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केदारनाथ धाम
केदारनाथ धाम|Google
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प्रशासन हुआ अलर्ट, केदारनाथ में मंडरा रहा है खतरा !

साल 2013 में केदानाथ धाम में जो प्रकृति की विडंबना देखने को मिली थी, उसे आज भी लोग भूला नहीं पाते हैं। प्रकृति ने अगर अपना खेल शुरू किया तो एक बार फिर से कुछ वैसा ही दृश्य दिख सकता है। 

Puja Kumari

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उत्तराखंड में एक आस्था भरी जगह है जिसका नाम है केदारनाथ (Kedarnath Dham)। इस धार्मिक स्थल के बारे में आपने काफी कुछ सुना भी होगा । यहां हर साल इस मौसम में हजारों व लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। खबरों की माने तो इस बार आस्था का सैलाब कुछ ऐसा टूटा की हर साल की अपेक्षा इस साल केदारनाथ में यात्रियों की संख्या का सारा रिकॉर्ड टूट गया।

बताते चलें कि ये मंदिर विशेष इसलिए भी है क्योंकि केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) को 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। लेकिन वहीं दूसरी ओर एक बार फिर से प्रशासन को उस खतरे की आशंका है जो करीब 6 साल पहले केदारनाथ में देखने को मिली थी। हम बात कर रहे हैं साल 2013 की जिस समय यहां प्रकृति का ऐसा विनाश देखने को मिला था जिसमें सिर्फ मौत की चादर ही दिखाई दे रही थी।

केदारनाथ धाम
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इस प्रलय ने मंदिर के गर्भ गृह को छोड़ बाकी सबकुछ अपने अंदर निगल लिया था। ऊँचे पर्वत व घाटियों के बीच स्थित इस धाम में तबाही की शुरुआत बारिश से हुई , जिसके बाद लैंड स्लाइड और फिर नदियों ने अपना उग्र रूप दिखाया था। हालांकि लोग आज भी लाखों की संख्या में यहाँ दर्शन करने पहुंच रहे हैं लेकिन उनके मन में अभी भी उस घटना को लेकर डर जरूर बना हुआ है। हो भी क्यों न भला उत्तराखंड में आई वो आपदा अबतक के हिमालय के इतिहास में सबसे भयानक त्रासदी मानी जाती है।

एक बार फिर खतरे में है केदारनाथ धाम

वजह जो भी हुई हो लेकिन सबसे बड़ा सच ये है की रूह कंपा देने वाली साल 2013 में आई त्रासदी पहली बार तो जरूर देखने को मिला था मगर यह आखिरी बार नहीं है। हाल ही में मिली जानकारी में बताया जा रहा है कि सालों बाद उस दर्दनाक जख्म से उबरकर दुबारा से बसे नए केदारनाथ पर एक बार फिर से खतरा मंडरा रहा है। दरअसल साल 2013 में आई उस आपदा की मुख्य वजह एक झील थी, जो एक बार फिर से केदारनाथ के विनाश का कारण बन सकती है।

केदारनाथ धाम
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केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) से करीब 5 किलोमीटर ऊपर चोराबाड़ी झील (Chorabari Lake) है जिसका साल 2013 में पूरी तरह से विनाश हो गया था लेकिन हाल ही में डीडीआरएफ (District Disaster Relief Force) की टीम व लोकल प्रशासन ने उस जगह का मुआयना किया तो देखा कि उसी झील के ठीक बगल में एक नई झील बन रही है।

ऐसे में प्रशासन को अभी से ही अलर्ट हो जाना चाहिए, उस जगह का जायजा लेने के बाद इस बात की सूचना वैज्ञानिको को भी दे दी गयी है जिसके बारे में उनका मानना है कि ये सामान्य प्रक्रिया है। पर हम इस बात को कैसे भूल सकते हैं कि साल 2013 में जो विनाशकारी आपदा हुई थी वो चोराबाड़ी झील के फटने से ही हुई थी जिसका अंदाजा उस समय भी किसी को नहीं था। वहीं यह भी सच है कि अब कोई भी इंसान दोबारा से उस भयावह दृश्य को देखने की इच्छा नहीं रखता होगा।