बुंदेली छात्रों ने रचा कीर्तिमान, पाया प्रदेश में पहला स्थान

बीते दिनों उत्तर प्रदेश की राजधानी में महोबा जिले के विद्यार्थियों के एक दल ने लोकगीत गायन में उत्तर प्रदेश के सभी जिलों को पीछे छोड़कर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अपना स्थान पक्का किया।
बुंदेली छात्रों ने रचा कीर्तिमान, पाया प्रदेश में पहला स्थान
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कला दैवीय वरदान से प्राप्त विधा होती है जिसमें नित नए प्रकार के प्रयास की आवश्यकता होती है और अभ्यास के बल पर ही कला में पारंगत हुआ जा सकता है। बीते दिनों उत्तर प्रदेश की राजधानी में महोबा जिले के विद्यार्थियों के एक दल ने लोकगीत गायन में उत्तर प्रदेश के सभी जिलों को पीछे छोड़कर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अपना स्थान पक्का किया।

पाया पहला मुकाम:

बीते कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल महानिदेशालय के द्वारा आयोजित प्रतिस्पर्धा कार्यक्रम में महोबा जिले के युवा गायकों ने समा बांध दिया, इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के सभी जिलों से युवा शिरकत करने आये थे, लोकगीत गायन श्रेणी में छात्रों ने अन्य सभी जिलों के युवाओं को पीछे छोड़ते हुए प्रदेश में पहला मुकाम हासिल किया। पुरस्कार के तौर पर छात्रों को उपहार और प्रशस्ति पत्र दिए गए।

ये युवा रहे शामिल:

महोबा जिले की इस युवा टुकड़ी में अमित द्विवेदी, अमन सोनी, शरद अनुरागी, योगेन्द्र, जितेंद्र चौरसिया, दुष्यंत, बलबीर जितेंद्र चक्रवर्ती, पवन, राहुल अनुरागी अमित विश्वकर्मा और सुमेंद्र कुमार शामिल रहे। सनद रहे ये सभी छात्र बुंदेली लोक कला (लोकगीत गायन) में न सिर्फ महारत हासिल किए हुए है बल्कि इनके ग्रुप को कई बार प्रदेश स्तर पर सम्मानित किया गया है।

राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए हुए चयनित:

युवा कलाकारों में शामिल अमित द्विवेदी ने उदय बुलेटिन को जानकारी देते हुए बताया कि हमारा अगला लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता है जिसमें हमारी टीम को प्रथम वरीयता प्राप्त हुई है, देश मे आगामी समय मे इस विधा को लेकर होने वाली प्रतियोगिता में महोबा जिले की यह टीम प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेगी।

क्या है बुंदेली लोकगायन?

अगर बात बुंदेलखंड की हो और गायन की बात न हो तो बेमानी सी लगती है" बुंदेली हरबोलों के मुंह, हमने सुनी कहानी" की कवियत्री सुभद्रा कुमारी चौहान भी बुंदेली हरबोला संस्कृति से वाकिफ थी। कजरी, चैता, ठुमरी, दादरा, कहरवा से लेकर लोकगायन की हर विधा बुंदेलखंड में फ़लती फूलती रही है, समय समय पर महान गायकों ने इसे अपना योगदान देकर आगे बढ़ाया है।

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उदय बुलेटिन
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