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अमरनाथ यात्रा 
अमरनाथ यात्रा |Social Media
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सरकार की चिंताओं के बीच अमरनाथ की ‘अमर यात्रा’ 

अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुआ 4,823 श्रद्धालुओं का तीसरा जत्था  

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अमरनाथ की यात्रा शुरू हो चुकी है । अमरनाथ गुफा के लिए बुधवार को 4,600 से अधिक श्रद्धालु जम्मू से रवाना हुए। इस साल अब तक 11,456 तीर्थयात्रियों ने बाबा बर्फानी के 'दर्शन' पूरे किए हैं। इस तीर्थ यात्रा को लेकर सरकार हमेशा से मुस्तैद रही है। इस बार भी यात्रा के शुरू होने से पहले गृहमंत्री अमित शाह खुद जम्मू-कश्मीर के दौरे पर थे और उन्होंने सुरक्षा इंतजाम की समीक्षा की थी। जिसके बाद अमरनाथ की यात्रा शुरू हुई।

यात्रा के पहले दिन सेना अध्यक्ष और जम्मू कश्मीर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारीयों ने पहली यात्रा की और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। सरकार और सेना अमरनाथ की यात्रा को लेकर कोई संकट मोल नहीं लेना चाहती। इसलिए पुलिस को आदेश दिया गया है कि अमरनाथ यात्रा के दौरान हाइवे के हिस्से को सुबह 10 बजे से 3 बजे तक केवल तीर्थ यात्रियों के लिए ही खोला जाए। यहां तक की संसद भवन में भी अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा की गई ।

अमरनाथ यात्रा पर हमला 2017

क्या आप जानते हैं कि सरकार और प्रशासन अमरनाथ की यात्रा को लेकर इतनी सख्त क्यों हैं? दरअसल अमरनाथ यात्रा हमेशा से आतंकियों के निशाने पर रहा है। साल 2017 का आतंकी हमला तो याद ही होगा आपको। इस आतंकी हमले में 7 श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई थी। भारत ने इस हमले का आरोप पाकिस्तान स्थित लश्कर ए तैयबा पर लगाया था। लेकिन पाकिस्तान ने इसकी ज़िम्मेदारी नहीं ली थी।

जिसके बाद भारत अमरनाथ की यात्रा को लेकर अत्यधिक सावधानी बरतने लगा है। इन हमलों के बाद भी सरकार ने यात्रा पर रोक नहीं लगाया। उल्टा इंतजाम और पुख्ता किये गए। इसके पीछे का कारण है, अमरनाथ की महत्ता।

अमरनाथ यात्रा

अमरनाथ यात्रा के बारे में हम सभी परिचित हैं ।अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है । जो भारत के जम्मू कश्मीर में स्थित है। हर साल इस यात्रा का आयोजन किया जाता है । जिसमें देश विदेश से श्रद्धालु भारी मात्रा में दर्शन के लिए आते हैं। ये गुफा बहुत प्राचीन और रहस्यों से भरी पड़ी है।।

अमरनाथ गुफा में कई रहस्य आज भी ऐसे हैं जिससे हमारी ये दुनिया अंजान है । ये रहस्य ना सिर्फ अद्भुत है बल्कि अकल्पनीय भी है।

अमरनाथ गुफा की पवित्र गुफ़ा समुद्र तट से 13000 फीट ऊंची है , गुफा की भीतरी गहराई 19 मीटर है और चौड़ाई- ऊँचाई 16 और11 मीटर है । धार्मिक मह्त्व के अनुसार भगवान भोले के भक्तों के लिए यह गुफा स्वर्ग है। इस गुफा में बर्फ़ीली बूंदों से बनने वाला प्राकृतिक हिम शिवलिंग भगवान शिव का चमत्कार माना जाता है।जिसे देखने के लिए हर कोई लालाइत रहता है।

मुसलमान ने की अमरनाथ की खोज

अमरनाथ गुफा को तीर्थों का तीर्थ माना जाता है क्योंकि भगवान शिव ने यहां माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था । माना जाता है ये काशी से हजार गुना ज्यादा फल देने वाला तीर्थ स्थल है।

इस गुफा की खोज बूटा मालिक नाम के एक मुसलमान ने की थी । कहा जाता है वो गडरिया था, एक बार वो अपने भेड़ो को चराते-चराते जंगल में निकल गया तभी वहां उसे एक साधु मिला। साधु ने बूटा मालिक को कोयले से भरी एक कांगडी दे दी ।जब गडरिया घर लौटा तो वह कांगड़ी सोना बन चुका था । यह देख कर वह हैरान हुआ और साधु की खोज में निकल गया। काफी खोजने के बाद उसे साधु तो नहीं मिला लेकिन वहां उसे अमरनाथ की गुफा मिली। और उस दिन से ही अमरनाथ तीर्थ बन गया ।

अमरनाथ गुफा की एक और मान्यता है, कहा जाता है यहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरनाथ की कथा सुनाई थी । गुफा में आज भी एक कबूतरों का जोड़ा घूमता है ऐसा माना जाता है कि जो भी इस जोड़े को देख ले वो साक्षात शिव पार्वती को देख लेता है।

गुफा के पीछे का अद्भुत पौराणिक रहस्य

एक बार देव ऋषि नारद , भगवान शिव के दर्शन के लिए कैलाश पर्वत पहुंचे थे। भगवान शिव वहां नहीं थे वो वन विहार के लिए निकले हुए थे । ऋषि को देख पार्वती ने उनके आने का कारण पूछा ।नारद ने कहा देवी भगवान शिव के गले में मुंड माला क्यों है।

जब भगवान शिव लौटे तो पार्वती ने उनसे यही सवाल पूछा भगवान ने कहा पार्वती जितने बार तुम्हारा जन्म हुआ है मैंने उतने ही मुंड माला धारण किया है। पार्वती ने पूछा, मेरा शरीर नश्वर है पर आपका नहीं, इसका क्या कारण है। भगवान शिव ने कहा ये सब अमरकथा के कारण है । पार्वती के बार-बार आग्रह करने के बाद भगवान शिव अमरकथा को सुनाने के लिए राजी तो हो गए लेकिन एक दिक्कत थी । जब अमरकथा चल रही हो तब कोई जीव वहां ना रहे । भगवान शिव जब माता पार्वती को अमरकथा सुनाने ले जा रहे थे तब छोटे-छोटे नागों को अनंतनाग में छोड़ा , माथे के चंदन को चंदन वाड़ी में छोड़ा । अन्य पेशियों को पेशियों टॉप पर छोड़ा और गले के शेष नाग को शेष नाग नामक स्थान पर छोड़ दिया ।इस प्रकार भगवान शिव के पंच तत्वों का परित्याग कर इस पर्वत माला पर पहुंचे और पार्वती जी को अमरकथा सुनाई। मान्यता है कि रक्षा बंधन की पूर्णिमा के दिन भगवान शिव खुद इस गुफा में पधारते हैं ।

कहा जाता है अमरनाथ की यात्रा से पूर्ण शुद्धि की प्राप्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में कम से कम एक बार बाबा के धाम जरूर जाना चाहिए।