क्या फ़ेक न्यूज़ फैलाने वालों को पद्मश्री जानबूझकर दिए जाते रहे?

फ़ेक न्यूज़ पूरी दुनिया के लिए बड़ी समस्या है लेकिन इसके बाबजूद भारत में फ़ेक न्यूज़ फ़ैलाने वालों को पद्मश्री जैसा सम्मान भी दिया गया
क्या फ़ेक न्यूज़ फैलाने वालों को पद्मश्री जानबूझकर दिए जाते रहे?
क्या फ़ेक न्यूज़ फैलाने वालों को पद्मश्री जानबूझकर दिए जाते रहे?Google Image

मामला वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई से जुड़ा हुआ है, जहां पर किसान आंदोलन के दौरान गलत न्यूज़ देने और भ्रामक खबर फैलाने के आरोप राजदीप पर लगे है, हालांकि बवाल बढ़ने के बाद खुद इंडिया टुडे ने राजदीप का एक महीने का वेतन काट कर समय विशेष के लिए ऑफ एयर कर दिया है लेकिन क्या इससे पाप धुलते है?

गलत खबर फैलाकर दंगे को भड़काने की कोशिश:

आपको क्या लगता है कि किसी दंगे का कुत्सित स्वरूप कब और कैसे खतरनाक किया जाता है, जाहिर तौर पर अफवाह फैलाकर, और ये झूठ अफवाहें तब और खतरनाक साबित होती है जब आप एक नामचीन हस्ती हो। खासकर जब आप मीडिया से होते है तो आपकी जिम्मेदारी आम आदमी से कई गुना बढ़ जाती है, लेकिन भारत मे अगर फ़ेक न्यूज़ का कारोबार देखे तो इसके अलग मायने नजर आते है, दरअसल मीडिया के अलग अलग गट सरकार और विपक्ष की वाहवाही करते नही थकते यही कारण है कि विपक्ष आश्रित पत्रकार हर संभव यह प्रयास करते है कि किसी प्रकार से सरकार की छीछालेदर हो।

अगर दिल्ली पुलिस के संयम की बात करें तो किसान ट्रेक्टर रैली के दौरान दिल्ली पुलिस ने गजब का संयम दर्शाया अन्यथा इस रैली का माहौल बेहद अलग नजर आता ,लेकिन बीच मे हुई घटनाओं ने इसे और खतरनाक होते होते बचाया, मामला किसान ट्रैक्टर रैली में दंगे की जगह आईटीओ से जुड़ा हुआ था। जहाँ पर यूपी के रामपुर के 27 वर्षीय युवा नवरीत सिंह आस्ट्रेलिया में रहकर पढ़ाई कर रहा था, किसान आंदोलन के कुछ दिन पहले शादी के बाद कि दावत देने के लिए भारत आया हुआ था इसके बाद ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन की बयार उठने लगी और नवरीत युवाओं के साथ दिल्ली के ट्रैक्टर रैली में पहुँच गया।

वहीँ आईटीओ में पुलिस प्रदर्शन कारियो को रोकने का प्रयास कर रही थी तभी नवरीत अपने ट्रैक्टर से स्टंट दिखाते हुए बैरिकेडिंग को तोड़ता हुआ चला आया, आखिरी बैरिकेडिंग में ट्रैक्टर पलट गया और नवरीत की दुःखद मौत हो गयी।

राजदीप ने किया फर्जी ट्वीट:

दरअसल किसान आंदोलन की ओर से यह जानकारी अफवाह के तौर पर फैलाई गई कि युवा किसान की मौत पुलिस की गोली के चलने से हुई है, इस मामले पर इंडिया टुडे के वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने बिना किसी फैक्ट चेक किये एक अफवाह को फैलाने का काम किया। हालाँकि जब इस मामले में दिल्ली पुलिस ने वीडियो जारी किया तो राजदीप ने बिना कोई स्पष्टीकरण दिए हुए अपने ट्वीट कोड डिलीट कर दिया ,लेकिन इस पर इंडिया टुडे ने राजदीप पर कार्यवाही करते हुए करीब 2 हफ्ते के लिए ऑफ एयर कर दिया गया और एक महीने की सैलरी तक काट ली।

इस मामले को लेकर राजदीप पर एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है

क्या हो सकते थे परिणाम:

वैसे तो इस अफवाह को दंगाईयो ने दंगे की आग में पेट्रोल की तरह प्रयोग किया। हालाँकि गनीमत यह रही कि दिल्ली पुलिस ने दंगे के हर मामले पर कड़ी नजर रखने के लिए फोटोग्राफी को एक सुबूत के तरह पर प्रयोग करने के लिए सुरक्षित रखा, पुलिस ने अपने वक्तव्य में यह तक बताया कि वह ट्रैक्टर दुर्घटना में घायल युवा को एम्बुलेंस की मदद से अस्पताल पहुँचाना चाहते थे लेकिन किसानों की भीड़ ने इसे संभव नही होने दिया।

अगर समय रहते इस मामले का खुलासा नही होता तो दंगे में और घटनाओं को देखा जा सकता था

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उदय बुलेटिन
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