क्या महज किसान आंदोलन तक सीमित रहेंगे टिकैत? या इसके पीछे अन्य राजनीतिक दलों की बड़ी मंशा शामिल है?

किसान आंदोलन के बीच राकेश टिकैत ने राजनीतिक दलों का हाथ थाम कर दी बड़ी गलती?
क्या महज किसान आंदोलन तक सीमित रहेंगे टिकैत? या इसके पीछे अन्य राजनीतिक दलों की बड़ी मंशा शामिल है?
क्या महज किसान आंदोलन तक सीमित रहेंगे टिकैत?Google Image

सत्ता की भूख बेहद बड़ी होती है, ये कभी शांत नही होती, चाहे किसी देश की सत्ता हो यहाँ एक पक्ष जैसे ही शांत और ठहराव की स्थिति में आता है उसके आसपास का माहौल उसे यह दिखाकर चेताता है कि यहां सिर्फ वही चेतनायुक्त नही है। केंद्र में बैठी भाजपा सरकार और किसान आंदोलन के मध्य कुछ ऐसा ही मूक संवाद चल रहा है लेकिन इस मामले में एक अलग माहौल उत्पन्न हुआ है। जिसने बड़े स्तर पर जातीय राजनीति के बीज एक बार फिर से बो दिए है, निकट भविष्य में जाट आरक्षण जैसे मुद्दे अगर फिर उभर कर आते है तो कोई बड़ी बात नही मानी जायेगी।

क्या टिकैत बनेंगे समुदाय विशेष के फेस मास्क?

दिल्ली को किसी सल्तनत की तरह घेरे हुए किसान नेता एक बार ट्रैक्टर रैली से हुए उत्पात के बाद फिर से खुद को मजबूत करके मैदान में डट चुके है। यही कारण है कि अब इस आंदोलन में एक बार फिर से एक्टिवनेस महसूस की जा सकती है। चूँकि अगर दो चार दिन के घटनाक्रम पर नजर डाले तो यह आंदोलन एक बार फिर से पुनर्जीवित होने की स्थिति में है। क्योंकि 26 जनवरी के बाद इस आंदोलन को देश और देश की जनता ने एक झटके में नकार दिया है, लेकिन अब इस किसान आंदोलन में सरकार बनाम नही बल्कि भाजपा/एनडीए बनाम किसान आंदोलन की तर्ज़ पर तैयार किया जा रहा है, अगर उत्तर प्रदेश (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) की स्थिति पर गौर करें तो यहां पर जाट समुदाय की बेहद मजबूत स्थिति है, और यहां पर लंबे समय से चौधरी अजित सिंह क्षेत्र विशेष के नेता रहे है, यही कारण है कि इस क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए खुद राकेश टिकैत खुद अजित सिंह की पार्टी से चुनाव लड़ चुके है, राजनीतिक विशेषज्ञ यह बताने से भी चूक नही रहे है कि भविष्य में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक समीकरण को बैलेंस करने के लिए विपक्षी दल किसान आंदोलन के बहाने नया राजनीतिक मोहरा तैयार करने में जुटे है।

किसान आंदोलन कहीं जाट आंदोलन में परिणित न हो जाये:

कहा जाता है कि राजनीति में सब कुछ जायज है यही कारण है कि जब किसानों के नेता नरेश टिकैत ने किसानों को लेकर हुंकार भरी और राकेश टिकैत ने केंद्र और प्रदेश सरकार के कसते हुए शिकंजे को देखकर फांसी लगाने की धमकी दे डाली और खुले मंच पर आंसू नजर आए ,इस पर राकेश ने अपने वक्तव्य में महापंचायत के आयोजित करने की बात भी कही, चूंकि महापंचायत प्रायः एक समाज विशेष के द्वारा आयोजित की जाती रही है। लोग इसमें आशंका व्यक्त कर रहे है कि शायद यह महापंचायत भी जाट समुदाय के लोगों को साधने ओर एकजुट करने का प्रयास किया गया है, जिसके परिणाम स्वरूप इसके निशान आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव में नजर आ सकते है।

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उदय बुलेटिन
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