बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन के साथ-साथ मुख्यमंत्री कार्यालय भी छात्रों के साथ कर रहा मजाक

बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन मजाक के मूड में है
बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन के साथ-साथ मुख्यमंत्री कार्यालय भी छात्रों के साथ कर रहा मजाक
बिहार पब्लिक सर्विस कमीशनGoogle Image

मामला बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन की न्यायिक परीक्षा से जुड़ा हुआ है, जहां पर छात्रों द्वारा BPSC में आवागमन की समस्या के मद्देनजर सही कदम उठाने की बात पर मामले को टरकाया जा रहा है वही मुख्यमंत्री कार्यालय जैसा जिम्मेदार ऑफिस भी परीक्षार्थियों के साथ अभद्रता करने से बाज नही आ रहा, मामला बेहद संगीन है मुख्यमंत्री कार्यालय से अगर अभ्यर्थियों के साथ ऐसे पेश हुआ जाता तो तो बिहार की आम जनता आने वाले पांच साल किस मुसीबत में गुजारेगी"

क्या है मामला:

हालांकि इस मामले में कई पेच फंसे हुए है, दरअसल जिस 6 दिसंबर को यह परीक्षा होने जा रही है उसी दिन बिहार में एक और बड़ा एग्जाम होने जा रहा है। यह एग्जाम बिहार पुलिस के एसआई पद के लिए है। इस परीक्षा में भी भारी संख्या में परीक्षार्थियों के आना जाना लगा रहेगा, यही आपको बताते चले कि सरकार ने कोरोना संक्रमण के चलते नई नई गाइडलाइंस जारी की है जिसमें यात्रा करने वाले वाहनों और ट्रेनों में कुल क्षमता के आधे लोग ही यात्रा कर सकेंगे, एक अनुमान के हिसाब से बिहार पुलिस के दरोगा पद के लिए करीब 2 लाख परीक्षार्थियों की भीड़ जमा होगी और साथ ही करीब 35000 के आसपास न्यायिक परीक्षा के परीक्षार्थियों के आना जाना होगा।

हालांकि इस वक्त जब पूरे भारत मे अधिकांश ट्रेनें या तो निरस्त है अथवा उनमें जाने की क्षमता पहले ही भर चुकी है ऐसे मौके पर बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन का परीक्षा का आयोजन बाहरी स्टेट के प्रतिभागियों के लिए बेहद तकलीफदेह साबित होगा

बीपीसीएस ने सीधे हाँथ खड़े कर दिए:

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से प्रतिभागी सौरभ मिश्रा ने बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन के ऑफिस में फोन करके बाहरी राज्यों से आने वाले प्रतिभागियों की समस्या के बारे में अवगत कराया। सौरभ ने व्यथा बताते हुए कहा कि "महोदय आप उच्च अधिकार क्षेत्र के अधिकारी है, आपकी प्लानिंग में इस तरह की समस्या को पहले से ही देखा समझा गया होगा, चूंकि बाहरी छात्रों को बिहार आने के लिए ट्रेन ही मुख्य साधन है जिसके बारे में सबको जानकारी है, क्योंकि कोरोना काल मे लगभग नही के बराबर ट्रेन चल रही है और बसों के द्वारा इतनी दूरी तय करना पहली नजर में बहुत बड़ा दुष्कर काम है और अगर प्रतिभागी मौके पर पहुँच भी गया तो क्या वह परीक्षा देने की स्थिति में भी होगा?"

हालांकि इस मामले पर बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन के अधिकारी द्वारा किसी भी समस्या का निदान कर पाने में असमर्थता जताई, हालांकि फोन पर उपलब्ध अधिकारी बार-बार आयोग की मेल आइडी पर मेल करने की बात कहते नजर आए, इस पर प्रतिभागी सौरभ द्वारा यह भी बताया गया कि उन्होंने इस बाबत कई मेल्स भेजी है, लेकिन न तो समस्या के बारे में कोई निराकरण मिला न ही कोई जवाब आया।

प्रतिभागी सौरभ और बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन के अधिकारी के साथ हुई बातचीत के अंश, जिसमे सौरभ ने अधिकारी से कई चुटीले सवाल किए लेकिन अधिकारी बार-बार सौरभ के सवालों के आगे चुप्पी साधते नजर आये।

बीपीएससी से चार कदम आगे निकला मुख्यमंत्री कार्यालय, जनाब मजाक करने के मूड में नजर आए:

मामले को उच्चाधिकारियों की नजर में पहुँचाने के लिए प्रतिभागी सौरभ मिश्रा ने सीधे तौर पर बिहार के मुख्यमंत्री कार्यालय पर फोन किया जहां पर समस्या निवारण कम बल्कि समस्या को उलझाने के साथ-साथ सीएम ऑफिस से नसीहत भी दी गयी, फ़िल्म गंगाजल के दरोगा मांगीराम की टोन के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात अधिकारी ने धमकाते हुए जवाब दिया कि "ज्यादा काबिल मत बनो"

दरअसल सौरभ मिश्रा ने परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए ट्रेन और बस की अनुपलब्धता के बारे बताया तो कार्यालय में तैनात महोदय ने फ्लाइट से आने का रास्ता सुझाया, इस पर सौरभ द्वारा यह कहा गया कि महोदय वो छात्र है उनके पास इतना पैसा नही है कि वह फ्लाइट से यात्रा कर सके तो मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ द्वारा यह कहा गया कि वह टिकिट के लिए पैसा मुहैया कराएंगे, खाता की जानकारी मांगने पर सौरभ द्वारा भारतीय स्टेट बैंक का खाता नंबर जाहिर किया गया, लेकिन जब पैसे डालने की बात आई तो कार्यलय में बैठे अधिकारी ने मजाक की मुद्रा में एग्जाम के बाद पैसा देने की बात कही, सौरभ के द्वारा यह संकेत किया गया कि जब परीक्षा ही 6 तारीख को है तो इसके बाद पैसे का क्या काम तो अधिकारी ने परिभागी के द्वारा मजाक करने की बात कही, बाद में यही अधिकारी इस समस्या के निवारण के लिए आयोग की शरण मे जाने की बात कहते हुए नजर आए और बाद में धमकी वाली भाषा" ज्यादा काबिल मत बनो" का ज्ञान देते हुए नजर आए।

दरअसल मामला सीधे तौर से छात्रों के हितों से जुड़ा हुआ है और मुख्यमंत्री कार्यालय में फोन करने पर अगर ऐसा मजाक देश के बेरोजगार युवा से होता है तो यह चिंता का विषय है खासकर बिहार के युवाओं का भविष्य बेहद खतरे में नजर आता है।

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उदय बुलेटिन
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