Jhansi Medical College
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झांसी मेडिकल कालेज में सब कुछ ठीक नहीं, मंत्री के दौरे पर खुली पोल

कोरोना की आवक के बाद से ही झांसी मेडिकल कालेज की खामियां सामने आने लगी थी, लेकिन अब जब कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है तब मेडिकल कालेज की परतें खुलना शुरू हो रही है।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

मृतकों की संख्या लगातार बढ़ी:

कोरोना की महामारी के दौरान उत्तर प्रदेश के झांसी में संक्रमितों की संख्या के बढ़ने के साथ ही इससे मरने वालों की संख्या में भी लगातार इजाफा होता जा रहा है। लोगों के अनुसार अस्पताल प्रसाशन के बीच खींचातानी चल रही है यही कारण है कि अब तक झांसी मेडिकल कालेज में 5 लोग कोरोना की वजह से जान गँवा चुके हैं। जबकि अगर संख्या की नजर से देखे तो बांदा मेडिकल कालेज में संख्या बढ़ने के बावजूद भी यहां अभी तक मृतकों की संख्या लगातार शून्य ही है।

मंत्री जी ने लताड़ दिया:

बीते दिन सूबे के कैबीनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने झांसी मेडिकल कॉलेज का दौरा किया मंत्री ने इमरजेंसी सेवाओं और डॉक्टरों की विजिट को लेकर सवाल खड़े किए। मंत्री महोदय ने प्रेस वार्ता में बताया कि मेडिकल कालेज में सरकार द्वारा प्रदत्त मशीनों का समुचित प्रयोग न करके कोरोना की जांच में देरी की जा रही है जिसकी वजह से मरीज़ों के भागने की घटनाएं भी सामने आ रही है और देरी की वजह से कोरोना संक्रमितों का इलाज भी सही तरीके से नहीं हो पा रहा। इस कारण से यह भी अंदेशा है कि हो सकता है इलाज में देरी होने की वजह से मौतें लगातार बढ़ रही है। सनद रहे कि वर्तमान में झांसी मेडिकल कालेज में 4 कोरोना संक्रमितों का इलाज चल रहा है, मरीजों से जुड़े हुए परिजनों ने मंत्री जी को अपनी समस्याओं से अवगत कराया।

पैरामेडिकल स्टाफ और सीएमएस के बीच नहीं है तालमेल:

इसी माह की शुरुआत में ही झांसी मेडिकल कालेज की आउटसोर्सिंग नर्सो और अस्पताल प्रसाशन के बीच टकराव की बाते सांमने आये थी नर्सो का आरोप था कि सीएमएस की मनमानी की वजह से उन्हें लगभग छः महीने से वेतन नहीं मिल रहा है। उनका घर चलने में भी असुविधा हो रही है, जबकि उन्हें लगातार धमकी देकर काम कराया जा रहा है। हालांकि बाद में विवाद बढ़ने पर किसी तरह मामले को शांत कराया गया।

डाक्टर निजी अस्पतालों में व्यस्त है:

दरअसल झांसी मेडिकल कालेज पिछले कई सालों से बुंदेलखंड क्षेत्र के लोगों के लिए चिकित्सा हब बना हुआ है यहां तैनात सरकारी डॉक्टरों की बल्ले-बल्ले उस वक्त हो जाती है जब उन्हें निजी नर्सिंग होम द्वारा तगड़ी पेशगी देकर नर्सिंग होम में विजिट कराया जाता है। आज का आलम यह है कि सरकारी डाक्टर अपनी कुल सेवा का करीब 90 प्रतिशत योगदान निजी चिकित्सालयों में देते है। कई बार तो यह होता है कि ये डॉक्टर मेडिकल लगाकर छुट्टी लेकर अपनी पत्नी के नाम से संचालित नर्सिंग होम या फिर अन्य निजी अस्पतालों में सेवा देते नजर आते हैं। ये नाटक यहीं समाप्त नहीं होता बल्कि मेडिकल कालेज में आये हुए गगरिओबॉन को मजबूर करके निजी नर्सिंग होम की तरफ भेजा जाता है जहां इलाज के नाम पर उनका दोहन होता है।

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उदय बुलेटिन
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