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Accidents due to stray animal<a><br><br></a>
Accidents due to stray animal

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देश

अन्ना जानवर बने सड़क सुरक्षा के लिए खतरा, आम नागरिक हो रहे हैं घायल !

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

सरकार ने ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने और पालन न करने की स्थिति में भारी जुर्माने का प्रावधान किया है, जिस कारण से अगर आप ट्रैफिक नियम के अंतर्गत आने वाले हेलमेट पहनने का उल्लंघन करते है तो आपकी जेब एक झटके में ही खाली हो सकती है, लेकिन असल सवाल यह है कि सड़को पर घूमते हजारो की संख्या में आवारा पशुओं से टकराकर महंगे से मंहगा हेलमेट आपकी सुरक्षा की गारंटी नही दे सकता, और इस मामले में  वाहन चालान काटने वाले पुलिस विभाग के पास कोई जवाब नही है

1 सितंबर से नए ट्रैफिक कानून लागू किये गये हैं जिसमे नियमों को न मानने पर भारी आर्थिक दंड का प्रावधान रखा गया है, हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे मामलों में सड़क किनारे खड़े पुलिस कर्मी आपका चालान काटने में कोई देरी नही लगाते है, लेकिन अब सवाल चालक और यात्री सुरक्षा का खड़ा होता है कि आखिर हेलमेट और सीट बेल्ट लगाकर किस सड़क पर चला जाये ?

वही सड़क जिस पर  हजारो की संख्या में गौवंश रास्ता जाम किये हुए खड़ा और लेटा है, जो शाम के धुंधलके में दिखाई नही देता ,जो अनायास ही रोज दो चार मोटरसाइकिल सवार चालको को काल के गाल में भेजने के लिए तैयार है, जिले का सरकारी अस्पताल और मेडिकल कालेज इस तरह की तमाम दुर्घटनाओं से भरा पड़ा है।

हालात यह है कि जिले के एसपी को सड़कों पर पोस्टर और बैनर लगाने पड़ रहे है" आगे सड़क पर अन्ना जानवर खड़े हो सकते है, कृपया धीरे चले"

अब जब सड़कें वाहनो के चलने के लिए ही सुरक्षित नही तो फिर सड़को के नियमों का क्या फायदा,

बाँदा से ग्रामीण क्षेत्रो में टेम्पो चलाने वाले तमाम ऑटो चालको ने बताया कि " शाम को 5 बजे के बाद वाहन चलाना बेहद खतरनाक है, या तो आप अचानक सांमने आये जानवर को बचा लीजिये या सवारियों समेत वाहन को खाई में फेंक दीजिये, दोनो ही स्थितियां हमारे लिए ही खतरनाक है,

    जहाँ सरकारों ने इस तरह के मामलात के लिए ग्राम स्तर पर गौशालाओं को खोलने का निर्णय दिया था,अब यह आदेश न सिर्फ सफेद हाथी साबित हुआ है ,बल्कि प्रसाशनिक बंदरबांट का भी शिकार हुआ है, ग्राम स्तर पर बनी हुई गौशालाओं में आपको एक जानवर नही मिलेगा

जानवर या तो सड़क पर या खेत पर:

बुंदेलखंड में किसान प्रकृति के निशाने पर है कभी ओला बृष्टि और कभी बाढ़ अथवा सूखा, लेकिन पिछले कुछ सालों से एक समस्या सबसे बड़ी बनकर उभरी है अन्ना पशु, अगर सैकड़ो की तादाद में जानवर किसी खेत मे घुस जाए तो 20 बीघे के खेत को घण्टो में सफाचट किया जा सकता है, यही कारण है कि किसान अब मरने की कगार पर है,

यही स्थिति सड़को पर बनी हुई है, चाहे वह राष्ट्रीय राजमार्ग हो या ग्रामीण सड़के, सब जगह अन्ना पशुओं का कब्जा है, जिनकी वजह से रोज-रोज सैकड़ो की तादाद में लोग या तो गंभीर रूप से चुटहिल हो रहे है या जान गँवा रहे है,

खासकर बाँदा जिले में इनका प्रकोप बेहद भारी है, जो कि बेहद चिंताजनक है, सरकार को नए सड़क नियम लागू करने से पहले सड़क सुरक्षा को चाक चौबंद करना चाहिए।