उदय बुलेटिन
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अंर्तजातीय विवाह
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आधुनिक समाज में बेटियों को अपनी मर्जी से शादी करने का हक कब मिलेगा ?

इस आधुनिक समय में अंर्तजातीय विवाह एक बड़ा मुद्दा बन गया है, क्योंकि इसके कारण कई नवयुवकों की हत्याएं हो रही है। 

Puja Kumari

Puja Kumari

अगर आप सोशल मीडिया या फिर खबरों से जुड़े रहते होंगे तो आपको जरूर पता होगा कि आजकल एक विधायक की लड़की का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वो अपने ही पिता से बचाने की गुहार लगा रही है। दरअसल उस लड़की ने वीडियो में बताया है कि उसने एक दलित लड़के से शादी कर ली है जिसकी वजह से उसके परिवार वाले उसे जान से मारने को तत्पर हैं। वीडियो में वो लड़का भी दिख रहा है जिसने अपने बचाव को लेकर कहा कि अगर उसे सुरक्षा नहीं मिली तो उसका बचना मुश्किल होगा।

बेटियों को अपनी इच्छा से शादी करने का कब मिलेगा हक

बात बस इतनी सी है कि जिस आधुनिक समाज की हम बात करते हैं, जहां लड़कियों को अपने मन मुताबिक करियर चुनने की आजादी दी जाती है वहीं अगर बात शादी की आती है तो उनके परिवार वाले जो अपनी बेटी की उपलब्धियों पर इतराते थे वही उसके जान के प्यासे बन जाते हैं। वही पिता, भाई व चाचा जो एक पल अपनी बेटियों को जान से भी ज्यादा बढ़कर मानता है दूसरे पल उनकी जान लेने पर उतारू जाता है वो भी बस इसलिए क्योंकि उसने अपने मर्जी से किसी अन्य जाति में शादी कर ली।

हालांकि यह पहला मुद्दा नहीं है जब किसी जोड़े को शादी के बाद इस तरह से छिप-छिपाकर अपने बचाव के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, बल्कि इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं। ऐसी घटनाओं में अक्सर देखने को मिलता है कि इन जोड़ो की जान उनके परिवार वाले ही ले लेते हैं।

विधायक की बेटी 
विधायक की बेटी 
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विधायक (पप्पू भरतौल) की बेटी (साक्षी मिश्रा) जिसने अजितेश कुमार से शादी की है जो कि दलित जाति से संबंध रखते हैं। साक्षी को समय रहते ये अनुभव हो गया कि उनका अब बच पाना मुश्किल है, इसलिए उन्होने अपने बचाव के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। जानकारी के लिए बता दें कि साक्षी के पिता बीजेपी पार्टी के विधायक हैं। अब यहां सवाल ये उठता है कि क्या हमारे समाज में जाति इतनी सर्वोपरी हो चुकी है कि दो बालिग लोगों के फैसले पर उनके परिवार वाले समर्थन नहीं कर रहे और अपनी झूठी शान को बनाए रखने के लिए युवाओं की हत्या की जा रही है। विधायक से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होने अपनी बेटी के आरोप को साफ तौर पर खारिज कर दिया है।

अंर्तजातीय विवाह में हो रही हत्याएं

आंकड़ों पर गौर करें तो बीते एक माह में देश में जितने भी लोगों ने अंतर्जातीय विवाह किया है उनमें से एक या फिर दोनों की हत्या हुई है, जिसकी संख्या 21 से भी अधिक है। तमिलनाडु में 10 दिन के अंदर 5 ऐसी हत्या हुई वहीं यूपी में चार।

हाल की घटना बताएं तो तमिलनाडु में एक पिता ने अपनी बेटी (ज्योति) व दामाद (सुलइराज) को सोते हुए ही गला रेत कर मार डाला जबकि उनकी बेटी गर्भवती थी। वजह एक ही थी की सुलइराज अनुसुचित जाति का था और ज्योति पल्लवर समाज की थी। इसके अलावा इंदौर में भी एक घटना ऐसी ही घटी जिसमें एक नाबालिक भाई ने अपनी गर्भवती बहन की गोली मारकर हत्या कर दी। हरियाणा में भी 26 साल के एक युवक योगेंद्र ने अंतर्जातीय विवाह किया था जिसके बदले में पत्नी के भाई व पिता ने चाकू मारकर उसकी हत्या कर दी।

ये तीनों घटनाएं जून व जुलाई माह के बीच की है जिसे पढ़कर आपको भी समझ आ गया होगा कि ऐसे परिवार वालों के लिए उनकी जाति कितनी मायने रखती है।

इतनी हत्याओं के बावजूद कब जागेगी सरकार

ये तो हो गई आम लोगों की बात लेकिन विधायक के केस में विचार करने की बात यह है कि ये वही सांसद व नेता होते हैं जो आए दिन जनता के सामने जातिगत व्यवस्था से ऊपर उठकर राजनीति की बात करते हैं ये अपने भाषणों में अक्सर गिनाते हैं कि हम भारतीय हैं, और हम एक हैं। लेकिन क्या असल जिंदगी में इनकी सोच ऐसी है ? इसका जवाब तो आप खुद भी अच्छे से समझ गए होंगे।

खास बात तो यह है कि हमारे देश में सरकार द्वारा ऐसी कई योजनाएं बनाई गई हैं जो अंतर्जातीय विवाह करने वाले लोगों को सपोर्ट करती है। मतलब यह है कि सरकार चाहती है कि लोग इस तरह की घटिया सोच से ऊपर उठे और इसके लिए वो उनका साथ भी देती है तभी तो 'डॉ. अंबेडकर स्कीम, फॉर सोशल इंटिग्रेशन थ्रु इंटर कास्ट मैरिज' Dr. Ambedkar Scheme for Social Integration through Inter-Caste Marriages नामक योजना भी सरकार ने इन लोगों के लिए ही चलाई है। इसके जरिए जो लोग ऐसा साहसी कदम उठाते हैं उन्हें सरकार आर्थिक मदद देने के साथ साथ प्रोत्साहित भी करती है। लेकिन ये योजना एक कोने में धरी की धरी रह जाती है और इसी देश में ऐसे प्रोत्साहित कदम उठाने वाले युवाओं को मौत के घाट उतार दिया जाता है। समझ ये नहीं आता कि आखिर सरकार इसपर सवाल क्यों नहीं उठाती?

अगर वो इन लोगों को प्रोत्साहित करती है तो इन्हें सुरक्षा क्यों नहीं प्रदान करती ? या फिर देश में लगातार बढ़ रही इस तरह की हत्याओं पर रोक क्यों नहीं लगाती ? इसका जवाब तो सरकार ही दे सकती है। जिन लोगों के घर वाले जातिगत भेदभाव जैसी संकीर्ण मानसिकता से ग्रसित हैं उनके पास तो इसका जवाब नहीं होगा क्योंकि इनकी आन बान शान सबकुछ जाति ही है, बेटियां सबकुछ करे लेकिन शादी इनके मर्जी व इनकी जाति में ही करे।