Banda DM Colony
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बांदा डीएम कालोनी में ढह रहे है सरकारी आवास, पीडब्ल्यूडी विभाग आँख-कान मूंदकर बैठा है

सरकारी आवास सरकारी कर्मचारियों के लिए काल बन गए, मेन्टीनेन्स न होने होने के कारण आवासों की हालत खस्ता।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

आवास मानवों की सुरक्षा के लिए होता है और अगर यही आवास जानलेवा हो जाये तो बड़ा संकट खड़ा हो जाता है, कुछ ऐसा ही हो रहा है बांदा के डीएम कालोनी स्थित सरकारी आवासों में यहाँ आवासों में रहने वाले लोग घर के अंदर रहकर चुटहिल हो रहे है।

टूटकर गिर रही है छते:

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बांदा में सरकारी कर्मचारियों को सरकारी आवास के तौर पर शहर के बीचोबीच डीएम कालोनी में मकान आवंटित किए गए है जहाँ पर सरकारी कर्मचारी रहकर राज्य अथवा देश की सेवा कर रहे हैं लेकिन उनके लिए असहज करने वाली स्थिति तब उत्पन्न होती है जब उनका मकान ही उनके घर परिवार बच्चे बुजुर्गों के लिए समस्या बन जाये। इन आवासों में दीवारों और छतों का टूटना बेहद आम हो गया है जिससे लोग अपनी जान संकट में डालकर रह रहे है। बीते दिन एक राज्य कर्मचारी के घर मे छत टूटने की घटना सामने आई है जिसके चलते राज्यकर्मी के पिता छत से गिरे हुए मलबे की चपेट में आकर घायल हो गए। ये तो गनीमत रही कि छत के नीचे लेटे हुए लोगों ने फुर्ती दिखाई अन्यथा बड़ी घटना घट सकती थी।

मेंटिनेंस का जिम्मा पीडब्लूडी का:

अगर इन सरकारी आवासों की मरम्मत और देखरेख की जानकारी की जाये तो पता चलता है कि इस तरह के सरकारी आवासो के रखरखाव की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी विभाग के कंधे पर होती है । लेकिन पिछले कई सालों से न तो इन आवासों में कोई मेंटिनेंस कार्य कराया गया है और न ही रंगाई पुताई। हालांकि वह बात अलग है कि कागजी तौर पर हर साल है कि लाखो रुपये पानी की तरह बहाए जाते है। इस मामले में सरकारी आवासों में रहने वाले राज्य कर्मचारियों ने सैकड़ो बार जिम्मेदार विभाग पीडब्ल्यूडी को सूचित किया लेकिन हर बार मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। देखना है यह कि कान को मूंद कर बैठे निर्माण विभाग को कब सुध आती है। हालकि पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा उसी डीएम कालोनी के सामने से निकली हुई सड़क को तत्काल प्रभाव से तब भी बना दिया जाता है जब सड़क उखड़ी भी नही होती है ताकि बड़े अधिकारियों के नजर में सब ठीक-ठाक लगता रहे।

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उदय बुलेटिन
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