उदय बुलेटिन
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रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड
रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड|Google
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आखिर रवीश कुमार को ही क्यों मिला रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड?

साल 2019 में रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड में एनडीटीवी के वरिष्ट पत्रकार रवीश कुमार का नाम भी आया, लेकिन कई लोगों के मन में ये सवाल आ रहा है कि इस अवार्ड के लिए आखिर रवीश ही क्यों चुने गए।  

Puja Kumari

Puja Kumari

आज हर तरफ रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड (Ramon Magsaysay Award) की चर्चा हो रही है, हो भी क्यों न भला इस साल ये पुरस्कार पाने वाले लोगों में एक भारतीय पत्रकार भी शामिल है जिसका नाम रवीश कुमार (Ravish Kumar) है। पत्रकारिता की दुनिया में रवीश का नाम कुछ ऐसा छाया है की ये जहां भी जाते हैं लोग इनसे मिलने के लिए बेताब हो जाते हैं, मानों कोई स्टार सामने आ गया हो। वैसे ये कहना गलत नहीं होगा कि रवीश पत्रकारिता जगत में किसी सेलेब्रिटी से कम नहीं है।

क्या है रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड

रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड
रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड
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ये बात तो सभी जान गए की रवीश को इतना बड़ा अवार्ड मिला लेकिन अभी भी कई लोगों को इस अवार्ड के बारे में काफी कुछ नहीं पता है। बता दें कि रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड एशिया के उन्हीं व्यक्तियों और संस्थाओं को दिया जाता है जो अपने क्षेत्र में विशेष रूप से बदलाव व साहसी कार्य किए हों और वरिष्ट पत्रकार रवीश कुमार (Ravish Kumar) उनमें से एक हैं। वैसे बताते चलें कि रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड (Ramon Magsaysay Award) को एशिया का नोबेल पुरस्कार भी कहा जाता है। हालांकि यह पुरस्कार फिलिपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रेमन मैग्सेसे की याद में दिया जाता है।

रवीश को ही क्यों मिला ये अवार्ड

कई लोग ये सवाल कर रहे हैं कि यह पुरस्कार रवीश को ही क्यों मिला? भारत में अन्य कई लोग भी मौजूद हैं जिन्हें ये पुरस्कार दिया जा सकता था ? तो बता दें कि रवीश को यह सम्मान मिलने के पीछे की वजह ये है कि उन्होने उच्चस्तरीय, सत्य के प्रति निष्ठा व ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ पत्रकारिता की है। अवार्ड देने वाली संस्था का कहना है कि रवीश कुमार ने बेज़ुबानों को आवाज़ दी है।

विशेष रूप से रवीश कुमार ने अपने कार्यक्रम 'प्राइम टाइम' (Ravish Kumar's news programme Prime Time) के जरिए बिना डरे कई सच से पर्दा उठाया है, इसके अलावा आमजन की समस्याओं को भी सामने लाया है जो कि एक सच्चे पत्रकार की पहचान है। कई बार इनको गालियां भी सुननी पड़ी तो कई बार तारीफें भी मिली लेकिन इन सबके बीच रवीश ने कभी हिम्मत नहीं हारी और लगातार अपने लक्ष्य पर अड़िग रहे।

यह बात सच है कि रवीश कुमार ने पत्रकारिता जगत में जगह बनाने के लिए काफी कड़ी मेहनत की है। बात साल 1996 की है जब रवीश कुमार ने एनडीटीवी ज्वॉइन किया था। इस दौरान वो इस चैनल में आई सभी चिट्ठियों को छांटा करते थे, जिसके बाद उन्होने रिपोर्टिंग की और फिर इसके जरिए उन्होने समाज की विडंबनाओं पर सवाल उठाया, धीरे-धीरे लोग इनको जानने लगे। चैनल में भी उनका कार्यक्रम 'रवीश की रिपोर्ट' के साथ शुरू हो गया। फिर क्या था इसके बाद इन्होने एंकरिंग करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं इनसब के दौरान एक चीज यह भी हुआ कि जिन लोगों की कोई नहीं सुनता था उनकी उम्मीद रवीश कुमार से जुड़ गई क्योंकि वो उन लोगों की सुनते थें।

अब तक इन भारतीयों को मिल चुका है ये सम्मान

इस साल ये अवार्ड कुल पांच लोगों को दिया गया है जिसमें रवीश कुमार के अलावा, म्यांमार के को सी विन, थाइलैंड की अंगहाना नीलपाइजित, फिलिपिंस की रमेंड के साथ-साथ दक्षिण कोरिया के किंग जोंग भी शामिल हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि इससे पहले भी कुछ भारतीयों को ये पुरस्कार मिल चुका है। रवीश इन भारतीयों में 11वें नंबर पर आते हैं।

रवीश को यह अवार्ड जर्नलिज्म, लिट्रेचर और क्रिएटिव कम्युनिकेशन आर्ट्स कैटेगरी में मिला है। आपको बता दें कि पत्रकारिता के क्षेत्र में रवीश से पहले साल 2007 में पी साईनाथ को यह अवॉर्ड मिला था, जिसे 12 साल बित चुके हैं। दरअसल पी साईं को पत्रकारिता के क्षेत्र में अहम योगदान के लिए यह अवॉर्ड दिया गया था।

ये रहे बाकी भारतीयों के नाम

1.1961- अमिताभ चौधरी

2. 1967- सत्यजित राय

3. 1975- बूबली जॉर्ज वर्गीस

4. 1981- गौर किशोर घोष

5. 1982- अरुण शौरी

6. 1984- राशीपुरम लक्ष्मण

7. 1991- के वी सुबबना

8. 1992- रवि शंकर

9. 1997- महेश्वेता देवी

10. 2007- पी साईनाथ

11. 2019- रवीश कुमार