Bihar Public Service Commission exam
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क्या बिहार लोक सेवा आयोग चुनावी माहौल में ढल रहा है ?

कोरोना वायरस के खौफ के बीच बिहार लोक सेवा आयोग यानी बीपीएससी (BPSC) से अहम खबर सामने आई है। बिहार चुनाव के आगे कोरोना बेअसर हो गया चुनाव जीतने के लिए सत्तादल के नेता कुछ भी करने को तैयार।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

जिस बिहार लोक सेवा आयोग पर कभी भी कोई परीक्षा सही समय पर न कराए जाने के आरोप लगते रहे है वही लोक सेवा आयोग अब चुनावी माहौल में सत्ता पक्ष की पार्टी के नंबर बढ़ाने के चक्कर मे अभ्यर्थियों की जान को जोखिम में डालकर अपना उल्लू सीधा करने में लगी है। लोगों ने यह आरोप भी लगाए की क्या बिहार सरकार केवल बिहार राज्य के लोगों को नौकरी देने के मूड में है?

लोगों के आरोप, चुनावी मुद्दे बनाये जा रहे है:

बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा कराई जाने वाली 31वीं बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा का आयोजन आगामी 7 अक्टूबर 2020 को कराया जा रहा है जिसके चलते अभ्यर्थियों में परीक्षा को लेकर न सिर्फ मुश्किलें बढ़ रही है बल्कि इस परीक्षा में होने वाली जल्दबाजी को लेकर बिहार संघ लोक सेवा आयोग पर आरोप लगाए जा रहे है। दरअसल कोरोना काल मे देशभर ( खासकर हिंदी भाषी क्षेत्र ) के अभ्यर्थियों द्वारा इस परीक्षा में में शामिल होने के लिए जद्दोजहद की जा रही है लेकिन अगर ताजा हालत पर नजर डाली जाए तो ऐसा होना बेहद मुश्किल नजर आता है। खासकर लंबी दूरी तय करके परीक्षा के लिए बिहार पहुँचना बेहद असंभव सा काम नजर आता है। राजनितिक मंशा पूरी करने के लिए परीक्षा को आधार बनाया जा रहा है।

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केवल बिहार के लोग ही होंगे भर्ती ?

अगर इस परीक्षा के पैटर्न को देखा जाए तो आरोपों के अनुसार बिहार सरकार अघोषित तरीके से केवल बिहार और सीमावर्ती इलाकों के लोगों को छोड़कर अन्य लोगों को परीक्षा से वंचित करने का प्रयास कर रही है। चूंकि इससे पहले जब मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य में होने वाली भर्तियों में केवल मध्यप्रदेश के लोगों के शामिल होने की बात कही थी उसके बाद बिहार सरकार में शामिल नेताओं ने भी बयानबाजी की थी। नेताओं के अनुसार उन्हें भी अपने राज्य में बाहरी लोगों के परीक्षा देने पर से रोक लगानी पड़ेगी।आरोपों के अनुसार इसबार बिहार की इस परीक्षा में कुछ ऐसा ही करने का प्रयास किया जा रहा है।

अभ्यर्थी ने लगाई आयोग की क्लास:

इस मामले पर एलएलएम छात्र सौरभ मिश्रा निवासी हमीरपुर उत्तर प्रदेश ने लोक सेवा आयोग (बिहार) की हेल्पलाइन पर फोन करके जमकर भड़ास निकाली और सहायता के लिए बैठे हुए अटेंडेंट को भी सहायता की आवश्यकता महसूस हुई। अभ्यर्थी सौरभ मिश्रा ने बातचीत में अटेंडेंट से इस बाबत जानकारी मांगी की जो बिहार लोक सेवा आयोग भारत भर में लेट परीक्षाएं कराने के लिए जाना जाता है वह इस परीक्षा में इतनी जल्दी क्यों दिखा रहा है? सौरभ मिश्रा ने आयोग पर आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग इस वक्त सत्ता के राजनैतिक इशारे पर नाचने की मशीन बन चुका है और इस परीक्षा का मुख्य उद्देश्य दूर दराज के छात्रों को परीक्षा से वंचित करना है। जिस कोरोना काल मे गिनी चुनी ट्रेनें चल रही है उनमें हजार किलोमीटर या इससे ज्यादा की दूरी इतनी ज्यादा संख्या में होने के बावजूद कर पाना असंभव है। साथ ही मिश्रा ने यह कहा कि उनके आरोपों से अगर आयोग आहत होता है तो वह उसपर एफआईआर दर्ज करा सकता है अन्यथा वह इस आरोप को स्वीकार करे।

हालांकि सत्य यही है कि वर्तमान बिहार सरकार जल्द से जल्द एग्जाम कराकर बेरोजगारी के मुद्दे पर सिर्फ अपने नम्बर बढ़ाना चाहती है इसके अलावा सरकार का कोई अन्य मुद्दा नजर नहीं आता। हालाँकि सरकार की इस मंशा से कितने योग्य छात्रों का चयन रुकेगा यह चिंता का विषय है।

221 सिविल जज के पद है रिक्त:

221 सिविल जज के पदों के लिए 31वीं बिहार न्यायिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा के लिए करीब 26 हजार अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन किया है। (bihar civil judge exam 2020) इन पदों पर पात्र एवं योग्य अभ्यर्थियों का चयन तीन चरणों की परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। लेकिन सवाल अभी भी वही है कि कोरोना काल में दूर-दराज़ के अभ्यर्थी इस परीक्षा में कैसे शामिल होंगे? बिहार सरकार में बैठे लोगों को इस बारे राजनीती न करके निष्पक्ष तौर पर सोचना चाहिए।

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उदय बुलेटिन
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