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हवाई जहाज की ‘कष्टकारी यात्रा’
हवाई जहाज की ‘कष्टकारी यात्रा’|Google
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हवाई जहाज की ‘सुखद यात्रा’ का ‘कष्टकारी यात्रा’ में हो रहा बदलाव, जानें क्या है कारण 

एक समय ऐसा था जब हवाई जहाज की यात्रा को बेहद ही सुगम व सुखद माना जाता था लेकिन आज सबकुछ बदल गया है, ये सुखद यात्रा कब कष्टकारी यात्रा में बदल गया किसी को पता तक नहीं चला। 

Puja Kumari

Puja Kumari

आज के इस भागदौड़ भरी दुनिया में हममें से ज्यादातर लोग ऐसे होंगे जो हवाई जहाज का सफर कर चुके होंगे, या फिर जिन्होने नहीं भी किया होगा वो उसके बारे में काफी कुछ जानते होंगे। पहले के समय में ये हवाई यात्राएं सिर्फ अमीरों के लिए हुआ करती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। आज के समय में माध्यम वर्ग के लोग भी हवाई यात्रा करते हैं। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि कई सारी हवाई कम्पनियों ने मुनाफा कमाने और ज्यादा लोगों को यात्रा करवाने के लिए अपने टिकट की कीमत को कम किया है।

पर आपको शायद यह नहीं पता होगा कि इसका असर आपके यात्रा पर पड़ने वाला है। जी हां क्योंकि आने वाले समय में रेल यात्रा की तरह हवाई यात्रा भी आपके लिए कष्टदायक होने वाला है। इतना ही नहीं हो सकता है कि कुछ ही समय बाद आपको रेलवे की तरह हवाई जहाज में भी खड़े होकर सफर करना पड़े? आपको ये बातें मजाक लग रही होंगी या आप सोच रहे होंगे कि हम ऐसा क्यों कह रहे हैं तो ऐसा कहने के पीछे कई कारण छिपे हुए हैं जिससे आप अभी तक अनजान थें लेकिन अब इन बातों को जानने के बाद आप खुद भी ऐसा ही कहने लगेंगे।

हवाई जहाज की ‘कष्टकारी यात्रा’
हवाई जहाज की ‘कष्टकारी यात्रा’
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हवाई यात्रा के कष्टकारी होने के क्या है कारण

दरअसल बदलते समय के साथ हवाई जहाज की कंपनियां अपने टिकट तो सस्ते करते जा रही है लेकिन इसके साथ ही साथ सीटें भी बढ़ाती जा रही है। ऐसा करने के लिए हवाई कंपिनयां लेग रूम यानि की हवाई जहाज के सीटों के बीच की जगह को कम कर रही है। अगर आपने कभी इकॉनमी क्लास में सफर किया होगा तो आपको इस समस्या का अंदाजा जरूर लग गया होगा। लेग रूम के स्पेस को कम करने से यात्रियों को बैठने में काफी कष्ट होता है जिसकी वजह से उनके घुटनों व पीठ में दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती है और यही कारण है कि पहले की अपेक्षा अब हवाई यात्रा कष्टदायक बनती जा रही है। ऐसा करने से ज्यादातर हम लोगों के लिए समस्या हो रही है जो बुजुर्ग हैैं या अर्थराइटिस के रोगी हैं।

अगर आप आंकड़ों पर गौर करें तो इसे समझने में और भी ज्यादा सरलता होगी, क्योंकि पिछलेे कुछ सालों में लेग रूम के स्पेस में हुए बदलाव को हम देख सकते हैं।

साल 2000 में इन सीटों के बीच की जगह 34 से 35 इंच थी, जिसे साल 2008 में घटाकर 30 से 31 इंच कर दी गई। इसके बाद साल 2018 में हवाई कंपनियों ने इसे और भी कम करके 28 इंच कर दिया है।

इतना ही नहीं अगर बात करें सीटों की चौड़ाई की तो इसे 18.5 इंच से कम कर 17 इंच कर दिया गया है।

हवाई जहाज की ‘कष्टकारी यात्रा’
हवाई जहाज की ‘कष्टकारी यात्रा’
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इन सभी चीजों में बदलाव बस इसलिए किया गया है ताकि हवाई जहाज कर अंदर सीटों की संख्या को बढ़ाया जा सके ताकि एक उड़ान में ज्यादा से ज्यादा यात्री इसमें सवार हो पाये। अपने मुनाफे को बढ़ाने के लिए ये हवाई कंपनियां यात्रियों की हवाई यात्रा को सुखद बनाने के बदले कष्टकारी यातना में बदल देती है और उन्हें कष्ट देती है। ध्यान देने वाली बात ये है कि इस तरह की ज्यादातर  समस्याएं डोमेस्टिक फ्लाइटस में देखने को मिल रही है, फिल्हाल इंटरनेशनल एयरलाइन की स्थिति काफी ठीक है।

इंटरनेशनल मानकों की मानें तो अगर विमान में कुल 44 से ज्यादा लोग मौजूद हैं तो आपातकाल वाली परिस्थिति में महज 90 सेकेंड के अंदर उन सभी को बाहर निकालना पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है विमान में यात्रियों की संख्या ज्यादा होने से विमान में गुस्सा व मारपीट की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। इसके पीछे की वजह भी स्पेस ही है जी हां क्योंकि जगह कम होने से इंसान की परेशानियां बढ़ेगी और इस कारण उन्हें क्रोध आएगा, ऐसे में इन घटनाओं का होना लाजमी है।

हवाई जहाज की ‘कष्टकारी यात्रा’
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सुविधा के नाम पर लूट रही है एयरलाइन कंपनियां

गौर करने वाली बात ये है कि इंडियन एयरलाइन वेब चेकिंग के नाम पर एक्स्ट्रा चार्ज लेती है, इतना ही नहीं इसके अलावा विंडो सीट के लिए भी अलग से पैसे लिए जाते हैं और सुविधाएं दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है, एक तरह से ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि यह कंपनियां यात्रियों को लूट रही है क्योंकि एयरलाइन बस अपने मुनाफे का सोच रही है।