corona in banda up
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देश

बांदा में कोरोना, काफी कुछ ठीक नहीं

अगर संक्रमण पर नजर डाले तो बांदा इन दिनों कोरोना के मामले में लगातार अपनी संख्या बढ़ाता हुआ नजर आ रहा है लेकिन अगर प्रशासन की तैयारी की बात करें तो बहुत बड़ा झोल नजर आता है।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

मरीज आइसोलेशन सेंटरों में कराह रहे है:

भले ही बांदा का सबसे सुखद पहलू यह है कि अभी तक जिले के अस्पतालों में भर्ती किसी भी व्यक्ति की संक्रमण से मृत्यु नहीं हुई है लेकिन अगर माहौल और हालातों को देखे तो सरकारी इंतजाम बहुत नाकाफी नजर आते हैं। सरकारी तंत्र में शामिल एक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर उदय बुलेटिन को यह जानकारी दी कि हमारे द्वारा नरैनी और बदौसा में संक्रमितों से लगातार बात की जा रही है वहां के लोगों ने सरकार के उपायों की तमाम कमियां बतायी हैं। होम आइसोलेशन का बहाना करके नरैनी जैसी जगहों पर मात्र एक दिन अस्पताल में रखकर कोरोना संक्रमित को घर भेज दिया जा रहा है और इसका मुख्य कारण है बेड का न होना। साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा अपने बचाव के लिए ये तरकीबें खोजी जा रही है।

अस्पतालों में खाने के हालात बेहद बुरे:

हमनें इस मामले में कोविड संक्रमण से जुड़े हुए करीब 10 लोगों से बात की तो हमें सबसे ज्यादा शिकायत अस्पताल में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता और मात्रा की मिली। कोरोना का इलाज करा रहे मेडिकल कालेज और अन्य कोविड सेंटरों में भोजन के नाम पर बेहद पतली दाल और मात्र दो रोटियों की मात्रा उपलब्ध कराई जा रही है। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन और आईसीएमआर ने इस महामारी से लड़ने के लिए अच्छे भोजन को मुख्य आधार बताया है। लोगों के आरोप है कि खाने की बात करने पर स्वास्थकर्मियों द्वारा लोगों को झिड़का जा रहा है।

अस्पतालों में गंदगी का अंबार है:

शिक्षा विभाग से जुड़ी हुई एक संक्रमित ने उदय बुलेटिन को बताया कि उन्होंने ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा, टॉयलेट से लेकर अस्पताल का हर कोना गंदगी से भरा हुआ रहता था अगर अस्पताल में सफाई इत्यादि पर ध्यान दिया जाये तो लोग मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे।

साथ ही जिला अस्पताल बांदा और मेडिकल कालेज में कोरोना टेस्टिंग को लेकर लंबे वक्त से खींचातानी चली आ रही है अगर किसी व्यक्ति को खुद में ऐसे लक्षण नजर आते है जो कोरोना से मिलते जुलते है तो उन्हें जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के लगातार चक्कर काटने पड़ रहे है इसके बाद व्यक्ति थकहार कर घर मे बैठने को मजबूर है।

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उदय बुलेटिन
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