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हिमालय ग्लेशियर
हिमालय ग्लेशियर|Google
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दोगुने रफ्तार से पिघल रहा है हिमालय ग्लेशियर, खत्म होने के कगार पर है जनजीवन

आज दुनिया भर में ग्लोबल वार्मिंग एक गंभीर मुद्दा बन चुका है, इसकी वजह से तापमान में बढ़ोतरी हो रही है और हिमालय के ग्लेशियर भी पिघल रहे हैं। 

Puja Kumari

Puja Kumari

बीते कुछ समय से भीषण गर्मी की प्रकोप के साथ-साथ सूखे की मार झेल रही धरती को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई जिसने हम सभी को चिंतित कर दिया है। हाल ही में अमेरीका के कोलंबिया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने शोध किया है जिसमें पता चला है कि हिमालय ग्लेशियर दोगुनी स्पीड से पिघल रहा है।

हिमालय ग्लेशियर
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क्या कहते हैं आंकड़े

इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने आज से करीब 40 साल पीछे के आंकड़े को खंगाला, यानि की 80 से 90 के दशक के बीच अमेरीका के कुछ जासूसी उपग्रहों द्वारा हिमालय की जो तस्वीरें ली गई थीं और वर्तमान समय में आई तस्वीरों से ये साफ समझ आ रहा है कि ग्लोबल वार्मिंग का खतरा हमारी तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसका कारण धरती पर हर रोज बढ़ता तापमान है।

वहीं आंकड़ों के अनुसार देखा जाए तो साल 1975 से 2000 के बीच हिमालय के ग्लेशियर लगभग 20 इंच गल रहे थें जबकि साल 2000 और 2016 के बीच यह दोगुना बढ़ गया। वैज्ञानिकों ने ये शोध हिमालय के आसपास मौजूद 650 ग्लेशियरों पर किया। गौर करने वाली बात ये थी कि इनमें से जो कम उंचाई वाले ग्लेशियर थें वो दस गुना रफ्तार से पिघल रहे हैं।

ग्लेशियर
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क्या हो सकता है खतरा

अगर इन आंकड़ो को गंभीरता से अब भी नहीं लिया जाए तो काफी देर हो जाएगी और शायद समय इतना निकल जाएगा कि हम कुछ नहीं कर पाएंगे। ग्लेशियर के गलने से जहां एक तरफ अन्य नई झीलों का निर्माण होता है वहीं दूसरी ओर बाढ़ का खतरा भी बढ जाता है, खासकर नीचली हिस्से की आबादी को ज्यादा नुकसान होगा।

वहीं इसके अलावा आप गौर करेंगे तो हिमालय ग्लेशियर से जितनी नदियां निकलती हैं उसपर भारत, चीन, नेपाल, भूटान की लगभग 80 करोड़ आबादी निर्भर है पर ऐसे में ये ग्लेशियर अगर पिघल जाएंगे तो धीरे-धीरे सभी संसाधन खत्म हो जाएंगे। वैसे इस बात का अनुमान आप अभी भी लगा सकते हैं क्योंकि भारत के कुछ शहर अभी से ही ग्लोबल वार्मिंग के कारण सूखे की मार झेल रहे हैं।

ग्लोबल वार्मिंग
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हाल ही में आई नीति आयोग की रिपोर्ट पर एक नजर डालेंगे तो हैरानी होगी, क्योंकि इसमें साफ साफ बता दिया गया है कि साल 2030 तक देश की 40 प्रतिशत आबादी के लिए पीने का पानी नहीं होगा। जिसमें दिल्ली, बैंगलुरू, चेन्नई, हैदराबाद के अलावा अन्य 21 शहरों के लिए चेतावनी भी जारी की गई है। ये जल संकट आम जन जीवन को अस्त-व्यस्त करने के साथ ही देश की अर्थव्यस्था को भी काफी हद तक नुकसान पहुंचाएगा।

ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि जो ग्लेशियर इतनी तेज रफ्तार से पिघल रहे हैं उनको भारत का जल स्तंभ/ वाटर हाउस (Water House) कहा जाता है। इसकी वजह से गंगोत्री, यमुनोत्री, सतोपंथ चौराबी, भागीरथ सभी खतरे में है। ये खबर हमारे लिए एक चेतावनी है क्योंकि इसका सीधा असर गंगा पर पड़ेगा, विशेषज्ञों का कहना है कि अब गंगा पर सूखने का खतरा मंडरा रहा है।

ये खबर आपको डराने के लिए नहीं बल्कि सावधान करने के लिए है क्योंकि अगर अभी से हम ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रण करने में कुछ हद तक भी सफल हो जाते हैं तो ये खतरा हमारे लिए टल सकता है। आवश्यकता है कि इस गंभीर विषय पर पूरी दुनिया गंभीरता से विचार करे।