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Satna Madhya Pradesh Case
Satna Madhya Pradesh Case|Uday Bulletin
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मध्यप्रदेश पुलिस का दामन फिर हुआ मैला, संदिग्ध लाश का आननफानन में कराया अंतिम संस्कार। 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

अभी सतना मध्यप्रदेश के अपहृत बालकों के केस को हुए ज्यादा दिन नहीं बीते कि सतना पुलिस ने पूरे क्षेत्र में फिर अपनी किरकिरी करा ली, गौरतलब है पिछले कुछ दिन पहले चित्रकूट की पवित्र नदी मंदाकिनी में एक अज्ञात शव तैरते हुए मिला था, जिसकी बरामदगी के दो घंटे के अंदर ही पुलिस ने पोस्टमार्टम करके अंतिम संस्कार करा दिया , और शव की पहचान इत्यादि भी नही कराई गई,बाद में सोशल मीडिया में प्रसारित तश्वीरों के आधार पर मृतक के परिजनों ने शव की शिनाख्त की।

नदी में पड़ा शव
नदी में पड़ा शव
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मामला सतना जिले के नयागांव थाना क्षेत्र का है जहां चित्रकूट (मध्यप्रदेश वाले हिस्से ) में आने वाली मंदाकिनी नदी में एक युवक का शव उतराता हुआ नजर आया था जिसकी शिकायत लोगों ने स्थानीय पुलिस से की, पुलिस ने मौके पर आकर शव को बरामद करके दो घंटे के अंदर मामले को आनन-फानन में निबटा दिया।

लेकिन जब तश्वीरें सोशल मीडिया पर फैली तो अज्ञात शव पर शहडोल के निवासियों ने मौके पर आकर इस मामले में हस्तक्षेप किया ,

मौके पर आए शहडोल के व्यक्तियों ने मृतक व्यक्ति का नाम सिद्धार्थ केशरवानी , निवासी बेवहारी जिला शहडोल बताया, परिजनों ने बताया कि मृतक चित्रकूट के ग्रामोदय विश्वविद्यालय में अध्ययनरत था और चित्रकूट के रामधाम में कांग्रेस नेत्री रविमाला सिंह में मकान में किराए से रह रहा था, और 6 सितंबर की रात को छात्र संदिग्ध तरीके से मकान से गायब हो गया था, सहपाठी और विश्वविद्यालय के छात्र सिद्धार्थ को लगातार तलास करते रहे थे, और इस संबंध में मकान मालिक से कई बार पूंछताछ भी की ,लेकिन संतुष्टि प्राप्त नही हुई, इधर अचानक नदी में शव मिलने से इलाके के लोगों ने पुलिस को सूचना दी, पुलिस ने आनन फानन में शव को ठिकाने लगाया गया।

पुलिस की स्थिति बेहद संदिग्ध:

वैसे तो सतना पुलिस अपने कामकाज के लिए जानी जाती है ,तेल व्यापारी के बच्चे  के अपहरण मामले में पुलिस ने अपना सबसे गंदा प्रदर्शन किया था, अब यह कार्यशैली बेहद खराब छवि वाली है, कुछ लोग इसे अन्य प्रसंगों से जोड़ रहे है जिसमे पुलिस की मिलीभगत भी करार दे रहे है

विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र करेंगे बड़ा आंदोलन:

मृतक विद्यार्थी के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन और छात्र कभी भी बड़ा आंदोलन कर सकते है, और स्थितियां स्थानीय प्रशासन को मुश्किल में डाल सकती है, इस मामले पर स्थानीय कुछ नेताओ की मिलीभगत के संकेत मिल रहे है