उदय बुलेटिन
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तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिलाएं 
तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिलाएं |Google
देश

इन 5 मुस्लिम महिलाओं के कारण ट्रिपल तलाक पर बना कानून, एक कुप्रथा का हुआ अंत

ट्रिपल तलाक पर ऐतिहासिक फैसला होने के बाद हर तरफ इसकी ही बातें हो रही हैं, इस फैसले के पीछे इन 5 महिलाओं का हाथ है। 

Puja Kumari

Puja Kumari

जहां एक तरफ 30 जुलाई के दिन मोदी सरकार ने तीन तलाक बिल (Triple Talaq Bill) को संसद में पास कर मुस्लिम महिलाओं को वर्षों पुरानी कुप्रथा से आजादी दिलाई वहीं आज उस बिल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) ने भी स्वीकृति दे दी। जी हां, यह बिल अब कानून में परिवर्तित हो गया और 19 सितंबर से देशभर में लागू भी हो जाएगा। इस बिल के कानून में बदलने का इंतजार देश की करोड़ों मुस्लिम महिलाओं को था और अब वो इस ऐतिहासिक फैसले से काफी खुश हैं। अब इन महिलाओं को उनका हक मिल सकेगा और वो भी सामान्य लोगों की तरह निडर होकर अपना जीवन व्यतीत कर पाएंगी।

देशभर में इस कानून की चर्चा हो रही है और लोग इसका जश्न भी मना रहे हैं लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर इस कुप्रथा को समाप्त कर कानून बनाने की मांग की सबसे पहले किसने की थी? आखिर सरकार ने क्यों सदियों पुरानी चली आ रही इस परंपरा को रोकने के लिए इतना बड़ा कदम उठाया ? इन सभी सवालों के जवाब हम आपको बताने जा रहे हैं।

तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिलाएं 
तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिलाएं 
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दरअसल मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक यानि तीन तलाक (triple talaq) को कानून बनाने के लिए कुछ मुस्लिम महिलाओं ने ही आवाज उठाया, जो खुद भी इसका शिकार हो चुकी हैं। इन महिलाओं को हजारों धमकियां मिलने के बावजूद भी इन्होने अपने कदम पीछे नहीं हटाएं और आज जाकर करोड़ो महिलाओं को इस बंधन से आजाद कराया। इन महिलाओं की हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी जो इन्होने अपने साथ हुए इस अपराध के खिलाफ एकजुट हुईं और इसे मुकाम तक पहुंचाया।

ये हैं वो 5 मुस्लिम महिलाएं

सायरा बानो

सबसे पहला नाम आता है सायरा बानों का जिन्होने पहली बार इस कुप्रथा के खिलाफ आवाज उठाई थी। दरअसल सायरा उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली हैं इनकी शादी साल 2001 में हुई थी और अक्टूबर 2015 में इनके पति ने उन्हें चिट्ठी लिखा और उसमें ही तलाक दे दिया। सायरा के पति ने जो पत्र लिखा था उसमें तलाक का वजह भी बताया था, पत्र में लिखा गया था कि तुम्हारे खराब आचरण व शरिया के खिलाफ किए गए काम के कारण मैं तुमसे अलग होना चाहता हूं और शरिया के नियमों के अनुसार 3 बार मैं तुम्हें तलाक देता हूं, मैं तुम्हें तलाक देता हूं, मैं तुम्हें तलाक देता हूं, कहकर शादी के बंधन से मुक्त करता हूं। सायरा ने इसके बाद साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट में केस कर दिया और इस कुप्रथा पर ही सवाल उठा दिया और आज नतीजा है कि 4 साल बाद उनकी इस लड़ाई की जीत हुई।

इशरत जहां

इसके बाद नाम आता है इशरत जहां का, जी हां पश्चिम बंगाल के हावड़ा की रहने वाली इशरत जहां ने भी तीन तलाक के खिलाफ लड़ाई लड़ी। इशरत के साथ तो जो हुआ वो कोई सोच भी नहीं सकता था साल 2001 में इशरत की शादी हुई जिसके बाद उनके बच्चे भी हुए। लेकिन कुछ ही समय के बाद एक दिन उनके पति ने उन्हें दुबई से फोन किया और कहा कि वो उन्हें तलाक देना चाहते हैं, इस तरह इशरत के पति ने फोन पर ही 3 बार तलाक बोलकर इशरत को तलाक दे दिया। इसके अलावा उनके बच्चे को भी जबरन अपने पास रख लिया।

फिर क्या था इशरत ने अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ कोर्ट में याचिका में दायर कि जिसमें उन्होने अपने बच्चों को वापस दिलाने और उसे पुलिस सुरक्षा दिलाने की मांग की। क्योंकि केस करने के बाद उन्हें कई धमकियां भी मिलने लगी थी। पर आज इशरत खुली हवा में चैन की सांस ले सकेंगी, आज सालों से लड़ रही लड़ाई पर उनकी जीत हुई।

तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिलाएं 
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आफरीन रहमान

अब बात करते हैं जयपुर की रहने वाली आफरीन की (25 वर्ष), जिनके पति ने तो स्पीड पोस्ट के जरिए ही तलाक दे दिया था जो कि बेहद ही गलत है। आफरीन ने अपने साथ हुई इस घटना के बाद कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और न्याय की गुहार लगाई। आफरीन का आरोप था कि उनके पति समेत ससुराल पक्ष के दूसरे लोगों ने मिलकर दहेज की मांग को लेकर उनके साथ काफी मारपीट की और फिर उन्हें घर से निकाल दिया।

अतिया साबरी

आतिया जो कि यूपी के सहारनपुर की रहने वाली थी, इनके पति ने भी इनसे कागज पर तीन तलाक लिखकर तलाक ले लिया। आतिया की शादी साल 2012 में हुई थी जिसके बाद उनकी दो बेटियां भी हुई। लेकिन उनके पति को बेटियां नहीं चाहिए थीं और इस बात का गुस्सा उनके ससुराल वालों ने अतिया पर दिखाया और तलाक दे दिया।

गुलशन परवीन

अब बारी आती है गुलशन परवीन की जो कि यूपी के ही रामपुर की निवासी हैं, गुलशन की शादी साल 2013 में हुई थी और उनका 2 साल का बेटा भी हैं लेकिन गुलशन के पति ने एक दिन अचानक से उन्हें 10 रुपये के स्टांप पेपर पर तलाकनामा भेज दिया था, उस दौरान वो अपने मायके में थी।

इन महिलाओं की तरह अन्य कई महिलाएं हैं जिसे तीन तलाक (Triple Talaq) के दंश से गुजरना पड़ा, लेकिन इन 5 महिलाओं ने इस घिनौनी प्रथा को बंद करने का बीड़ा उठाया और बाकी के महिलाओं को भी इससे बचा लिया। यह भी सच है कि जो इनके साथ हुआ उसके बाद शायद ही कोई इतना हिम्मत जुटा पाता है। इन महिलाओं के हौसले को हम सलाम करते हैं।