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पत्रकारों ने पूछा मंदी’ पर सवाल तो वित्त मंत्री ने कहा- परामर्श चल रहा है

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अप्रैल-जून को समाप्त हुई तिमाही में जीपीडी के छह सालों में सबसे नीचे गिरकर 5 प्रतिशत पर आ जाने से मंदी की आशंका पैदा हो गई है। हालांकि हाल ही में कई तरह के उपायों की घोषणा करने वाली वित्त मंत्री ने रविवार को एक सीधे प्रश्न कि क्या अर्थव्यवस्था वर्तमान में 'सुस्ती' के दौर से गुजर रही है, का उत्तर टाल गईं।

यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में जब एक संवाददाता ने यह पूछा कि क्या देश सुस्ती (स्लोडाउन) के दौर से गुजर रहा है तो सीतारमण ने कहा, "सरकार बहुत सारे सेक्टर के साथ परामर्श कर रही है। कुछ क्षेत्रों में इंवेन्टरी जमा होने के कारण ..विभिन्न सेक्टरों में अलग-अलग कारणों के बारे में सुना जा रहा है। कुछ समय बीतने के बाद ही देख सकते हैं कि हम कितनी अच्छी तरह से मुकाबला कर सकते हैं।" घोषणाओं की पहली किस्त 23 अगस्त को जारी की गई है।

वित्त मंत्री ने कहा कि शुक्रवार को घोषणाओं का एक और सेट उन्होंने जारी किया है। उन्होंने कहा, "मैंने यह भी कहा है कि जब परामर्श की प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी तो वह वापस आएंगी। हमने इस पर काम किया है और हम इसका मुकाबला कर सकते हैं.. । इसलिए मैं उन सेक्टरों को जवाब देने के लिए वापस आऊंगी जो हमारे पास आए हैं और हमसे कुछ रियायत की मांग की है।"

मौजूदा आर्थिक हालात में सुधार की उम्मीद के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि जुलाई के बजट में की गई घोषणा के परिणाम नजर आने लगे हैं।

दस बैंकों के चार बैंकों में विलय की घोषणा पर उन्होंने दोहराया कि इससे बैंकों के किसी भी कर्मचारी की छंटनी नहीं होगी।

विनिर्माण क्षेत्र में सख्त मंदी के कारण जून में सप्ताह हुई तिमाही में जीपीडी छह साल के सबसे नीचे 5 प्रतिशत पर चले जाने के कारण गंभीर आर्थिक मंदी की चर्चा होने लगी है। वृद्धि दर में लगातार चौथी गिरावट है। वर्ष 2016-19 की पहली तिमाही से वृद्धि दर 6 प्रतिशत से गिरकर इस तिमाही में 3 प्रतिशत पर आ गई है। एक साल के भीतर जीपीडी की दर में तीन प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

विभिन्न सेक्टरों में कम मांग और विनिर्माण क्षेत्र की कमजोर गतिविधियों के कारण सरकार की आलोचना हो रही है।

इससे पहले आर्थिक मंदी के लिए नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरकार की निंद करते हुए कहा था कि भारत में अधिक तेज दर से वृद्धि करने की क्षमता है लेकिन मोदी सरकार की हर मोर्चे पर अव्यवस्था का नतीजा यह मंदी है।

इस मंदी को 'मानव निर्मित संकट' करार देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने एक बयान में मुख्य तौर पर मौजूदा आर्थिक दशा के लिए मोदी सरकार की नोटबंदी और आनन-फानन में जीएसटी के लागू करने को दोषी ठहराया।

--आईएएनएस