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मंदी का असर इंडिया पर भी, भारी मात्रा में पायलटों ने दिए त्यागपत्र

मंदी अब सिर्फ कहने को नहीं बल्कि इसका असर अब खुलेआम दिखने लगा है, सरकारे भले ही तथ्यों को नकारकर अपनी पीठ थपथपाए, लेकिन असलियत कुछ इतर है

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

एक तो एयर इंडिया पहले से ही वित्तीय रूप से खस्ताहाल में जी रही थी, उसी बीच एक और बड़ी खबर आई है, जिसमें लगभग 120 से ज्यादा पायलटों के इस्तीफा देने की बात कही जा रही है गौर करने वाली बात यह है कि ये सारे पायलट एयरबस A-320 के परिचालन से जुड़े हुए है, पायलटों के अनुसार वो वेतन की विसंगतियों और पदोन्नति पर आड़े आ रहे नियमों से दुखी थे, पायलटों ने यह जानकारी भी दी, कि इस संबंध में हमने उच्चाधिकारियों को कई बार अपनी मांग से अवगत कराया लेकिन न तो इस बारे में उच्चाधिकारियों द्वारा कोई कदम उठाया गया है, न ही इस संबंध में कोई आश्वासन दिया गया है।

हिस्सेदारी बेचने की जुगत में सरकार :

इस खबर की शुरुआत एयर इंडिया में  100 प्रतिशत की हिस्सेदारी बेचने से हुई थी, सूचना के अनुसार तो यह भी कहा जा रहा है कि मोदी सरकार 1.0 कार्यकाल में 76 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का मसौदा भी तैयार कर लिया गया था, लेकिन कर्ज और विमानन कंपनी की दशा देखकर कोई भी खरीददार तैयार नही हुआ था, हालांकि अब सरकार इस पर फिर से तैयारी कर रही है, देखते हैं आगे का हाल क्या होता है।

कंपनी पर है लंबा कर्ज :

विमान चलाने के लिए सबसे बड़ी जरूरत होती है वह है ईंधन , और एयर इंडिया तेल का उपयोग तो भरपूर कर रही है लेकिन आर्थिक स्थिति अनुसार वह तेल का मूल्य चुकाने में असमर्थ है, इसी वजह से एयर इंडिया पर तेल कंपनियों का 4500 करोड़ रुपये बकाया है, पॉलिसी के मुताबिक एयर इंडिया को तेल कंपनियों की तरफ से 90 दिनों की क्रेडिट मिलती है जिसमे एयर इंडिया को तेल खरीदने के बाद 90 दिनों के अंदर ईंधन का मूल्य चुकाना होता है, ऐसे में सरकार या तो यह कर्जा चुकाए या फिर कंपनी की हिस्सेदारी बेचकर कर्जा चुकाए।