आठ साल के अबोध बच्चे की अगवा करके की हत्या, सरकारी मुआवजा बना काल

अपहरणकर्ताओं को पैसे नहीं मिले तो 8 साल के अबोध बच्चे को मार डाला, पुलिस पर विश्वास करके मृतक का पिता पछता रहा है
आठ साल के अबोध बच्चे की अगवा करके की हत्या, सरकारी मुआवजा बना काल
बाँदा अपहरण केसउदय बुलेटिन

आठ साल का बच्चा भला क्या दोस्ती और दुश्मनी जाने, लेकिन इतनी कम उम्र में भी हत्यारों ने उसे इतनी यातनाएं दी और अंत मे गोबर के उपलों से दबाकर मार डाला, इस मामले में स्थानीय पुलिस पर भी हीलाहवाली करने, मामले को उलझाने के आरोप लग रहे हैं, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाए कि अगर पुलिस अवैध रेत खनन और वसूली के शिकंजे से बाहर निकलती तो शायद बच्चे की जान बच सकती थी।

अपहरण करके की हत्या:

मामला उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले अन्तर्गत आने वाली तहसील अतर्रा के गांव चौसड से जुड़ा हुआ है जहां के निवासी शिक्षक राजेश कुमार कुशवाहा के आठ वर्षीय बेटे प्रिंस को अज्ञात लोगों द्वारा अगवा कर लिया गया था, अपहरणकर्ताओं द्वारा लगातार फिरौती की मांग की जा रही थी और पुलिस में शिकायत न करने की बात को कहकर लगातार धमकाया जा रहा था लेकिन पिता राजेश कुमार द्वारा पुलिस प्रशासन पर भरोसा करके इस मामले की सूचना पुलिस को दी गयी लेकिन अंत मे उन्हें अपने बच्चे का शव बेहद बुरी स्थिति में प्राप्त हुआ, स्थानीय पुलिस लगातार पीड़ित के ऊपर ही मामले को छोड़कर अपने कमाई के रास्तों पर लगी रही।

घर के बाहर से अगवा हुआ प्रिंस:

मृतक प्रिंस की माँ पुष्पा देवी ने जानकारी दी कि मेरा बेटा घर से बाहर पेट दर्द की दवा लेने के लिए आंगनबाड़ी केंद्र की ओर गया था, उसे वहां से अपने चाचा राजेन्द्र के यहाँ जाना था और वह वहां गया भी और प्रिंस वहीँ से संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गया, चूंकि राजेश कुशवाहा एक शिक्षक हैं वह स्कूल से वापस होते हुए घर आये और बच्चे के बारे में जानकारी ली तो पत्नी पुष्पा ने बताया कि प्रिंस चाचा के यहाँ गया हुआ है, इस पर राजेश द्वारा अपने छोटे भाई राजेन्द्र के घर जाकर बच्चे का पता लगाया गया, राजेन्द्र की पत्नी ने बताया कि प्रिंस सुबह के साढ़े 10 बजे तक घर के बाहर खेल रहा था उसके बाद से हमें लगा कि वह घर निकल गया होगा।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राजेश कुशवाहा ने स्थानीय पुलिस को जानकारी देनी चाही लेकिन उसी दौरान उनके पास अपहरणकर्ताओं का फोन आया, जिसमें सुबह पैसे कब और कहाँ देने है इस बारे में जानकारी देने की बात कही और पुलिस में जाकर शिकायत दर्ज कराने को मना किया।

परिजनों ने अपहरणकर्ताओं की बात को न मानते हुए पुलिस को सूचना दी, पुलिस ने इस बारे में खोजबीन करने का भरोसा तो दिया लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की इस दौरान अपहरणकर्ताओं द्वारा राजेश को अंजाम भुगतने की धमकी भी दी गयी।

बीते मंगलवार गांव के अन्य लोगों ने बच्चे की खोजबीन करनी शुरू की, गांव के तालाब के पास प्रिंस की चप्पल मिलने की वजह से क्षेत्र को चिन्हित करके गहन खोजबीन की गई, पास के पुआल के ढेर में पुआल और गोबर के उपले हटाने पर प्रिंस मृत अवस्था मे पाया गया, मृतक प्रिंस के गुप्तांगों समेत अन्य जगहों पर चोट के निशान पाए गए हैं, साथ ही हत्यारों ने बच्चे की आंखों और होठों पर फेवीक्विक भी डाला था।

ज्ञात को राजेश कुशवाहा करीब पांच बीघे कृषि भूमि का किसान था जिसमें कुछ जमीन बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे में अधिकृत की गई थी जिसके फलस्वरूप उसे करीब 8 लाख रुपये का मुआवजा प्राप्त हुआ था, इसी मुआवजे को हासिल करने के चक्कर मे प्रिंस का अपहरण करके हत्या को अंजाम दिया गया।

शव मिलने के बाद पुलिस ने दिखाई तत्परता:

मामले पर इस बात से ही अंदाज लगाया जा सकता है जो पुलिस अभी तक सर्विलांस पर नम्बर लगाने और संदिग्धों की पहचान करने का दावा कर रही थी उसने शव मिलने के बाद तुरंत एक दंपति को शक की बिनाह पर कब्जे में लिया है, हादसे की जानकारी के बाद मृतक के घर पर पुलिस अधिकारियों का आना जाना लगा है वहीं स्थानीय नेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेकते हुए भी नजर आए।

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उदय बुलेटिन
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