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दिल्लीवालों का पटाखों को ‘ना’ : सर्वे 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किये गए सर्वे में, दिल्ली में रहने वाले 68 फीसदी लोगों ने कहा इस दिवाली पटाखों से रहेंगे दूर 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में करीब 68 फीसदी लोगों का कहना है कि वे इस दिवाली पटाखे नहीं छोड़ेंगे। एक सर्वेक्षण से यह जानकारी सामने आई है। सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को पटाखों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने से इनकार तो कर दिया लेकिन इसके लिए कई शर्ते लगाईं। इनमें से यह भी है कि कम प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे दिवाली के दिन रात आठ से दस बजे तक ही चलाए जा सकेंगे।

सोशल मीडिया मंच लोकल सर्किल्स द्वारा दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कराए गए सर्वे में 75 हजार लोगों ने भाग लिया।

लोकल सर्किल्स द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, "करीब 68 फीसदी नागरिकों ने कहा है कि वे पटाखे नहीं चलाएंगे ताकि प्रदूषण के स्तर को काबू में रखने को सुनिश्चित किया जा सके और शहर को एक गैस चेंबर में तब्दील होने से रोका जा सके।"

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2016 में पीएम 2.5 का स्तर दिवाली पर दिल्ली के कुछ इलाकों में 1,238 तक पहुंच गया था, जो अंतर्राष्ट्रीय मानकों से करीब 50 गुना और राष्ट्रीय मानकों से 20 गुना अधिक था।

अक्टूबर 2017 में सर्वोच्च न्यायालय ने दिवाली के दौरान दिल्ली में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में पाया गया कि इसके बाद, दिल्ली में पिछली दिवाली पर 2016 की दिवाली के मुकाबले प्रदूषण का स्तर कम पाया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को सभी धार्मिक त्योहारों के दौरान पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने वाले पटाखों का प्रयोग करने की इजाजत दी, जिससे कम उत्सर्जन हो और ध्वनि प्रदूषण का स्तर कम बना रहे।

आपको बता दें कि, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार पर प्रदूषण को रोकने में विफल होने के कारण 50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने के फैसले को सही करार देते हुए पर्यावरणविद् व वैश्विक संगठनों का कहना है कि प्रदूषण को रोकने में विफल रहने पर केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) पर कार्ययोजना नहीं तैयार करने वाले 102 में से 66 शहरों पर भी इस तरह का जुर्माना लगाकर कार्रवाई की जानी चाहिए।