उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com
Chandrashekhar Azad
Chandrashekhar Azad|Google
देश

चंद्रशेखर आजाद की जयंती आज, पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि 

चंद्रशेखर आजाद का जन्म आज ही के दिन मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा गांव में हुआ था। 

Varun Singh

Varun Singh

Summary

भारतीय स्वतंत्रता की लड़ाई में अंग्रेजों के दांत खट्टे कर देने वाले भारत के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें याद करते हुए आजाद को देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा कि 'भारत माता के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद को उनकी जयंती पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। वे एक निर्भीक और दृढ़ निश्चयी क्रांतिकारी थे, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने जीवन की आहुति दे दी। उनकी वीरता की गाथा देशवासियों के लिए प्रेरणा का एक स्रोत है।'

भारत को स्वतंत्र कराने के लिए अपना सर्वस्व अर्पण कर देने वाले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी और मां का नाम जगदानी देवी था। 

महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया

आजाद ने मात्र 14 वर्ष की आयु में वाराणसी जाकर संस्कृत पाठशाला में पढ़ाई की, जिस दौरान उन्होंने कानून भंग आंदोलन में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने 1920 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया और इस दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा।

जेल में पेशी के दौरान उन्होंने अपना नाम ‘आजाद’ पिता का नाम ‘स्वतंत्रता’ और निवास ‘जेल’ बताया। 

1922 में चौरी चौरा की घटना के बाद गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया तो देश के तमाम नवयुवकों की तरह आज़ाद का भी कांग्रेस से मोहभंग हो गया। जिसके बाद पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल, शचीन्द्रनाथ सान्याल योगेशचन्द्र चटर्जी ने 1924 में उत्तर भारत के क्रान्तिकारियों को लेकर एक दल हिन्दुस्तानी प्रजातान्त्रिक संघ का गठन किया। चन्द्रशेखर आज़ाद भी इस दल में शामिल हो गए।

जब साण्डर्स को गोली मारी

बता दें चंद्रशेखर आजाद, राजगुरू और भगत सिंह ने 17 दिसंबर 1928 को लाहौर में पुलिस अधीक्षक के दफ्तर का घेराव कर लिया था और साण्डर्स के बाहर निकलते ही राजगुरू, भगत सिंह ने उन्हें गोली मार दिया। इस पर जब साण्डर्स के अंगरक्षक ने उनका पीछा किया तो चंद्रशेखर आजाद ने उसे भी खत्म कर दिया।

27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में आज़ाद ने खुद को गोली मारकर देश के लिए आहुति दे दी। बता दें कि चंद्रशेखर आजाद ने संकल्प लिया कि वह कभी भी पकड़े नहीं जाएंगे और न ही ब्रिटिश सरकार के हाथों मारे जाएंगे।