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Anti Corruption Bureau: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की बड़ी कामयाबी शिक्षा विभाग का लिपिक रंगें हाथ गिरफ्तार

रायपुर जिला छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के एक लिपिक पवन कुमार को पांच हजार रुपए की कथित रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया गया है।

AKANKSHA MISHRA

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रायपुर जिला छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की (Anti Corruption Bureau) टीम ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के एक लिपिक पवन कुमार को पांच हजार रुपए की कथित रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया गया है। पवन कुमार कुमार पर आरोप है कि वे बारह हज़ार रूपये रिश्वत लेकर विद्यार्थियों को स्नातक की परीक्षा में पास करा दिया करते हैं। पवन कुमार के साथ इस खेल में और भी कई लोग जुड़े है, लेकिन उनके नामों की जानकारी पुलिस को नहीं है। हालांकि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारी इस क्रम में जांच कर रहे है।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (Anti Corruption Bureau) के अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि ब्यूरो की टीम ने बेमेतरा जिले के बेरला में विकासखंड शिक्षाधिकारी कार्यालय में पदस्थ लिपिक पवन कुमार साहू (47) को पांच हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। अधिकारियों ने बताया कि युगल किशोर साहू बेरला क्षेत्र के लाटा गांव स्थित प्राथमिक शाला में प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ है। साहू ने अपने पुत्र के विवाह के लिये चार लाख रुपए के आंशिक अंतिम विकर्षण (पार्ट फाइनल) के लिए आवेदन किया था।

साहू ने इस कार्य के लिए पवन कुमार साहू से सम्पर्क किया तब लिपिक ने तीन प्रतिशत के हिसाब से कुल 12,000 रुपए रिश्वत की मांग की। युगल किशोर द्वारा निवेदन करने पर पवन कुमार दस हजार रुपए रिश्वत लेने को तैयार हो गया। इसकी पहली किश्त पांच हजार रुपए लेकर गुरुवार को बेरला स्थित अपने कार्यालय में बुलाया।

अधिकारियों ने बताया कि युगल किशोर साहू के साथ एसीबी की टीम भी बेरला पहुंच गई थी। आरोपी लिपिक ने जब प्रार्थी युगल किशोर साहू से अपने कक्ष में पांच हजार रुपए प्राप्त किया तब एसीबी की टीम ने वहां दबिश दी और आरोपी को पकड़ लिया।

भष्टाचार निरोधक ब्यूरो (Anti Corruption Bureau) के अधिकारियों कि माने तो आरोपी पवन कुमार साहू को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। उनपर उचित करवाई होगी। बता दें कि, विधार्थियों से पैसे लेना और उन्हें स्नातक में पास करना पवन कुमार का मुख्य पेशा बन चूका था। इससे पहले भी उसने कई विधार्थियों को फर्जी डिग्री उपलब्ध कराई है।