उदय बुलेटिन
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टल गई चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग
टल गई चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग|Google
देश

मिशन चंद्रयान-2 को लगी नजर, चांद पर बसने का सपना अभी भी दूर

चंद्रयान-1 के बाद भारत ने इस बार उससे भी बड़े मिशन को सफल करने का प्रयास किया है जिसका नाम चंद्रयान-2 है यही कारण है कि इस मिशन पर सभी वैज्ञानिकों की नजरें टिकी है। 

Puja Kumari

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भारत का सबसे बड़ा मिशन चंद्रयान-2 के लिए हर कोई दुआएं कर रहा था जैसे जैसे उसके लॉन्चिंग का समय करीब आ रहा था वैसे वैसे लोगों के दिल की धड़कनें बढ़ रही थी और हो भी क्यों न भला, ये मिशन है ही इतना खास। लेकिन वो कहते हैं न कि जब किस्मत साथ न हो तो आप मंजिल के करीब पहुंचकर भी असफल हो जाते हो, चंद्रयान-2 के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जहां दुनिया भर में इस मिशन के लिए काउंटडाउन शुरू हो चुका था वहीं तय सीमा से महज एक घंटे पहले कुछ ऐसा हो गया कि एकाएक इसकी लॉन्चिंग को रोकना पड़ा।

जैसा कि खबरों में बताया जा रहा था कि इसरो Indian Space Research Organisation (ISRO) का यह मिशन 15 जुलाई को सुबह के 2: 30 बजे श्रीहरिकोटा (SRIHARIKOTA) के स्पेस सेंटर से लॉन्च होने वाला था पर लॉन्चिंग व्हिकल सिस्टम में आई तकनीकि खराबी के कारण उसे रोक दिया गया। हालांकि लोगों में इसकी लॉन्चिंग को देखने के लिए खासा उत्साह था लेकिन अब वो पल कब नसीब होगा ये फिल्हाल तो पता नहीं। अभी तक इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है कि इसकी लॉन्चिंग की अगली तारीख कब होगी इसलिए आपको थोड़ा और इंतजार करना होगा। भले ही यह अभी लॉन्च नहीं हो पाया है लेकिन इसकी विशेषता कुछ ऐसी है कि लोग इसके बारे में जानने के लिए बेहद उतावले हैं।

क्यों है खास चंद्रयान-2

वैसे कई लोगों के मन में ये सवाल आ रहा होगा आखिर इस मिशन में ऐसा क्या खास है जिसकी लॉन्चिंग को लाइव देखने के लिए लोग तरस रहे हैं। या फिर इसकी इतनी चर्चा क्यों हो रही है। तो इसकी सबसे बड़ी खास बात है कि चंद्रयान-1 की तुलना में 'चंद्रयान-2' काफी एडवांस है, 'चंद्रयान-2' एक ऐसा स्पेसक्राफ्ट है जो कि चांद पर सॉफ्ट लैंडिग करेगा। सॉफ्ट लैंडिग का मतलब होता है कि जब भी किसी स्पेसक्राफ्ट (Space Center) को किसी भी ग्रह पर उतारा जाए तो उसमें किसी भी तरह का डैमेज न हो।

अगर ऐसा करने में भारत सफल हो गया तो यह Human Space Flight Programme वाला रूस, अमेरीका व चीन के बाद दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। लेकिन यह जितना सुनने में आसान लग रहा है उससे कई गुना ज्यादा कठिन है क्योंकि चंद्रमा पर गुरूत्वाकर्षण बहुत कम है और लैंडिंग के लिए पैराशूट का भी प्रयोग नहीं किया जा सकता है। यही कारण है कि अभी तक यहां जितने भी स्पेसक्राफ्ट (Spacecraft) ने सॉफ्ट लैंडिंग करना चाहा वो किसी न किसी वजह से नष्ट हो गया। अब देखना ये होगा कि भारत इसमें कामयाब हो पाता है या नहीं ? इस मिशन में अन्य कई ऐसी विशेषताएं भी हैं जो इसे और भी ज्यादा खास बनाती है।

मिशन चंद्रयान-2
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GSLV मार्क -3 का इस मिशन में है मुख्य रोल

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि किसी भी स्पेसक्राफ्ट को अंतरिक्ष में भेजने के लिए रॉकेट का प्रयोग किया जाता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ पर चंद्रयान-2 को अंतरिक्ष में भेजने के लिए भारत के सबसे शक्तिशाली व बाहुबली कहे जाने वाले रॉकेट का प्रयोग किया गया जिसका नाम 'GSLV मार्क -3' (GSLV Mk III) है। इस रॉकेट की लंबाई 43X43 मीटर व वजह 640 टन है। इस रॉकेट की खासियत यह है कि ये थ्री स्टेज रॉकेट है, जिसके पहले स्टेज का इंजन ठोस इंधन पर व दूसरा इंजन तरल इंधन पर काम करता है, इसके अलावा तिसरा इंजन क्रायोजेनिक है। यह रॉकेट लगभग 4000 किलो तक के पेलोड को अंतरिक्ष में ले जाने की क्षमता रखता है।

चंद्रयान-2 के साथ लैंडर, रोवर व ऑर्बिटर को भी अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। जिसमें ऑर्बिटर का काम चांद की सतह पर जाकर वहां की निगरानी करना होगा जो कि पृथ्वी व लैंडर के बीच कम्युनिकेशन का काम भी करेगा। रोवर का काम चंद्रमा के सतहों पर स्थित तत्वों का पता लगाना रहेगा वहीं लैंडर चंद्रयान 2 को चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने में मदद करेगा। ये पूरी प्रकिया कम्पयूटर से ही की जाएगी।

चंद्रयान-2 का क्या है मकसद

अब आपके मन में एक सवाल ये भी आ रहा होगा कि चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने के बाद आखिर क्या करेगा। तो इसका सबसे पहला मकसद यह है कि चंद्रयान इस बात की जांच करेगा कि जैसे पृथ्वी पर भूकंप आते हैं वैसे चंद्रमा पर भूकंप आते हैं या नहीं। दूसरा मकसद यह होगा कि चंद्रयान 2 का रोवर चंद्रमा के सतह की रसानिक रूप से जांच करेगा। इसके अलावा चंद्रयान-2 का तीसरा व आखिरी मकसद यह होगा कि वह चांद पर खनिजों के साथ बर्फ का भी पता लगाएगा।

मिशन चंद्रयान-2
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978 करोड़ रूपए की लागत से बना चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) एक ऐसा इतिहास रचने जा रहा है जिसकी कल्पना कई बार की जा चुकी है पर वो अबतक संभव नहीं हो पाया है। दरअसल चंद्रयान-2 की लैंडिंग चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कराई जाएगी जहां अभी तक कोई नहीं पहुंच पाया है।

बता दें कि दक्षिणी ध्रुव पर सूर्य की किरणें सीधी नहीं पड़ती हैं इसलिए यहां का तापमान भी काफी कम होता है। जैसा कि आपको भी पता होगा कि चंद्रयान-1 ने चंद्रमा पर जाकर पानी की खोज की थी और अब माना जा रहा है कि चंद्रयान-2 कुछ उससे भी ज्यादा खास करेगा। भारत ने बड़ी कामयाबी के लिए कदम बढ़ाया है, इस मिशन के कामयाब होने से चांद पर मानव जीवन के आसार तो होंगे ही इसके अलावा दुनिया भर में भारत का स्थान और भी ऊंचा हो जाएगा।

महिलाओं का भी रहा बड़ा योगदान

इस मिशन को खास बनाती है इसमें महिलाओं की भागेदारी। जी हां इस मिशन के महत्वपूर्ण हिस्से यानि की प्लैनेटरी मिशन की जिम्मेदारी महिलाओं के हाथ में है, ऐसा पहली बार हुआ है। इतना ही नहीं इस मिशन के वैज्ञानिकों में 30 प्रतिशत महिलाएं ही शामिल है। मिशन की प्रोजेक्ट डारेक्टर एम. वनिता हैं, इसके अलावा मिशन डायरेक्टर का कमान भी रितु करिधाल ने संभाला है।