेंडर मंगाने की बात करते हुए नजर आ रहे है ऐसे वक्त में जब चित्रकूट धाम मंडल के मंडलायुक्त जिले में निर्बाध आक्सीजन सप्लाई होने की दावेदारी ठोकते हुए नजर आ रहे है।

वहीँ मेडिकल कालेज में उपस्थित सूत्रों के हवाले से खबर है कि मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल मुकेश यादव द्वारा एक तुलगकी फरमान की चर्चाएं जोरों पर है। आरोपों के अनुसार मुकेश यादव ने साफ साफ लहजे में चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ को निर्देशित किया है कि वह किसी भी स्थिति में आइसोलेशन वार्ड समेत इमरजेंसी वार्डो में किसी को कोविड संक्रमित को ऑक्सीजन उपलब्ध नही कराई जाए। दरअसल आक्सीजन के नाम पर महज कुछ सिलेंडर केवल और केवल आईसीयू के मात्र दो वार्डों के लिए उपलब्ध हो पाए है।

डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कोविड जांच हुई बंद:

मामले पर गुप्त सूत्रों द्वारा मंडल के एकमात्र मेडिकल कालेज पर एक और भारी आरोप लगा है दरअसल बीती 16 अप्रैल तक कोविड वार्डो में ड्यूटीरत डाक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की लगातार सैम्पलिंग कराई जाती थी और 14 दिन की ड्यूटी के बाद उनकी सैम्पलिंग आवश्यक होती थी इस दौरान मेडिकल कालेज में ड्यूटीरत कुछ डाक्टर और स्टाफ संक्रमित पाए गए। इसके बाद से प्रिंसिपल मुकेश यादव ने डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की जान को खतरे में डालते हुए 16 अप्रैल से सभी स्टाफ और डॉक्टरों की सैंपलिंग ही बंद करा दी। प्रिंसिपल मुकेश यादव का कहना है कि किसी की सैम्पलिंग तभी की जाएगी जब किसी व्यक्ति/चिकित्साकर्मी का आक्सीजन स्तर 90 के नीचे पाया जाएगा। दरअसल इसके पीछे मेडिकल कालेज के प्रिंसपल मुकेश यादव की एक बेहद अजीब और गलत रणनीति है कि अगर लगातार सैम्पलिंग होती रहेगी तो स्टाफ पॉजिटिव पाया जाता रहेगा। जब सैम्पलिंग ही नही तो पॉजिटिव ही नही।

पैसा और समय होने पर भी आक्सीजन निर्बाध नही हो पाई:

जानकारों की माने तो मंडल में एक मात्र मेडिकल कालेज में बीते सत्र में एक भारी भरकम रकम आकस्मिक सप्लाई प्लांट के लिए आवंटित की गई थी। जिसके द्वारा लगभग सभी वार्डो में निर्बाध आक्सीजन सप्लाई हो सके लेकिन वक्त और पैसा दोनो होने के बावजूद भी समय रहते पूरा नही कराया गया। जिसकी वजह से लगातार जान जाने का सिलसिला जारी है। सूत्रों ने तो यह भी बताया कि बीते कुछ दिनों में आईसीयू में महज आक्सीजन की कमी के कारण लोगों ने अपनी जाने खो दी है।

सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिस तरह से प्रशासन आक्सीजन उपलब्धता को लेकर अपनी पीठ थपथपा रहा है लेकिन सामने आते हुए आंकड़े इस तरह की वाहवाही को नकार रहे है। वहीँ लगातार हर दिन मेडिकल कालेज में उच्चाधिकारियों का दौरा चल रहा है। सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि कितनी आसानी से इतनी भारी खामियों को मैनेज किया जा रहा है। जबकि लगातार तरीके से लोगों की मौतें हो रही है। परिजन मोर्चरी हाउस से लेकर मेडिकल कालेज तक मे हीलाहवाली के आरोप लगातार आंदोलन करते हुए नजर आ रहे है लेकिन अधिकारियों के हस्तक्षेप से इन विवादों को शांत कर दिया जा रहा है।

⚡️ उदय बुलेटिन को गूगल न्यूज़, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें। आपको यह न्यूज़ कैसी लगी कमेंट बॉक्स में अपनी राय दें।

No stories found.
उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com