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सेना प्रमुख विपिन रावत
सेना प्रमुख विपिन रावत|Social Media 
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बालाकोट के बाद पाकिस्तान को झेलना पड़ सकता था युद्ध - सूत्र

“सेना के सूत्रों के अनुसार ,बालाकोट मामले को किसी भी तरह के पारंपरिक युद्ध में बदलने को तैयार थी सेना”     

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

पुलवामा हमले के बाद भारत के प्रधानमंत्री ने खुले शब्दों में आतंकियों को चेतावनी दी थी कि "उन्होंने जो गुनाह किया है, उसका भुगतान उन्हें करना पड़ेगा, हम उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे , और हम इस घटना का माकूल जवाब देंगे, जिसके लिए उसका वक्त और जगह हम तय करेंगे"

आखिर ऐसा हुआ भी भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकियों के कैम्प तबाह करके तमाम आतंकियों सहित कैम्प में शामिल पाक आर्मी के जवानों को भी नेस्तानाबूत कर दिया था।

पाकिस्तान के लिए यह स्थिति सांप और छछूंदर जैसी हो गयी थी जहाँ एक ओर पाकिस्तान अपने कब्जे वाले कश्मीर में कोई आतंकी कैम्पों की मौजूदगी दुनिया को नहीं दिखाना चाहता था , वहीं पाकिस्तान को अपनी आवाम के बीच अपनी बची खुची इज्जत भी बचानी थी,सो मजबूरी में घटना के तुरंत बाद कुछ अमेरिकी फाइटर प्लेन भारतीय सीमा में प्रवेश कराकर बमबारी की, इस घटना में कुछ बम भारतीय सेना के आयुध डिपो के नजदीक की ब्लास्ट हुए।

इस घटना में भारतीय वायुसेना जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार थी, और आखिर में भारतीय पायलटों द्वारा पाकिस्तान को उसी की सरहद में न सिर्फ जाकर खदेड़ा गया बल्कि उसके एक उन्नत विमान को मार गिराया गया, हालांकि इस घटनाक्रम में एक भारतीय विमान भी दुर्घटनाग्रस्त हुआ ,और वायुसेना पायलट अभिनदंन को पाकिस्तान के सीमा में पाकिस्तान सेना द्वारा कैद किया गया।

यह घटना क्रम जो दुनिया के सामने था, लेकिन इससे अलग, भारत कुछ दूसरा करने के मूड में भी था। भारत की तरफ से अभिनंदन को बिना शर्त रिहाई की बात कही गयी,जबकि पाकिस्तान इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय और रक्षा मंत्रालय का दखल मांग रहा था, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं, पाकिस्तान ने अपनी हालात के मद्दे नजर अभिनंदन को रिहा करना ही बेहतर समझा।

भारत पूरी तैयारी में था, मामला बड़े युद्ध में बदल सकता था

सूत्रों के अनुसार हाल में ही रिटायर्ड सेना अधिकारियों ने यह जानकारी रिवील की है की सेना प्रमुख के निर्देश बेहद साफ थे, और इस का मतलब साफ था कि सेना प्रमुख को ऊपर से खुली छूट थी, अगर पाकिस्तान कोई भी और हरकत करता है तो पारंपरिक युद्ध घोषित किया जा सकता था, और इसका एक मुख्य बिंदु था कि हम इस युद्ध को पाकिस्तान की जमीन पर ले जाएंगे।

इसी मामले में एक जानकारी और संज्ञान में आई है कि भारतीय सेनाओं ने इस के मद्देनजर ब्रम्होस जैसी मिसाइलें रेडी मोड़ में रख रखी थी। हालांकि भारत की कूटनीति युद्ध से ज्यादा काम आयी, पाकिस्तान दुनिया मे बिल्कुल अलग थलग होने के बाद बेहद निराश था, और मजबूर होकर अभिनंदन को रिहा करना बेहतर समझा।