उदय बुलेटिन
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G-7 Summit
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जी-7 सम्मेलन से पहले पीएम मोदी ने कश्मीर से लेकर तीन तलाक पर की चर्चा, आखिर क्या है कारण ?

24 अगस्त से 26 अगस्त तक चलेगा G-7 सम्मेलन 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों तीन देशों की यात्रा पर हैं। यात्रा के शुरुआती चरण में आज प्रधानमंत्री मोदी सबसे पहले फ्रांस की राजधानी पेरिस पहुंचे, जहां उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात की और कई मुद्दों पर साथ मिल कर काम करने का भरोषा जताया। इस मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस में रहने वाले भारतीय समुदाय को संबोधित किया। इस संबोधन के बाद पीएम यूएई (United Arab Emirates) के लिए रवाना हो गए, इस यात्रा के मद्देनज़र प्रधानमंत्री मोदी का अंतिम पड़ाव बहरीन होगा। हालांकि प्रधानमंत्री 24 अगस्त को पेरिस वापस लौटेंगे और G-7 सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस बार भारत को भी इस सम्मेलन ने शामिल होने का न्योता मिला है।

साल 2003 में पहली बार हुआ था शामिल

फ्रांस के बियारिज में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन 24 अगस्त से 26 अगस्त तक चलेगा। यह पहली बार नहीं जब भारत इस सम्मेलन का हिस्सा बनने जा रहा है, साल 2003 में भारत पहली बार इस सम्मेलन में शामिल हुए था और तब भी इसका आयोजन फ्रांस में ही किया गया था। इस साल इस सम्मेलन का 45वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए दुनियाभर के टॉप लीडरों को न्योता भेजा गया है। जिसमें पीएम मोदी का नाम भी शामिल है। खबर है कि इस बार कश्मीर मुद्दे पर चर्चा होने वाली है और इसी के मद्दे नज़र आज प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंच में अपनी बात रखी।

G-7 सम्मेलन में शामिल होने वाले देश

G-7 संगठन में 7 शक्तिशाली देश शामिल हैं, भारत इसका स्थाई सदस्य नहीं है।

  • फ्रांस
  • कनाडा
  • जर्मनी
  • इटली
  • जापान
  • ब्रिटेन
  • अमेरिका

इस बार विशेष निमंत्रण पर शामिल हो रहे देश

  • भारत
  • ऑस्ट्रेलिया
  • स्पेन
  • रवांडा
  • यूरोपीय यूनियन

G-7 समिट क्या है?

  • 1970 के दशक में जब दुनिया आर्थिक मंदी और तेल संकट से जूझ रही थी तब फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति बैलेरी जिस्कॉर्ड डी ने तत्कालीन शक्तिशाली देशों के साथ मिलकर G-7 की स्थापना की थी।
  • इसका पहला सम्मेलन 1975 में हुआ था, उस समय कनाडा इसका स्थाई सदस्य नहीं था।
  • साल 1976 में कनाडा इसका स्थाई सदस्य बना और उसके बाद से ही इस नाम G-7 पड़ा।
  • इस संगठन का कोई मुख्यालय नहीं है। लेकिन इसकी सबसे खास बात है कि जब भी कोई देश इस सम्मेलन का आयोजन करता है तो वह देश उस साल के लिए इस संगठन का अध्यक्ष बन जाता है।
  • इस संगठन का दायित्व है कि दुनियाभर के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा करे और उनके समाधान की तलाश करे।

इस बार किन मुद्दों पर होगी चर्चा

  • जम्मू-कश्मीर मुद्दा
  • आतंकवाद
  • अमेरिका और ईरान के संबंधो और तनाव पर चर्चा
  • परमाणु ऊर्जा
  • ट्रेड टैक्स
  • जलवायु परिवर्तन

G-7 सम्मेलन में शामिल होने वाले देशों के पास क्या है खास

  • ये सभी देश विकसित देशों की गिनती में आते हैं।
  • ये सभी देश दुनिया के सबसे बड़े व्यापारी देश हैं।
  • ये सभी देश परमाणु ऊर्जा के मामले में सबसे शक्तिशाली देश हैं।
  • इन सभी देशों की इकॉनमी सबसे अच्छी है।
  • UN के बजट में सबसे ज्यादा योगदान देते हैं।