उदय बुलेटिन
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मोदी सरकार का  विनिवेश प्लान 
मोदी सरकार का विनिवेश प्लान |google
देश

आखिर सरकारी कंपनियों काे क्यों बेच रही है मोदी सरकार ?

करोड़ो रूपए के बजट पेश होने के बावजूद सरकार को अपने खर्चों को पूरे करने के लिए बेचनी पड़ रही हैं सरकारी कंपनी की संपत्तियां। 

Puja Kumari

Puja Kumari

जैसा कि आपको भी पता होगा कि हाल ही में मोदी सरकार-2 (Modi government-2) ने इस बार का बजट पेश किया था। जिसको लेकर लोगों के मन में कई सारी आशाएं उमड़ पड़ी थीं पर अफसोस की ये बजट उनकी सारी उम्मीदों को पूरी नहीं कर सका। हालांकि यह भी सच है कि मोदी के दोबारा सत्ता में आने के कारण लोगों कि विश्वसनीयता उनपर काफी बढ़ गई और उन्हें लगा कि सरकार इस बजट में जनता के फायदे को अवश्य ध्यान में रखेगी। यह किस हद तक संभव हो पाया ये आपसे छिपा नहीं है। लेकिन आप सोच रहे होंगे कि बजट पेश होने के इतने दिनों बाद हम एक बार फिर से क्यों इसके बारे में बात कर रहे हैं। तो बताते चले कि भले ही सरकार ने करोड़ो का बजट आपके सामने पेश किया हो पर भारत की आर्थिक स्थिति कुछ सही नहीं है।

वो कहावत आपने सुनी होगी कि पैसे का काम पैसे से ही पूरा किया जा सकता है और मोदी सरकार के लिए फिल्हाल ये उदाहरण बिल्कुल सटीक बैठ रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था को देखा जाए तो तमाम खर्चे सरकार के सामने हैं और वो यह भी सोचती है कि टैक्स की बढ़ोत्तरी करती है तो उनसे जनता नाराज होगी। जीएसटी से भी उन खर्चों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है ऐसे में स्थिति यह बन गई है कि सरकार एक नया प्लान बना रही है, जिसके जरिए वो सरकारी कंपनियों में विनिवेश (Disinvestment plans) करके लगभग 1 लाख करोड़ जुटा सके। इसे आप आसान भाषा में यूं समझ लें कि सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेची जा रही है।

विनिवेश प्लान 
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क्यों बेचनी पड़ रही है कंपनियां

जैसा कि आपको पता भी होगा कि मोदी सरकार देश के विकास पर अपना फोकस करे हुए है और इन विकास कार्यों को ये जल्द से जल्द पूरा करना चाहती है। ऐसे में भारत के विकास कार्यों पर करोड़ों रूपए के खर्च का बोझ बन रहा है जिसकी आवश्यकता सरकार को तुरंत होगी। ऐसे में आम लोगों की तरह सरकार भी वहीं रास्ता अपना रही और वो है 'Beg Borrow Steal'! Beg यानि सरकार लोगों से टैक्स भरने की अपील कर रही है, Borrow यानि अंतराष्ट्रीय बाजारों में कर्ज लेकर, Steal माने सरकार अपनी संपत्ति बेचती है। ऐसे में मोदी सरकार ने यही रास्ता चुना जिसमें वो सरकारी कंपनियों को आंशिक या पूर्ण रूप से बेचेगी।

क्या होता है विनिवेश

विनिवेश (Disinvestment) के बारे में आजकल कई जगहों पर बातें हो रही है, इसलिए यह शब्द घूम फिर कर कई बार आपको सुनने को जरूर मिल जाता होगा। सरल भाषा में समझें तो पैसा कहीं लगाने का मतलब होता है निवेश, वहीं इसके ठीक विपरीत अपना पैसा या हिस्सेदारी वापस लेना विनिवेश कहलाता है। सरकार विनिवेश (Disinvestment) के जरिए किसी भी कंपनी का हिस्सा बाहर के कंपनियों में बेचती है। इसका प्रयोग कई बार भारत सरकार ने किया है।

विनिवेश प्लान 
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विनिवेश (Disinvestment) व निजीकरण (Privatization)एक समझना गलत होगा क्योंकि हर बार ऐसा नहीं होता है। निजीकरण यानि की सरकार अपनी कंपनी को पूरी तरह से किसी को बेच दे तभी यह संभव है। पर हर बार ऐसा नहीं होता है कई बार सरकार कंपनी के कुछ ही शेयर बेचती है जिससे बड़े फैसले करने का हक सरकार के हाथ में रहे।

विनिवेश को लेकर क्या है सरकार का प्लान

वैसे फिल्हाल इस प्लान को लेकर जो भी बातें सामने आई है उसपर सरकार ने मोहर नहीं लगाई है। लेकिन आर्थिक जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि अगले सप्ताह में ही सरकार इस रणनीति को लेकर 3 नए प्रस्ताव लेकर आ सकती है। इसके अलावा शेयर बाजार में जो भी सरकारी कंपनियों हैं उनमें जनता की हिस्सेदारी पर गौर किया जा सकता है। हो सकता है कि सरकार कुछ जमीनों को भी बेचने का प्रस्ताव सामने लाए। वहीं एयर इंडिया को बेचने की घोषणा तो सरकार ने पहले ही कर दी है।