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अठारह वर्षीय गंधम किरण अपनी माँ के साथ
अठारह वर्षीय गंधम किरण अपनी माँ के साथ|Social Media
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माँ की दुआओं ने दिखाया असर , मौत के मुंह से लौटा बेटा

साल 2005 में अपने पति को खोने के बाद, माँ ने बेटे को मौत के मुंह में जाने से बचा लिया  

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

विज्ञान के इस युग में , भगवान के नाम पर तर्क वितर्क करना कभी-कभी बेबुनियाद लगता है। लेकिन एक माँ का अपने बच्चों के लिए प्यार वास्तविक है। तेलंगाना में एक माँ के प्यार ने उसके बेटे को मरने से बचा लिया। आप इस घटना को चमत्कार का नाम दे सकते हैं। लेकिन ये घटना उतनी ही सच्ची है जितनी की ये दुनिया ।

गंधम किरण, 18 साल का है। 2005 में उसके पिता की मौत हो गई थी। वह अब अपनी माँ के लिए जीने की आखिरी उम्मीद है। एक दिन अचानक उसकी तबियत ख़राब हो गई, जांच से पता चला कि वह डेंगू जॉन्डिस से पीड़ित है। खून जांच किया गया तो हेपटाइटिस बी भी निकल आया। दिन-ब-दिन उसकी हालत ख़राब होती गई।

डॉक्टरों ने कहा इसका अंतिम संस्कार कर दो

माँ ने अपने बेटे का बेहतर इलाज कराने के लिए हैदराबाद के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में 26 जून को उसे एडमिट किया। लेकिन उसकी हालत और ख़राब होती चली गई। खून की उल्टी, तेज बुखार उसे ठीक नहीं होने दे रही थी। वह मौत के बहुत करीब आ गया था। 3 जुलाई को डॉक्टरों ने सिदम्मा (गंधम किरण की माँ) को बुलाया और कहा आप अपने बेटे को घर ले जा कर उसका अंतिम संस्कार कर दे। वह अब कभी नहीं उठेगा उसका ब्रेन डेड हो चुका है।

लाचार माँ और कर भी क्या सकती थी। वह अपने बेटे को घर (गाँव पिल्लालामारी) लेकर आ गई लेकिन उसे यकीन नहीं हो रहा था कि अब उसका बेटा इस दुनिया में नहीं है। माँ ने उम्मीद नहीं छोड़ी, वह दिन रात बिस्तर पर पड़े बेटे की सेवा करती रही। हॉस्पिटल से घर जाकर भी माँ ने अपने बेटे को वेंटिलेटर पर रखा।

माँ की दुआओं का असर दिखा

3 जुलाई को घर आने के बाद माँ भगवान से अपने बेटे के लिए दुआ मांग रही थी। और आखिर में भगवान ने उस माँ की पुकार सुना ली। सिदम्मा ने देखा की किरण के चेहरे पर आंसू थे और वह तुरंत स्थानीय डॉक्टर को बुलाकर लाई।

डॉक्टर ने कहा "किरण की नाड़ी धीरे चल रही है। और हैदराबाद वाले डॉक्टर को फ़ोन लगाया गया। पूरी जानकारी दी गई। वहां के डॉक्टरों ने किरण को चार इंजेक्शन देने की सलाह दी।

जिसके बाद किरण की स्थिति धीरे-धीरे ठीक होने लगी। 7 जुलाई को उसकी हालत में सुधार आ गया। वह अपनी माँ से बात करने लायक हो गया।

किरण का इलाज करने वाले राजाबाबू रेद्दी कहते कि मैंने अपनी ज़िंदगी में पहले कभी ऐसा चमत्कार नहीं देखा था।