bundeli lok gayak deshraj pateriya Death
bundeli lok gayak deshraj pateriya Death|Google Image
देश

बुंदेलखंड के महान लोकगायक देशराज पटैरिया का निधन, लोगों ने अर्पित किए श्रद्धा सुमन

बुंदेलखंड का महान लोक गायक नहीं रहा।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

बुंदेलखंड में लोकगायकी को उच्चस्तर में लाने में पंडित श्री देशराज पटैरिया का बहुत बड़ा योगदान है। लोकगायकी को शास्त्रीय संगीत के साथ अनूठा मेल बनाने में देशराज का कोई सानी नहीं रह। लेकिन चाहे सरकारी उपेक्षा माने या कुछ और लोक गायक देशराज को वह पहचान नहीं मिली जिसके वह हकदार थे। देशराज पटैरिया द्वारा गाया गया प्रशिद्ध गीत जिसे बुंदेलखंड के हर घर मे भक्ति भाव से सुना जाता है:

निधन पर लोगों ने जताया दुःख:

नही रहा बुंदेली लोकगीत का ताज:

चाहे वह कजरी का मामला हो या आल्हा खंड का या फिर वैवाहिक गीतों और गारियो का देशराज पटैरिया ने बुंदेलखंड के हर मौके और अवसर के लिए गीत गाये और गीत भी ऐसे की अमर होते गए। बुंदेलखंड के महोबा से लेकर बाँदा और छतरपुर पन्ना से लेकर पूरे भूभाग में कोई भी बड़ा सांस्कृतिक कार्यक्रम हो और देशराज उपस्थित न हो ऐसा संभव ही नही था। लेकिन दिनांक 5 सितंबर 2020 के दिन इस महान लोकगायक का आखिरी दिन साबित हुआ और ह्र्दयगति रुक जाने से उनकी मृत्यु सुबह के तीन बजे हो गयी। ज्ञात हो कि लोकगायक देशराज पटैरिया पिछले कुछ दिनों से कोमा की स्थिति में थे,घटना को लेकर क्षेत्र भर में शोक की लहर व्याप्त है।

पंचायत चुनाव पर देसराज पटैरिया और लक्ष्मी त्रिपाठी द्वारा गाया गया व्यंग गीत:

जन्म और संगीत की तरफ रुझान:

1960 से लेकर 1990 तक शायद आकाशवाणी का कोई कार्यक्रम नहीं रहा होगा जिसमें देशराज पटेरिया के गाये गए गीत शामिल न हुए हो। संगीत का एक बड़ा अरसा देशराज के नाम रहा। देशराज का जन्म मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के अंतर्गत आने वाले कस्बे नौगांव के गांव टितानी में हुआ। अठारह वर्ष तक होते होते देशराज पटैरिया की रुचि गीत संगीत में होने लगी और क्षेत्र में होने वाले कीर्तनों और अखंड रामायण पाठों में जाने लगे और यही से शुरू हुआ देशराज का गायकी का सफर।

लंका जलने पर हंसी मजाक के तौर पर गाया गया लोकगीत:

आकाशवाणी की शुरुआत देशराज से:

देशराज पटेरिया की कला का ही चमत्कार कहिये की उनके गृह जिले में जब आकाशवाणी केंद्र छतरपुर की शुरुआत हुई तो यह दिन था 7 अगस्त 1971 लेकिन आकाशवाणी ने देशराज के गीत की रिकार्डिंग 31 जुलाई को ही कर ली ताकि आकाशवाणी की शुरुआत में ही देशराज के गीत सुनाए जा सके।

देशराज ने आकाशवाणी के केंद्र छतरपुर, जबलपुर समेत अन्य केंद्रों पर लंबे वक्त तक अपनी रिकार्डिंग जारी रखी आज भी जब कभी बुंदेली लोकगायकी का नाम लिया जाता है तो सबसे पहला नाम देशराज पटेरिया का आता है।

देशराज पटेरिया द्वारा गाया गया कालजयी गीत जिसे सैकड़ो बार अलग-अलग तरीके से रिकार्ड किया गया:

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