Water crisis in village lohara banda district
Water crisis in village lohara banda district|Uday Bulletin
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बाँदा: पानी बिल के नाम पर ग्रामीणों से आधार कार्ड लेकर चार-चार हजार रुपये काटे, जबकि पानी सप्लाई लंबे समय से बाधित

इसे नलकूप ऑपरेटर और विभागीय अभियंताओं की मिलीभगत कहे या कुछ और, थाना मटौन्ध क्षेत्र अन्तर्गत ग्राम लोहरा में एक अलग सा सरकारी गड़बड़झाला अपने चरम पर है।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

बाँदा जिले के ग्राम लोहरा में पेयजल आपूर्ति के लिए सरकारी पानी की टंकी है जिसे कुछ वक्त पहले ही पंचायत के द्वारा जलसंस्थान चित्रकूट धाम मंडल को हैंडओवर किया गया था। जिसमे गांव निवासी लालू रैकवार नल ऑपरेटर की भूमिका में तैनात है, लेकिन लंबे वक्त से गंदे पानी और सप्लाई बाधित करने को लेकर विरोध चल रहा है, ज्ञात हो कि पिछले करीब एक माह से पेयजलापूर्ति नलकूप के पम्प में खराबी आने के कारण आपूर्ति बंद कर दी गयी थी। जिसके बाद ग्रामीणों ने इस बाबत जल संस्थान में जाकर एक शिकायती पत्र लिखा लेकिन विभागीय लोगों द्वारा शिकायत पत्र को फाड़ने की कोशिश की गयी। बाद में जब ग्रामीण लोगों द्वारा मोबाइल कैमरे द्वारा वीडियोग्राफी करना शुरू किया तब कही कर्मचारियों ने लोगो से सामान्य तरीके से बात करना शुरू किया।

लोगों के द्वारा जब अधिकारियों से पेयजल आपूर्ति शुरू करने की बात कही गयी तो संस्थान में उपस्थित अधिकारियों ने धमकी के लहजे में में कहा कि हमे केवल राजस्व से मतलब है किसी भी प्रकार से तब तक पेयजल नहीं मिलेगा जब तक लोग भारी भरकम बिल नही चुकाते। इस पर ग्रामीणों ने बताया कि गांव के तीन चौथाई हिस्से में पेयजल आपूर्ति के पाइप छतिग्रस्त है और नालियों में बहता हुआ पानी लोगो के घरों में पहुचता है। इसलिए पहले आपूर्ति बहाल करके पाइपलाइन सही करके कनेक्शन दिया जाए तभी आगामी बिलों को चुकाया जाएगा।

गौरतलब हो कि गांव के ही ऑपरेटर लालू रैकवार के द्वारा बीते दिनों में किसी जल संस्थान के कर्मचारी को लेकर गांव का भृमण कराया गया था जिसके बाद लोगों से पानी की समस्या पूँछी गयी थी और लोगों के घरों में जाकर आधार कार्ड की छायाप्रति वसूली थी। साथ ही यह कहा था कि अब आप लोगों के यहाँ पानी उपलब्ध होना शुरू होगा।

जिनको पानी नही उनको दिए कनेक्शन और दिखाया बिल:

अब इसे अफसरशाही का रुतबा कहें या कुछ और लेकिन गांव के लगभग सभी घरों को पानी के मीटर बिना दस्तावेज और आवेदन के काट दिए गए है। जिसको लेकर ग्रामीणों में आक्रोश पनप रहा है, ग्रामीणों ने विभाग को चेतावनी दी है कि अगर विभाग के अधिकारियों के रवैये में बदलाव नहीं आता और इस दबंग नलकूप ऑपरेटर के द्वारा कब्जा कराए गए पेयजल आपूर्तिकर्ता स्थान को मुक्त नहीं कराया जाता तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा जिसके लिए सभी विभागीय और जिले के जिम्मेदार अधिकारी जिम्मेदार रहेंगे।

ऑपरेटर ने किया है नलकूप पर कब्जा:

अगर गांव में जाकर मौके पर मुआयना किया जाए तो नलकूप परिसर में ऑपरेटर के द्वारा जबरन कब्जा पाया जाता है। उक्त स्थान पर ऑपरेटर अपने पालतू जानवर बांधता है और तमाम मोटरसाइकिल समेत ट्रैक्टर इत्यादि खड़ा किया जाता है। जानवरों के बांधे जाने से नलकूप की वायरिंग समेत अन्य उपकरण पहले भी कई बार खराब हो चुके है लेकिन विभागीय मिली भगत की वजह से ऑपरेटर पर कभी भी कड़ी कार्यवाही नही की गई। बल्कि रहमो करम पर ऑपरेटर के बेटे को बाँदा में नियुक्ति दी गयी है।

लोगो ने विभाग को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जब केंद्र और प्रदेश सरकार इस कोरोना काल मे लोगों को भोजन पानी मुहैया करा रही है उस वक्त में ऑपरेटर और जेई द्वारा की गई मनमानी नहीं चलेगी। अगर इस रवैये में बदलाव नहीं आता तो संबंधित लोग विरोध प्रदर्शन का सामना करने के लिए तैयार रहें।

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उदय बुलेटिन
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