बुंदेली युवाओं ने लोकगीत गायन में पाया देश मे दूसरा स्थान, समूचा बुंदेलखंड हुआ गौरवान्वित

बुंदेलखंड क्षेत्र की पहचान यहां गाए जाने वाले लोकगीत है, बुंदेलखंड की इसी पहचान को पूरे देश तक पहुँचाने का काम किया है बुंदेलखंड के एक युवा समूह ने
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कला आदिम जीव को मानव बनाती है और इसमें सबसे अधिक महत्व है संगीत कला का और अगर यह लोक गीत/ लोक संगीत है तो इससे मानव मन आत्मीयता आह्लादित हो उठता है। 24 वें राष्ट्रीय युवा फेस्टिवल में महोबा जिले के लोक गायकों ने अखिल भारतीय प्रतिस्पर्धा में द्वितीय स्थान पाकर जिले को गौरवान्वित किया है। समूचे क्षेत्र में महोबा के युवाओं को लेकर चर्चाएँ चल रही है।

बुंदेली युवाओं ने लोकगीत गायन में पाया देश मे दूसरा स्थान
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बुंदेली युवा ने दिखाई प्रतिभा:

केंद्रीय युवा और खेल मंत्रालय के तत्वाधान में आयोजित राष्ट्रीय युवा फेस्टिवल में महोबा जिले के होनहार युवाओं ने लोक गायन में देश में दूसरा स्थान हासिल किया। सनद रहे कि इससे पहले प्रांतीय रक्षा दल द्वारा आयोजित प्रदेश स्तर के कार्यक्रम में महोबा जिले के युवाओं ने लोक गायन में प्रथम स्थान पाकर लोक गायन श्रेणी में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया था। राष्ट्रीय स्तर पर इस कार्यक्रम को वर्चुअल तरीके से लखनऊ में आयोजित कराया गया जिससे सभी प्रदेशों के प्रतिभागियों ने अपने अपने प्रदेश मुख्यालयों से इस कार्यक्रम में भाग लिया था। लोक गायन की प्रतिस्पर्धा में केरल राज्य ने पहला स्थान पाया, वही उत्तर प्रदेश ने दूसरा स्थान हासिल किया।

आल्हा गायन से बिखेरी बुंदेली संस्कृति:

"बारह बरस लौ कूकर जीवे, औ सोलह लौ जिये सियार, बरस अठारह क्षत्रिय जीवे बाकी जीवन को धिक्कार"

राष्ट्रीय स्तर पर हुए वर्चुअल कार्यक्रम में जब महोबा के युवाओं ने लोक गायन श्रेणी में जब महोबा की बुंदेली संस्कृति को आल्हा के माध्यम से उतारा तो श्रोताओं के रक्त में उबाल आने लगा। सुनने वालों ने महोबा के बुंदेली लोक संगीत की अपरिमित कृति आल्हा (आल्हाखंड-महाकवि जगनिक द्वारा विरचित) की शैली की सराहना की, आपको बताते चले कि आल्हा गायन बुंदेलखंड के सबसे लोकप्रिय गायन है। लोग इस गायकी को सुनकर जोश से भर जाते है।

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अमित द्विवेदी ने मामले पर दी जानकारी:

इस समूह में गायक अमित द्विवेदी ने उदय बुलेटिन के साथ हुई बातचीत में बताया कि हमने इस मंच के जरिये बुंदेलखंड की संस्कृति को देश के पटल पर रखने का प्रयास किया है जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। इस गायन ग्रुप में अमित द्विवेदी, अमन सोनी, शरद अनुरागी, योगेन्द्र, जितेंद्र चौरसिया, दुष्यंत, बलबीर जितेंद्र चक्रवर्ती, पवन, राहुल अनुरागी, अमित विश्वकर्मा और सुमेंद्र कुमार के अलावा अन्य युवा युवती शामिल रहे। अमित द्विवेदी ने बताया कि जिले के हम युवाओं को संगीत के इस स्तर पर पहुँचाने के लिए संगीत गुरु श्री अबोध सोनी जी का सबसे अहम निर्देशन मिला है।

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क्या है आल्हा गायन?

आल्हा गायन दरअसल महोबा के दो महान सेनानियों ( आल्हा और ऊदल ) की वीरता भरे कारनामों का गायन है। विक्रमी 12 शताब्दी में जन्मे दक्षराज- बक्षराज के पुत्रों ने महोबा जिले की सीमाओं का विस्तार किया और बाहरी आक्रमणों से सुरक्षा भी की यही कारण था कि दिल्ली के सरदार पृथ्वीराज चौहान को भी महोबा के पानी का असर मालूम पड़ा था।

आल्हा गायन की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह गायन बेहद ओज पूर्ण शैली में है। वीर रस के काव्य होने की वजह से इसकी गायन शैली भी बेहद आक्रामक नजर आती है, बुंदेलखंड के बारे में आल्हाखंड में साफ साफ वर्णन मिलता है।

बुंदेलखंड की सुनो कहानी बुंदेलों की बानी में। पानीदार यहां का घोड़ा, आग यहां के पानी में

आल्हाखंड

आल्हा गायन की शैली का ही कारण है बॉलीवुड की बेहद रक्तपात वाली फिल्मों में शुमार ओमकारा और सलमान खान अभिनीत फिल्म दबंग में भी आल्हा गायन शैली का प्रयोग किया गया है।

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