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संघ प्रमुख मोहन भागवत 
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फिर निकला आरक्षण का जिन्न, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दिए संकेत

संघ प्रमुख मोहन भागवत निकालना चाहते हैं आरक्षण विवाद का हल 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

वर्तमान सरकार की दूसरी पारी का ट्रैक रिकार्ड बेहद रफ्तार वाला रहा है, दूसरे शब्दों में ,जो कहा वो तत्काल में कर दिखाया', और जो कहा नहीं वो भी कर दिखाया, भले ही वह जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35 A के हटाने के लिए किए गये कारनामा हो या फिर तीन तलाक को एक ही झटके में हलाल करना हो, ये सब मुद्दे काफी दिनों से भारतीय राजनीति में एक विष से भरे मटके के समान थे, जिसे हटाने की बात सब कर चुके थे, लेकिन जब भी मौका आता राजनीति एक बड़ा संकट हो जाता, कभी संख्याबल मायने रखता तो कभी वोटबैंक खिसक जाने का डर मामले को ठंडे बस्ते में डलवा देता था, लेकिन आखिरकार सारे ग्रह नक्षत्र अनुकूल होते रहे और फैसले पर फैसले होते गए।

ऐसे मामले पर संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का आरक्षण के मामले पर संकेत करना , आरक्षण के पक्षधर लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया, मोहन भागवत इस से पहले भी जातिगत आरक्षण के विरोध में बात कर चुके है, मोहन भागवत के अनुसार जातिगत आरक्षण समाज को कई टुकड़ों में बांट रहा है और उन्होंने इस से पूर्व में भी कई बार आरक्षण को आर्थिक आधार पर संशोधन की वकालत की है।

इसी क्रम में मोहन भागवत ने फिर एक बार आरक्षण का जिन्न बोतल से बाहर निकाल दिया ,बीते रविवार को मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में यह कहा कि "इस मामले (आरक्षण) पर हर पक्ष को सद्भावनपूर्ण तरीके से बात करनी चाहिए और इसकी समीक्षा होनी चाहिए,उन्होंने अपने पूर्ववर्ती बयानों का भी बखूबी जिक्र किया कि उनके पहले के बयानों पर काफी बवाल मचाया जा चुका है, लेकिन अब भारत को इस मुद्दे की समीक्षा करनी चाहिए।"

गौरतलब हो भारत में इस वक्त आरक्षण की कैटेगरी में निम्नवत लाभ दिया जा रहा है।

  • अनुसूचित जाति 15 प्रतिशत
  • अनुसूचित जनजाति 7.5 प्रतिशत
  • ओबीसी 27 प्रतिशत
  • गरीब सवर्ण 10 प्रतिशत

इन आंकड़ों के लिए महाराष्ट्र में मराठा और हरियाणा में जाट समुदाय काफी वक्त से आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन करता चला आ रहा है, सो इनको नजरअंदाज करना भी गलत होगा।

भागवत का कथन कड़वा प्रवचन न साबित हो

इससे पूर्व में मोहन भागवत ने आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा की थी जिसकी वजह से भाजपा को बिहार के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था, इस बार भी तीन राज्यों में चुनाव है ,कहीं भागवत का यह कथन जहर न साबित हो , सो इस पर भाजपा का स्टैंड क्या होगा यह देखना होगा , हालांकि इस बारे में मोहन भागवत ने बाद में अपनी सफाई भी पेश की लेकिन चूंकि जुबान का एक तीर है जो वापस नहीं होता ,देखना है मामले कब और कैसे विस्तारित होता है।