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राहुल गाँधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया
राहुल गाँधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया|Social Media
देश

तो नए कांग्रेस अध्यक्ष हो सकते हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया !

मध्य प्रदेश में लगा पोस्टर, कांग्रेस में नई पारी की मांग कर रहे कार्यकर्ता 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

कांग्रेस पार्टी में नए अध्यक्ष के चुनाव को लेकर आफरा-तफरी की स्थिति बनी हुई है। एक ओर जहां पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता हार की जवाबदेही लेते हुए अपने-अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं वहीं दूसरी तरफ अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर भी जद्दोजहद शुरू हो चुकी है।

पार्टी के सभी कार्यकर्ता अपने-अपने चहेते नेता को अध्यक्ष पद की कुर्सी पर बैठे देखना चाहते हैं लेकिन कांग्रेस की इस डूबती नाव को किनारे पर कौन ले जायेगा यह सवाल भी सबके सामने है। कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए सबसे पहला नाम राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का चुना गया था। लेकिन उनकी उम्र हो चुकी है और पार्टी को युवा नेता चाहिए। ऐसे में दूसरा नाम पूर्व पार्टी महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया का है। और अब तो मध्य प्रदेश में सिंधिया समर्थक उन्हें अध्यक्ष बनाने की मांग भी करने लगे हैं।

मध्य प्रदेश में लगे हैं पोस्टर

मध्य प्रदेश में कांग्रेस कार्यालय के बाहर सिंधिया के समर्थकों ने कुछ पोस्टर लगाए हैं। जिसमें राहुल गांधी से अपील की जा रही है कि सिंधिया को कांग्रेस का नया अध्यक्ष चुना जाये। जिसके बाद कांग्रेस के मुख्य कार्यालय में भी बहस सिंधिया के पक्ष में होती दिख रही है।

पोस्टर 
पोस्टर 
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राहुल गांधी के इस्तीफा देने के बाद चर्चा की जा रही कि मोतीलाल वोहरा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष होंगे। लेकिन उन्होंने इससे साफ़ इंकार कर दिया। अब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव में सबसे ऊपर सिंधिया का नाम है। 

सिंधिया ने दिया महासचिव पद से इस्तीफा

आपको बता दें कि, राहुल गांधी के इस्तीफे के कुछ दिन बाद पार्टी महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। समर्थकों द्वारा पोस्टर लगाए जाने पर सिंधिया ने अब तक कुछ नहीं कहा है। लेकिन अपने इस्तीफे पर सिंधिया कहते हैं कि "राहुल ने मुझपर भरोसा किया उसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं।"

ज्ञात हो लोकसभा चुनाव के दौरान सिंधिया को उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से 39 सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी, जबकि प्रियंका गांधी को 41 सीटें सौंपी गई थी। प्रदेश में पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशा जनक रहा। पार्टी केवल 1 सीट ही जीत सकी थी।