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Banda ADM Santosh Bahadur
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देश

भाजयुमो के जिलामंत्री को एडीएम ने सिखाया ज्ञान, नेतागिरी करने की उम्र नहीं, बहुत देखे है तुम्हारे जैसे।

उत्तर प्रदेश में अफसरशाही किस कदर हावी है इसका नमूना हर जिले में नजर आ रहा है, सरकार का अंकुश इन अधिकारियों पर न के बराबर है और तो और अफसर नेताओं को ही पलीता लगाने में लगे है।  

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

मामला उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले का है, जहां एक दिव्यांग फरियादी लंबे समय से अपनी मांग को लेकर अनशन पर बैठा हुआ था, हालाँकि इस पर प्रशासन का अभी तक कोई ध्यान नही था, फरियादी की स्थिति और समस्या देखकर भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलामंत्री देवेश सिंह मोनू फरियादी की समस्या को लेकर अतिरिक्त जिलाधिकारी महोदय के पास पहुंचे तो एडीएम साहब उन्ही को नसीहत देते नजर आए।

ये है बाँदा ADM संतोष बहादुर जी , देखिये जिला प्रशासन की गुंडागर्दी , एक दिव्यांग पीड़ित जो प्रशासन के नाक के नीचे विगत...

Posted by देवेश कुमार मोनू on Friday, October 18, 2019

एडीएम साहब संतोष बहादुर के अनुसार जिलामंत्री की उम्र नेतागीरी करने की नहीं पढने की है और अधिकारी महोदय के अनुसार उन्होंने तमाम ऐसे नेताओं को देखा है, बातों ही बातों में एडीएम साहब अभद्रता पर उतर आए और सत्ता पर आसीन पार्टी के नेता से बदतमीजी शुरू कर दी, और क्या करें और क्या न करें की तर्ज पर नसीहतों का अंबार लगा दिया, हालांकि देवेश कुमार मोनू किसी निजी समस्या को लेकर साहब के पास नहीं गए थे, ये समस्या एक दिव्यांग की थी जिसे उन्होंने सक्षम अधिकारी के पास ले जाना ठीक समझा लेकिन किसी युवा द्वारा अधिकारी को ज्ञापन देना रास नही आया और साहब भड़क उठे।

हालांकि अब यह मामला बेहद राजनैतिक हो चला है युवा नेताओं ने इसे सरकार के निर्देशों को पलीता लगाने वाला बताया है और यह जानकारी दी है कि हम इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री तक के पास जाएंगे और जिला स्तर पर बड़ा प्रदर्शन करेंगे।  

पूरे प्रदेश में है यह शिकायत:

जब से भाजपा सरकार आयी है पूरे प्रदेश में पदाधिकारियों की यह शिकायत रही है कि प्रदेश स्तर से अधिकारियों को यह आदेश से दिया गया है कि पदाधिकारियों की न तो बात सुनी जाए और उनके समाज मे बेइज्जत किया जाए, पदाधिकारी हमेशा पूर्ववर्ती सरकारों का संदर्भ देते नजर आते है , कि पहले की सरकारों में पार्टी के पदाधिकारियों को तवज्जो दी जाती रही है लेकिन भाजपा सरकार में कार्यकर्ताओं की न सिर्फ उपेक्षा की जाती है बल्कि उन्हें बेइज्जत किया जाता है।