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भीमराव आंबेडकर
भीमराव आंबेडकर|Google
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पुण्य-तिथि विशेष :भीमराव आंबेडकर का गांव ‘महू’ ‘आम्बेडकर नगर’ बनने के बाद भी ‘महू’ है

2003 में दिग्विजय सिंह की अगुवाई वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने “दलितों के मसीहा” का सम्मान करते हुए जून 2003 में ‘महू’ का नाम बदलकर ‘आम्बेडकर नगर’ रखने का फैसला किया था।

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

भारत रत्न, "दलितों के मसीहा",संविधान निर्माता डॉ. बीआर आम्बेडकर की आज पुण्य तिथि है। मध्यप्रदेश के इंदौर जिले स्थित जन्मस्थली 'महू' में जन्में डॉ. बीआर आम्बेडकर को लोग प्यार से बाबासाहब अंबेडकर कहना पसंद करते हैं। आम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 में हुआ था और उन्होंने 6 दिसंबर 1956 को अंतिम सांस ली थी। आज का दिन ‘महापरिनिर्वाण दिवस' है जिसे बीआर आम्बेडकर की पुण्य तिथि (B. R. Ambedkar Death Anniversary) के रूप में मनाया जाता है।

डॉक्‍टर अंबेडकर ने सम्पूर्ण जीवन समाज कल्याण में लगा दिया। उन्होंने छुआ-छूत और जातिवाद के खात्‍मे के लिए खूब आंदोलन किए। उन्‍होंने अपना सम्पूर्ण स्वास गरीबों, दलितों और समाज के प‍िछड़े वर्गों के उत्‍थान के लिए न्‍योछावर कर दिया था। उन्हें देश का प्रथम विधि एवं न्याय मंत्री बनने का गौरव प्राप्त है। डॉक्‍टर अंबेडकर भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माता थे। आइये जानते हैं डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन से जुड़ी कुछ बातें..

भीम राव आंबेडकर (B. R. Ambedkar) से जुड़ी कुछ बातें

- आम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को ब्रिटिश भारत के मध्य भारत प्रांत (अब मध्य प्रदेश) में स्थित महू में हुआ था। वे रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की 14वीं व अंतिम संतान थे। उनका परिवार मूूल रूप से मराठी था और वो वर्तमान महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में आंबडवे गांव का निवासी था। वे हिंदू महार जाति से संबंध रखते थे, जो तब अछूत कही जाती थी और इस कारण उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव सहन करना पड़ता था।

- स्कूली शिक्षा के दौरान आम्बेडकर का मूल उपनाम 'सकपाल' के बजाय आंबडवेकर लिखवाया था, जो कि उनके 'आंबडवे गांव' से संबंधित था। क्योंकी कोकण प्रांत के लोग अपना उपनाम गांव के नाम से रखते थे, अतः 'आम्बेडकर' के 'आंबडवे गांव' से 'आंबडवेकर' उपनाम स्कूल में दर्ज करवाया गया। बाद में एक देवरुखे ब्राह्मण शिक्षक कृष्णा महादेव आंबेडकर जो उनसे विशेष स्नेह रखते थे, ने उनके नाम से ‘आंबडवेकर’ हटाकर अपना सरल ‘आंबेडकर’ उपनाम जोड़ दिया। तब से आज तक वे आम्बेडकर नाम से जाने जाते हैं।

- आम्बेडकर जब पाँचवी अंग्रेजी कक्षा पढ रहे थे, तब उनकी शादी रमाबाई से हुई। रमाबाई और भीमराव को पाँच बच्चे भी हुए - जिनमें चार पुत्र: यशवंत, रमेश, गंगाधर, राजरत्न और एक पुत्री: इन्दु थी। किंतु 'यशवंत' को छोड़कर सभी संतानों की बचपन में ही मृत्यु हो गई थीं।

- अब तक भीमराव आम्बेडकर आज तक की सबसे बडी़ अछूत राजनीतिक हस्ती बन चुके थे। उन्होंने मुख्यधारा के महत्वपूर्ण राजनीतिक दलों की जाति व्यवस्था के उन्मूलन के प्रति उनकी कथित उदासीनता की कटु आलोचना की। आम्बेडकर ने कांग्रेस और उसके नेता महात्मा गांधी की भी आलोचना की, उन्होंने उन पर अछूत समुदाय को एक करुणा की वस्तु के रूप मे प्रस्तुत करने का आरोप लगाया।

- उन्होंने मुस्लिम लीग की मुसलमानों के लिए एक अलग देश पाकिस्तान की मांग की आलोचना की। साथ ही यह तर्क भी दिया कि हिंदुओं को मुसलमानों के पाकिस्तान को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने प्रस्तावित किया कि मुस्लिम और गैर-मुस्लिम बहुमत वाले हिस्सों को अलग करने के लिए पंजाब और बंगाल की प्रांतीय सीमाओं को फिर से तैयार किया जाना चाहिए।

- आम्बेडकर ने धर्म परिवर्तन की घोषणा करने के बाद 21 वर्ष तक के समय के बीच उन्होंने ने विश्व के सभी प्रमुख धर्मों का गहन अध्ययन किया। उनके द्वारा इतना लंबा समय लेने का मुख्य कारण यह भी था कि वो चाहते थे कि जिस समय वो धर्म परिवर्तन करें उनके साथ ज्यादा से ज्यादा उनके अनुयायी धर्मान्तरण करें।