होटल इंडस्ट्री से जुड़े लोग भुखमरी की कगार पर
होटल इंडस्ट्री से जुड़े लोग भुखमरी की कगार पर |उदय बुलेटिन
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कोरोना महामारी के बीच 3 करोड़ लोग भूखे मरने की कगार पर, इस तरफ भी ध्यान दे दो सरकार

हमेशा से लोगों की सेवा करने वाले व्यवसाय आज अपनी आख़िरी सांसे गिन रहे हैं, होटल इंडस्ट्री से जुड़े लोग सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन सरकार है कि टस से मस नहीं हो रही।

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हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में अहम स्थान रखने और सरकार को राजस्व के तौर पर धन उपलब्ध कराने के बावजूद इस क्षेत्र के उद्योगों को जानबूझकर नष्ट किया जा रहा है। सरकार द्वारा महत्वपूर्ण उद्योग "बार" को न खोलने की बजह इससे जुड़े कर्मचारी और व्यवसायी सड़क पर आकर शांतिपूर्ण रूप से प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।

सरकार ने कोरोना महामारी के बीच अर्थव्यवस्था सुधारने और लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से देश मे लगभग सभी जगह फैक्ट्री, उद्योग, कंट्रक्शन कार्य, ढाबे, देशी और अंग्रेजी शराब की दुकानें, मॉडल वाइन शॉप, बियर शाप इत्यादि को खोल दिए हैं लेकिन बिल्कुल इसी तरह कार्य करने वाले "बार" व्यवसाय को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया है।

इस व्यवस्या से जुड़े हुए लोगों का कहना है कि हमारे पास न सिर्फ शिक्षित कर्मचारियों का समूह है बल्कि वो कोरोना महामारी के प्रति जागरूक है और इससे बचाव के सभी उपक्रमों के बारे में जानते है। सभी कर्मचारी न सिर्फ अपने कार्य मे दक्ष है बल्कि कोरोना महामारी के चलते बचाव के साथ कार्य करने में भी दक्ष हैं। वो खुद को इस महामारी से बचाते हुए अपनी सेवाएं दे सकते है लेकिन इसके बाद भी सरकार द्वारा लगातार अनदेखी की जा रही है।

सरकार ने बार को बंद करने का फरमान तो सुना दिया है लेकिन सरकार ने इस व्यवसाय को करने वालों को यह नहीं बताया कि जिस भूखंड और भवनों में किराए से व्यवसाय चलाया जा रहा है उसका किराया इत्यादि कैसे भरा जाएगा? या तो सरकार इस किराये को माफ कराने के संबंध में कोई पहल करे या फिर कोई नीति जाहिर करे।

बार संचालकों द्वारा 2020-21 में आबकारी लाइसेंस फीस फरवरी 2020 में जमा की गई थी लेकिन महामारी के क्रम में उसके बाद से कार्य बाधित ही रहा। इसलिए व्यवसाय की दशा और दिशा को देखते हुए पांच माह मार्च, अप्रैल, मई, जून और जुलाई के हिसाब से 84000*5 तदनुसार 4,20,000 रुपयों को आजीविका के लिए संचालकों को वापस किया जाए।

सरकार द्वारा हॉस्पिटलटी क्षेत्र में कार्य करने वाली करीब तीन करोड़ की आबादी के मद्देनजर कोई राहत कार्य को अंजाम नही दिया गया, जबकि यह क्षेत्र सरकार की आय भी एक मुख्य कारण है। यह न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि सरकार की उदासीनता को भी दर्शाता है।

सरकार द्वारा बिजली कंपनियों को भी इस बाबत आदेशित करना चाहिए कि जब बार के सभी क्रियाकलाप सामूहिकता से बंद है तो बिजली का खर्च कैसा ? लेकिन इसके बाद भी बिजली विभाग लगातार बिल भेज रहा है। जिनका भर पाना हमारे लिए असंभव सा है क्योंकि हमारा सारा कार्य व्यापार पर निर्भर है। अगर व्यापार नहीं तो लाभ नहीं और लाभ नहीं तो बिजली का बिल भरना कैसे सम्भव है। उस पर भी बिजली विभाग बिना खर्च के लगातार भारी भरकम बिल पहुँचा रहा है जो चिंता का विषय है।

हालांकि हम यह कहना चाहते है कि सरकार ने कोविड 19 जैसी खतरनाक महामारी के समय अपनी दूरदर्शिता का सफल उदाहरण प्रस्तुत किया है और यह सराहनीय भी है लेकिन देश भर में कार्यरत तीन करोड़ कर्मियों की आजीविका को दृष्टिगत रखते हुए सरकार को अपनी शर्तों के आधार पर होटल, रेस्टोरेंट बार इत्यादि को खोलने की अनुमति प्रदान करनी चाहिए ताकि लोग भुखमरी से बच सकें।

पिछले 15 वर्षों से ताज होटल, रेनैस्संस होटल, हयात होटल, ओबेरॉय होटल जैसे संस्थानों में काम कर चुके होटल प्रबंधक पंकज सिंह चौहान आज होटल इंडस्ट्री बंद होने के कारण बेरोजगार हो गए, उनका कहना हैं कि सरकार को हमारे जैसे करोड़ो बेरोजगार लोगों की तरफ ध्यान देना चाहिए जिससे की हम अपना जीवन यापन कर सकें।

पंकज ने उदय बुलेटिन से बात करते हुए कहा कि अगर सरकार होटल्स, रेस्टोरेंट्स, बार इत्यादि को खोलने की अनुमति दे देती हैं तो हम भुखमरी से बच जायेंगे। हालकि ठाकुर पंकज ने यह भी कहा कि हम कोरोना की लड़ाई में सरकार के साथ खड़े है और सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देशों को लगातार पालन करने के लिए तत्पर है लेकिन अगर व्यवसाय जीवित रहा ! क्योंकि अगर व्यवसाय रहा तो हम लोग रहेंगे और अगर हम नही तो शायद कुछ भी संभव नहीं होगा।

पंकज ने बताया कि जैसे ही भारत मे अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई उन्हें लगा कि सरकार इस उद्योग और भी नजर डालेगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं, सरकार ने अन्य क्रिया कलापों को शर्तानुसार छूट दी लेकिन उनके जैसे कारोबारियों के लिए अभी तक लगातार तालाबंदी जारी रही जिसके फलस्वरूप इस कारोबार जुड़े लोग और उनके परिवार भुखमरी के कगार पर हैं।

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