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काशी की गंगा 
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काशी की गंगा में नालों का गिरना कब होगा बंद, सोशल मीडिया पर हर कोई कर रहा सवाल

काशी में गंगा की सफाई को लेकर भले ही 5 साल से प्रयास किया जा रहा है लेकिन आज भी स्थिति कुछ ज्यादा सही नहीं हुई है। 

Puja Kumari

Puja Kumari

धर्म व आस्था की नगरी काशी, जहाँ हर कोई अपने जीवन के अंतिम क्षणों में मां गंगा की गोद में समाना चाहता है। काशी के गंगा की दुनियाभर में चर्चा होती है। वैसे आपको ये भी पता होगा ही कि काशी जो कि अब वाराणसी (Varanasi) के नाम से जाना जाता है पीएम मोदी (PM Modi) का संसदीय क्षेत्र है। काशी की जनता ने पीएम मोदी को एक नहीं बल्कि 2 बार चुनाव में पूर्ण बहुमत से विजय दिलाया है। लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या पीएम मोदी (PM Modi) मां गंगा के बेटे होने की जिम्मेदारी निभा पाए हैं और अगर निभाया है तो आखिर कितना?

आपको एक बार याद दिला दें कि साल 2014 में जब मोदी ने पहली बार वाराणसी से चुनाव लड़ने का फैसला किया था तब उन्होंने कहा था कि मुझे यहां मां गंगा ने बुलाया है। मैं मां गंगा के जल को दोषमुक्त करूंगा। इसके लिए उन्होंने अभियान भी शुरू किए पर आज जो साक्ष्य हमारे सामने आया है उससे तो मां गंगा को लेकर मोदी के सभी वादे और प्रयास विफल होते दिख रहे हैं।

दरअसल बीते कई दिनों से काशी स्थित बीएचयू (BHU)के न्यूरोलोजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर वी.एन. मिश्रा (Vijaya nath Mishra) ने गंगा की वर्तमान में दयनीय स्थिति पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। प्रोफेसर अपने ट्विटर हैंडल से गंगा की दुर्दशा को दिखाते हुए कई तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। जिसने कई लोगों का ध्यान भी अपनी ओर खींच है। कई सारे ट्वीट में से एक में उन्होंने घोड़ा नाले के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी है, जिसमें उन्होंने कहा है कि रात के अंधेरे का लाभ उठाकर इस नाले का पानी पाइप के जरिए हर रोज गंगा में गिराया जाता है।

हैरानी की बात तो ये है कि ये नाला मशहूर घाट दशाश्वमेध के ठीक बगल में है। इस घाट की आरती देखने के लिए आये दिन हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। यही नहीं इसके अलावा शिवाला, समेश्वर, सिंधिया अन्य कई ऐसी घाट हैं जहां अभी भी नाले का दूषित जल गंगा में गिराया जाता है। हालांकि जब आप यह जाएंगे तो ये नाले सामने दिखाई नही देंगे क्योंकि इन्हें ढ़क दिया गया है पर जब आप गौर करेंगे तो आपको आवाजें जरूर सुनाई देंगी।

गंगा के पानी से हो सकता है कैंसर

जो नाले आये दिन गंगा में गिराया जा रहा है उसका प्रभाव मनुष्यों पर बड़ी ही तेजी से पड़ता है। इतना ही नहीं इससे कई जानलेवा बीमारियों के होने का खतरा भी मंडराते रहता है जैसे- मोटर न्यूरोन डिजीज, अन्य कई तरह के कैंसर आदि।

इन नालों के कारण मनुष्य ही नहीं बल्कि कई सारे जल जीव भी खत्म हो रहे हैं। प्रोफेसर ने जब इसपर गहन अध्ययन किया तो उनको पता चला कि गंगा में इन नालों के मिलने कर कारण जल में ऑक्सीजन का स्तर शून्य हो चुका है जिससे कि जल में रहने वाले सभी जीव धीरे-धीरे मर रहे हैं। अगर हम आंकड़ों की बात करें तो वाराणसी के गंगा में हर दिन करीब 300 MLD गंदा पानी गिरता है।

वहीं 5 सालों के काम की रफ्तार व हाल की वर्तमान स्थिति को देखकर यकीन नहीं हो पा रहा है कि गंगा की सफाई का काम साल 2020 तक हो पायेगा। वजह जो भी लेकिन न ही सरकार अपने इस वादे को पूरी कर पाई है और आगे भी शायद ही कर पाएगी। ऐसे में जो लोग आस्था में विस्वास रखते है वो गंगा के पानी को खुद से दूर नहीं रख सकते।