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योगी की गौशालाओं को बनाया जा रहा है कत्लगाह, और ग्राम प्रधान है इसके मुख्य जिम्मेदार।

बाँदा जिले के त्रिवेणी ग्राम प्रधान पर गंभीर आरोप, क्या योगी सरकार कराएगी जाँच?

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

देखिए जनाब यह प्रधानी है जिसका मुख्य मकसद गांव का विकास करना नहीं होता बल्कि आगे की पीढ़ियों को पैसे से मजबूत करना होता है अब चाहे वह मामला मनरेगा का हो या फिर योगी सरकार की गौवंश कल्याणकारी योजना गौशाला का, इन सब मे ग्राम प्रधान सुधीर चतुर्वेदी द्वारा योगी आदित्यनाथ के नाम को मिट्टी में मिलाया जा रहा है।

मामला बाँदा शहर ने बेहद नजदीकी गांव त्रिवेणी से जुड़ा हुआ है जहां के आक्रोशित सजग ग्राम वासियों ने ग्राम प्रधान सुधीर चतुर्वेदी की करतूतों को सबके सांमने रखने की कोशिश की है। ग्राम प्रधान सरकारी योजनाओं को सिर्फ पैसा बनाने का साधन समझ कर योजनाओं का क्रियान्वयन तो करा चुके है लेकिन उनका संचालन किस तरीके से हो रहा है इसकी खबर रखने वाला कोई व्यक्ति मौजूद नहीं है।

इस बार गौशाला पर उठी है उंगली :

त्रिवेणी गांव के किसानों के अनुसार गांव की गौशाला तो सरकारी आदेश और पैसे की बदौलत बन चुकी है लेकिन इस गौशाला के हालात इतने खराब है कि आये दिन कोई न कोई गौवंश और गाय मौत के मुंह मे समा रही है। ग्रामीणों ने वीडियो में बताया कि पिछले दिन सर्द मौसम में बारिस होने की वजह से अचानक गायों की हालत खराब होने लगी थी और रात की सर्दी में भूख और प्यास की वजह से तीन गायों की तत्काल मौत हो गयी। सुबह जब ग्रामीणों ने एक दर्जन के आस-पास बीमार गायों की हालत देखी तो ग्रामीणों ने अपने बल पर गांयो की सेवा श्रुशूसा उपलब्ध कराई, ग्रामीणों ने बताया कि अगर गौशाला में किसी भी गाय या गौवंश बीमारी में होता है तो उसका इलाज किसी पशु चिकित्सक से कराने की बजाय उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया जाता है और जब गाये मौत की शिकार हो जाती है तो उन्हें ग्राम प्रधान सुधीर चतुर्वेदी के आदेशानुसार गौशाला के नजदीक ग्रामीण बरसाती नाले में फिंकवा दिया जाता है, जिससे गांव को दुर्गंध का सामना करना पड़ता है।

ये हालात गौशाला की है ,बाकी अन्ना पशुओं की राम जाने :

ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में बताया कि ये हालात उन पशुओं के है जो गौशाला में डाले गए है लेकिन सरकारी आदेशों को नकार कर पैसो की बचत करने के लिए ग्राम प्रधान सुधीर चतुर्वेदी द्वारा भारी संख्या में पशुओं को खुला छोड़ा गया है उन पशुओं की इस मौसम में मौत होना तय ही है, ग्राम प्रधान पर ग्रामीणों ने सरकार द्वारा भेजे गए पैसो का निजी उपयोग करने का भी आरोप लगाया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना में भी रिश्वतखोरी का आरोप :

त्रिवेणी ग्राम प्रधान सुधीर चतुर्वेदी के कारनामे सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है बल्कि इससे पहले भी उस पर प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्रों के नाम काटकर अपात्रों को आवास मुहैया कराने को लेकर भी आरोप लग चुके है। ग्रामीणों के अनुसार अगर गरीब खुले आसमान में जीने वाले लोग अगर प्रधान से आवास की मांग करते तो ग्राम प्रधान खुलेआम पैसो की मांग करता है, ग्रामीणों ने दबी जुबान में बताया कि अगर गांव में प्रदान किये गए प्रधानमंत्री आवास और शौचालय योजना की गहन जांच हो तो करीब अस्सी फीसदी लाभ आपात्रो को दिया हुआ प्राप्त होगा।

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उदय बुलेटिन
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