रेत माफियाओं के सामने मटौंध पुलिस पूरी तरह नतमस्तक नजर आती है।

खनन माफियाओं को सुरक्षा देने का जिम्मा थाना मटौंध ने उठा रखा है, पुलिस को पैसे दो और मजे से अबैध खनन करो
रेत माफियाओं के सामने मटौंध पुलिस पूरी तरह नतमस्तक नजर आती है।
Banda Mataundh thana Illegal Sand miningUdau Bulletin

जब सिस्टम में करप्शन घुला-मिला हो तब सच्चाई वाली ताकत सामने नहीं आ सकती, कुछ ऐसा ही हुआ है बाँदा जिले के थाना मटौन्ध पुलिस के साथ। दरअसल लंबे अरसे से पुलिस के ऊपर रिश्वत लेकर अवैध खनन और निकासी कराने के आरोप लगते आ रहे हैं। अब जब पुलिस ऐसी कोई कार्यवाही करने जाती है तो पुलिस को शर्मिंदा होना पड़ता है।

थाना मटौंध है सोने के अंडे देने वाली मुर्गी:

अगर थाना मटौन्ध को सोने के अंडे देने वाली मुर्गी कहा जाए तो कोई ज्यादा बड़ी बात नहीं होगी। दरअसल थाने की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह मध्यप्रदेश की सीमा से जुड़ा हुआ है और थाना क्षेत्र लगभग तीन तरफ से केन नदी की परिधि में आता है जिसकी वजह से रेत माफिया हमेशा से ही थाने में शरणागत रहते हैं। वहीँ दूसरी ओर पत्थर मंडी कबरई से बांदा की तरफ आने वाले ओवरलोड ट्रक बिना मटौन्ध से गुजरे हुए नहीं निकल पाते और सारा खेल यहीं शुरू होता है।

उजटेहटा गए और खाली हाँथ वापस आये:

दरअसल ग्राम उजरेहटा थाना मटौन्ध के क्षेत्र में ही आता है जहाँ पर अवैध खनन और अवैध भंडारण की सूचना मिलने पर थाना मटौन्ध के पुलिस अधिकारी एसआई सुरेंद्र प्रताप सिंह और सुनील सिंह फोर्स के साथ गांव पहुँच गए जहां पर पुलिस ने न सिर्फ डंप बरामद किया साथ ही मौके पर एक खाली ट्राली भी बरामद की। जानकारी करने पर पता चला कि यह डंप पूर्व प्रधान रामस्वरूप वर्मा के द्वारा चलाया जा रहा है। पुलिस ने वैधानिक कार्यवाही करते हुए रामस्वरूप को अपने कब्जे में ले लिया लेकिन मामले को लेकर पूर्व ग्राम प्रधान इस बात का विरोध करता रहा। इस पर पुलिस ने मौके पर ही मारपीट करना शुरू कर दिया जिससे पूर्व ग्राम प्रधान के परिजन और अन्य ग्रामीण उत्तेजित हो उठे और मटौन्ध पुलिस के विरोध में हो गए साथ ही परिवारीजनो ने बलपूर्वक पूर्व प्रधान को पुलिस वाहन से उतार लिया। इस मामले के दौरान ग्रामीण और पुलिस अपने अपने सुबूतों के लिए वीडियो रिकार्डिंग करते रहे।

मामला उगाही से जुड़ा हुआ है:

दरअसल थाना मटौंध के पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर ये आरोप लगते रहे है कि जो खनन माफिया पुलिस को चढ़ावा चढ़ाता है उसको अवैध रेत निकासी में कोई बाधा नहीं आती लेकिन अगर किसी ने इस मामले में लेटलतीफी की या आनाकानी की तो पुलिस का डंडा पड़ना तय है। सनद रहे इसी कार्यप्रणाली की वजह से पूरा थाना मटौन्ध सस्पेंड हो चुका है लेकिन उस वाकये के बाद भी थाने की अवैध गतिविधियां कम नही हुई बल्कि अब तो यह बड़े स्तर पर होना शुरू हो चुका है फिर चाहे वह मध्यप्रदेश के पहरा क्षेत्र से रेत निकासी का मामला हो या फिर किसी अवैध रेत भंडार से। हालाँकि लॉक डाउन के वक्त इस मामले में खासी कमी आयी थी लेकिन जैसे ही लॉक डाउन में छूट मिलनी शुरू हुई लोगों के मजे हो गए। रेत व्यवसाय से जुड़े हुए एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एक रात के लिए एक ट्रैक्टर की करीब 1200 से लेकर 1500 रुपये इंट्री फीस (अवैध निकासी रकम) थाने में पहुंचानी पड़ती है।

उजटेहटा मामले में पुलिस ने कार्यवाही की:

हालांकि मामला अब पुलिस की साख पर आंच देने लगा है इसीलिए पूर्व प्रधान समेत अन्य ग्रामीणों और परिवारीजनों के ऊपर सरकारी काम मे बाधा डालने के आरोप में मुकदमा कायम किया जा चुका है लेकिन अभी तक इस मामले में किसी भी शख्स की गिरफ्तारी नहीं हुई है। दरअसल मामला दबाव से जुड़ा हुआ है क्योंकि अगर पुलिस आरोपियों पर हाँथ डालती है तो अन्य अवैध रेत निकासी के सुबूत पुलिस के खिलाफ जा सकते है।

⚡️ उदय बुलेटिन को गूगल न्यूज़, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें। आपको यह न्यूज़ कैसी लगी कमेंट बॉक्स में अपनी राय दें।

No stories found.
उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com