उदय बुलेटिन
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मदर मिल्क बैंक
मदर मिल्क बैंक|google
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क्यों हो जाती है मां को दूध की कमी, मिल्क बैंक कैसे करता है काम ? 

भारत में बढ़ते शिशु मृत्युदर को देखते हुए कई जगहों पर मदर मिल्क बैंक खोला गया, जो नवजात को जीवनदान देने का काम कर रहे हैं। 

Puja Kumari

Puja Kumari

यह तो हम सभी जानते हैं कि एक नवजात शिशु के लिए मां का दूध बहुत आवश्यक है लेकिन कई बार ऐसा होता है कि बच्चे को मां का दूध ना मिलने के कारण उन शिशुओं की मौत हो जाती है। यह बात हाल ही में विश्व बैंक द्वारा प्रस्तुत किए गए आकड़ों से पता चलता है, पहले बात करें अगर विश्व की तो यह दर प्रति 1000 बच्चों में 32 है जबकि भारत में यह दर 38 है। इस आंकड़े को जानने के बाद आपको जरूर झटका लगा होगा, क्योंकि यह वो बच्चे हैं जो इस दुनिया में जन्म तो लेते हैं पर अफसोस की वो जीवित नहीं बच पाते हैं। जरा सोचिए उन मां के ऊपर क्या बीतती होगी जो अपने बच्चों को पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं पिला पाती होंगी जिसके वजह से उनके शिशुओं के जान पर भी बन आती है।

जाहिर सी बात है कि उन मां को इस ‘मदर मिल्क बैंक’ के बारे में जानकारी भी नहीं होती होगी या फिर उन जगहों पर अभी भी यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। इस समस्या को देखते हुए विश्व की तरह भारत में भी ‘मदर मिल्क बैंक’ की शुरुआत की गई। सबसे पहले इसकी शुरुआत भारत के कुछ चुनिंदा राज्यों में ही हुई जिसके बाद जरूरत के अनुसार धीरे-धीरे इस बैंक का विस्तार किया गया अब आप यह सोच रहे होंगे कि आखिर यह मिल्क बैंक काम कैसे करता है? कैसे जरूरतमंद तक इसे पहुंचाया जाता है? क्या इससे प्राप्त दूध सेहतमंद होते हैं? आपके इन्हीं सवालों का जवाब आज हम आपको देने जा रहे हैं।

मदर मिल्क बैंक
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महिलाओं में क्यों बनता है कम दुध

मां बनना एक अद्भुत अहसास होता है जिसका अनुभव लगभग सभी महिलाओं को होता है, पर मां बनते ही एक महिला पर उसके बच्चे की जिम्मेदारी भी आ जाती है। मेडिकल साइंस में देखा जाए तो मां बनने के बाद महिलाओं के शरीर में काफी परिवर्तन देखने को मिलता है, कई महिलाओं को ये 9 माह काफी ज्यादा कष्ट में बिताने पड़ते हैं तो कई को कुछ कम कष्ट होता है। महिलाओं के साथ इस तरह की समस्या बच्चे के जन्म लेने से पहले तक ही नहीं बल्कि बाद तक भी बनी रहती है। बच्चे को जन्म देने के साथ ही उसे मां का दूध पिलाना आवश्यक होता है पर कई महिलाओं के शरीर में पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं बन पाता है जिसकी वजह से उनके बच्चे को दूध नहीं मिल पाता।

वैसे आजकल के समय में यह समस्या आम हो गई है क्योंकि ज्यादातर महिलाओं को ये दिक्कत हो रही है। यह तो आप भी जानते होंगे इस भागदौड़ भरी लाइफ में सबकुछ कितना फास्ट हो गया है और इसके साथ ही साथ लोगों की टेंशन भी कई गुना बढ़ चुकी है। जब महिलाएं इस दौरान स्ट्रेस में रहती है तो उनके शरीर में दूध कम बनता है, यही वजह है कि पहले के लोग कहते थें कि इस अवस्था में जितना हो सके खुश रहने का प्रयास करें। पर अब क्या कहा जा सकता है क्योंकि यह 21 वीं सदी चल रहा है और इस समय शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो बिना स्ट्रेस के जी रहा हो। मानसिक तौर पर परेशान होने के अलावा हार्मोन में बदलाव भी इसके पीछे का एक कारण हो सकता है।

ऐसे काम करता है ‘मदर मिल्क बैंक’

अब कई लोग यह सोचते हैं कि इस आधुनिक जमाने में जहां हर चीज में मिलावट हो रही है तो ऐसे में इस दूध पर कैसे विश्वास किया जाए? पता नहीं यह किस तरह से बनता होगा ? क्या यह हमारे बच्चे के लिए सही होगा? यह सवाल हर मां के मन में जरूर आता है। तो बता दें कि इस मदर मिल्क बैंक का दूध बिल्कुल सुरक्षित होता है क्योंकि कुछ माएं जिन्हें पर्याप्त दूध होता है वह उसे यहां डोनेट करती हैं। इस बैंक में उनके दूध को लेने से पहले कई तरह की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जिसमें सबसे पहले तो इन महिलाओं के कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं, जिससे यह पता चल जाए कि उन्हें किसी भी तरह की बिमारी तो नहीं है। इसके बाद इन सभी टेस्ट में पास होने के बाद ही उनके दूध को लिया जाता है।

सबसे खास बात तो यह है कि इस अनमोल दूध को प्रोटेक्ट करने के लिए -20℃ टेम्परेचर पर जमा करके रखा जाता है। जिसकी वजह से यह दूध करीब 6 माह तक खराब नहीं होता है। इतनी सुरक्षा में रखने के बावजूद जब यह दूध किसी बच्चे को देने के लिए बैंक से जाता है तो उससे पहले भी उसका बैक्टीरिया टेस्ट कर लिया जाता है। अब आप भी समझ गए होंगे कि इस दूध को नवजात शिशुओं को देने में कोई नुकसान नहीं है। यह दूध उन बच्चों को विशेष रूप से दिया जाता है जिनकी मां नहीं होती हैं या फिर उन बच्चों की मां को पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं होता जिससे वो अपने शिशु का पेट भर सके।

मदर मिल्क बैंक
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भारत में कुल कितने हैं ‘मदर मिल्क बैंक’

अब आप यह जानना चाह रहे होंगे की अपने देश में अभी कुल कितने मदर मिल्क बैंक हैं और कहाँ-कहाँ स्थित हैं? फिल्हाल तो हमारे देश में बहुत ज्यादा नहीं लेकिन कुल मिलाकर देखा जाए तो 60 मदर मिल्क बैंक खुल चुके हैं और अन्य खुलने की तैयारी में भी हैं। सबसे पहला भारत में जो मिल्क बैंक खुला वो मुंबई शहर में साल 1989 में स्थापित हुआ था। जिसके बाद धीरे-धीरे अन्य राज्यों में कई प्राइवेट तो कुछ सरकारी अस्पतालों में भी यह खुला। अभी के आंकड़ों को देखा जाए तो सबसे ज्यादा राजस्थान में मिल्क बैंक हैं जिनकी संख्या 13 है, इसके बाद नंबर आता है महाराष्ट्र का जहां 12 हैं और फिर तमिलनाडु में 10 मदर मिल्क बैंक हैं।