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राम रहीम का पैरोल 
राम रहीम का पैरोल |Google
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क्या होता है पैरोल, जानें किन मामलों में कैदी को मिल सकती है पैरोल

दो दिन पहले रेपिस्ट गुरमीत राम रहीम ने प्रशासन से 42 दिन के पैरोल के लिए अर्जी दी है जिसमें उसने वजह खेती बताई है। फिर क्या था इसके बाद से ही पैरोल को लेकर तमाम तरह के सवाल उठने लगे। 

Puja Kumari

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‘पैरोल’ (Parole) इस शब्द को आपने कई बार सुना होगा। दरअसल यह एक कानूनी शब्द है जो आमतौर पर प्रचलन में रहता है लेकिन अभी एकाएक ये शब्द आपको सभी न्यूज चैनलों व अखबारों में देखने व सुनने को मिल रहा होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि आजकल रेप व पत्रकार की हत्या के आरोप में जेल में सजा काट रहे राम रहीम को इसकी जरूरत महसूस होने लगी है। साल 2017 से डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम (Gurmeet Ram Rahim) चंडीगढ़ की जेल में अपनी गुनाहों की सजा काट रहा है।

हालांकि इस बीच उसने अपनी सजा कम कराने की काफी कोशिश की लेकिन वो हर बार नाकाम रहा। जिसके बाद पिछले 42 दिनों से वो लगातार पैरोल की मांग कर रहा है। यह भी सच है कि इसकी मांग से हरियाणा की सियासी गलियारे में भी विवाद उत्पन्न हो गए हैं। कई लोग इसके पैरोल के पक्ष में हैं तो कई लोग विपक्ष में। पर इन सब के बीच कई लोगों के मन में पैरोल को लेकर भी असमंजस बने हुए हैं क्योंकि उनको पैरोल के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है इसलिए आज हम आपको पैरोल (Parole) से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देने वाले हैं।

क्या है पैरोल (Meaning of parole )

पैरोल को सीधे शब्दों में समझा जाए तो ये आरोपी के लिए कानून से इजाजत लेने की एक अर्जी होती है, जिसे मानने के लिए प्रशासन किसी भी तरह से बाध्य नहीं होता है। किसी भी आरोपी की पैरोल उस आधार पर स्वीकृत की जाती है जब वो अपने सजा का एक लंबा समय काट चुका होता है और उस दौरान उसके आचरण व स्वभाव को देखते हुए प्रशासन उसे एक तय समय अवधि के लिए पैरोल (जेल से बाहर जाने की अनुमति) दे सकता है। नियम के अनुसार पैरोल की समय अवधि के समाप्त होने के तुरंत बाद आरोपी को वापस जेल में आना होता है। वहीं यह भी सच है कि पैरोल की अर्जी स्वीकृत होना जितना कठिन है उससे कई ज्यादा उसके नियमों का पालन करना कठिन है।

पैरोल
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किन मामलो में मिल सकता है ‘पैरोल’

कानून के अनुसार कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर इन आधारों पर अधिकतम एक माह के लिए कैदियों को मिल सकता है पैरोल।

* कैदी के परिवार के सदस्य को अगर कोई गंभीर बीमारी हो गई हो तो मिल सकता है पैरोल।

* अगर आरोपी के घर किसी भी तरह की दुर्घटना या फिर परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु हो गई हो।

* इसके अलावा कैदी के परिवार में किसी सदस्य की शादी हो रही हो तो पैरोल मिल सकता है।

* खासकर आरोपी की पत्नी द्वारा बच्चे की डिलीवरी हो तो उस दौरान भी पैरोल मिलने की अनुमति है।

* इतना ही नहीं अगर आरोपी के परिवार को किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदाओं से गंभीर क्षति पहुंची हो तो उसे पैरोल मिलना संभव है।

* आरोपी को किसी सरकारी काम, बैंक, प्रॉपर्टी आदी कामों के लिए भी पैरोल मिल सकता है।

गुरमीत राम रहीम के पैरोल पर सियासत

अब सवाल ये आता है कि आखिर गुरमीत राम रहीम (Gurmeet Ram Rahim) के पैरोल को लेकर इतना घमासान क्यों मचा है? सबसे पहली बात तो ये है कि इतने घिनौने अपराध करने वाला ये रेपिस्ट जो न जाने कितनी मासूमों की जिंदगी बर्बाद कर चुका है उसे पैरोल देना क्या जायज है ?

वहीं राम रहीम ने अपने पैरोल की अर्जी 42 दिन के लिए दी है जिसमें उसने वजह बताई है कि उसे खेती करनी है। पर सच तो ये है कि उसके पास जो भूमि है कृषि योग्य नहीं है। ऐसे में राम रहीम की इस पैरोल वाली अर्जी पर सवाल उठना लाजमी है। हो सकता है कि वो पैरोल के जरिए कानून के चंगुल से भागने का प्लान बना रहा हो। क्योंकि प्लान बनाने व बहाना करने में राम रहीम कितना शातिर है ये पूरा देश जानता है।

गुरमीत राम रहीम का पैरोल
गुरमीत राम रहीम का पैरोल
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इसके बावजूद कई नेता व मंत्री ऐसे हैं जो राम रहीम को पैरोल दिलाने के समर्थन में हैं जिसमें हरियाणा के मंत्री अनिल विज का नाम भी शामिल है। उन्हें लगता है कि बाकि कैदियों की तरह राम रहीम को भी पैरोल का हक मिलना चाहिए। वहीं इसके अलावा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राम रहीम की परोल का विरोध नहीं किया है। अब इससे तो साफ समझ आता है कि विधानसभा चुनाव के दरमियान इस रेपिस्ट बाबा के बाहर आने के प्लान को लेकर जरूर कुछ खिचड़ी पक रही है।